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कहां से क्याें बिजली गुल हुई, तत्काल मिलेगी जानकारी

5 वर्ष पहले
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हर खंभे में जीपीएस सिस्टम लगते ही बिजली गुल होने का कारण तुरंत पता चल जाएगा। इससे तत्काल वहां पहुंचकर बिजली कर्मचारी मेंटेनेंस कर सकेंगे। अब तक शहर में जीपीएस सिस्टम लगाने का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। शेष 20 फीसदी काम मार्च अंत तक पूरा होने की बात कही जा रही है।

ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) की सहायता से किसी भी जगहों को आसानी से ढूंढा जा रहा है। अब इसका इस्तेमाल बिजली व्यवस्थाओं के संचालन में भी किया जाएगा। इसी के तहत राज्य के चार शहरों दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव के साथ ही बिलासपुर में भी जीपीएस लगाने का काम चल रहा है। शुरुआत में सर्वे के दौरान ही हर कनेक्शन का डेटा फीड किया जा चुका है। हर खंभे को जीपीएस से कनेक्ट करने के बाद उसे नंबर एलाट किया जाएगा। जीपीएस सिस्टम शुरू करने के लिए कनेक्शन, पोल, ट्रांसफार्मर और खपत की जानकारी भी ली जा रही है। जानकारी के बाद इसे पोल टू पोल जीपीएस में फीड किया जाएगा। सिस्टम के चालू होने पर विद्युत फाल्ट की जानकारी तुरंत मिलेगी और जीपीएस पोल सिस्टम से यह पता लगाया जा सकेगा कि कौन से खंभे या ट्रांसफार्मर में खराबी है। यहां तत्काल मरम्मत शुरू की जा सकेगी।

जीपीएस में मैप के साथ पोल का लोकेशन भी फीड होगा। शिकायत वाले स्थान पर क्लिक कर उस क्षेत्र में बिजली सप्लाई की स्थिति पता की जाएगी। जहां तक बिजली की सप्लाई होगी, नक्शे में वहां तक अलग कलर दिखेगा। वहीं जिस पोल से सप्लाई बंद होगी, वहां से ब्लैक कलर होगा।

जीपीएस ऐसे करेगा काम
ऑनलाइन मिलेगा कनेक्शन
जीपीएस सिस्टम लगाने का काम पूरा होते ही लोगों को नया कनेक्शन आॅनलाइन भी मिलने लगेगा। बस करना यह होगा कि नए कनेक्शन के लिए जो भी आवेदक आएगा, उसे अपने पास के जीपीएस पोल का नंबर याद रखना होगा। उसे तत्काल नया कनेक्शन मिल जाएगा। हालांकि कनेक्शन के लिए अब भी आॅनलाइन आवेदन मंगाए जा रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया पूरी तरह आॅनलाइन नहीं है। जीपीएस की व्यवस्था होते ही यह प्रक्रिया भी पूरी तरह आॅनलाइन हो जाएगी।

मार्च तक काम पूरा करने की कोशिश
इस योजना का काम 80 फीसदी पूरा हो चुका है। जीपीएस सुविधा शुरू होने के बाद आम लोगों के लिए यह बड़ी राहत होगी। इसे मार्च तक पूरा किए जाने की कोशिश की जा रही है।’’ -सुरेश जांगड़े, कार्यपालन यंत्री, पूर्वी डिवीजन, बिजली विभाग

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