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कलेक्टर ने कराया बैरकों को हैंडओवर

5 वर्ष पहले
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कलेक्टर ने सेंट्रल जेल में बनाए गए नए बैरकों को पीडब्ल्यूडी से जेल प्रशासन को हैंडओवर करा दिया है। यहां नालियों का काम अधूरा है, जिसे अब जेल प्रशासन बनवाएगा।

पीडब्ल्यूडी की लापरवाही व उदासीनता के चलते सेंट्रल जेल में बन रहे 6 नए बैरकों का काम तय समय पर पूरा नहीं हुआ। डेड लाइन तो 6 माह पहले ही पूरी हो गई थी। पीडब्ल्यूडी इसे बार-बार आगे बढ़ा रहा था। सेंट्रल जेल में 1 करोड़ 60 लाख रुपए की लागत से इन बैरकों का निर्माण हुआ। भवन का कार्य पूरा हो चुका है। नालियां नहीं बनी हैं और बिजली का काम रुका हुआ है। हाल में ही दिल्ली से जेल का निरीक्षण करने टीम पहुंची थी। उन्होंने भी ओवर क्राउड देखी और नए बैरकों के हैंडओवर नहीं होने पर हैरानी जताई। उनके जाने के बाद कलेक्टर अन्बलगन पी ने जेल अधीक्षक एसएस तिग्गा को नए बैरकों को उसी हालत में हैंडओवर लेने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि सेंट्रल जेल के 26 बैरकों में 3179 कैदी व बंदी हैं।

डिजाइन बदलने से हुई देर
जेल प्रशासन के बार-बार डिजाइन चेंज कराने से समय आगे बढ़ा। नाली तो एक्सट्रा वर्क है। इसे बाद में भी बनाया जा सकता है।’’ -एम प्रसाद, ईई, पीडब्ल्यूडी

कैदियों की शिफ्टिंग
कलेक्टर के आदेश पर हमने 6 नए बैरकों को अपने हैंडओवर में ले लिया है। अधूरी पड़ी नालियाें का काम अब जेल प्रशासन खुद कराएगा। जल्द ही बंदी व कैदियों को इनमें शिफ्ट किया जाएगा।’’ -एसएस तिग्गा, जेल अधीक्षक

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