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दोनों ओर से खुलेगा एसी कोच का दरवाजा

5 वर्ष पहले
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ट्रेन में आगजनी से होने वाली जनहानि को रोकने बिलासपुर डिवीजन एसी बोगियों में ऐसा दरवाजा लगाने जा रहा है, जो दोनों ओर से खुलेगा। अब तक 5 बोगियों में ऐसे दरवाजे लगाए जा चुके हैं। शेष 74 बोगियों के दरवाजे मार्च अंत तक बदल दिए जाएंगे। बदलाव के निर्देश रेलवे बोर्ड ने दिए थे, जिस पर अमल बिलासपुर डिवीजन में सबसे पहले हो रहा है।

एसी कोच में आग लग जाए तो यात्रियों में बोगी से बाहर निकलने की हड़बड़ी रहती है, लेकिन दरवाजा ही नहीं खुल पाता। दरअसल, अंदर की भीड़ दरवाजे को बाहर की ओर धकेलती है, जबकि दरवाजा भीतर की ओर खुलता है। दरवाजे के करीब खड़े यात्री पर इतना दबाव होता है कि वह दरवाजे को भीतर की ओर खींच ही नहीं पाता। ऐसी बोगियों में यही व्यवस्था है, जिसमें सुरक्षा के लिहाज से बदलाव किया जा रहा है।

23 की मौत के बाद बदलाव के निर्देश
दिसंबर 2013 में नांदेड़ एक्सप्रेस की एसी बोगी बी-1 में आग लग गई थी। जांच में एसी बोगी का दरवाजा अंदर खुलना बड़ी खामी के तौर पर सामने आया था। रेल मंत्रालय ने इसी घटना के बाद एसी थ्री बोगी की गली में लगे पर्दों को हटाने और दोनों ओर खुलने वाला दरवाजा लगाने के निर्देश दिए थे।

बोगियों में स्वच्छता के लिए यलो डस्टबीन
ट्रेन की रिजर्व क्लॉस बोगियों में खाना-नाश्ता के बाद गंदगी टायलेट के पास फेंक दी जाती है। बिलासपुर रेल मंडल ने इस समस्या को दूर करने दो बोगियों को जोड़ने वाली जगह पर दो यलो डस्टबीन लगाई गई है, ताकि यात्री गंदगी को इसमें फेंकें और ऑन बोर्ड हाउस कीपिंग स्टाॅफ इसे नजदीकी स्टेशन में डिस्पोजल के लिए दे दंे। ट्रायल के तौर पर शिवनाथ एक्सप्रेस की दो रैक में सुविधा दी गई है। इसके अलावा स्लीपर बोगियों के वाशबेसिन के नीचे भी डस्टबीन लगाई गई हैं।

सुरक्षा, सफाई पर ध्यान
बिलासपुर रेल मंडल यात्रियों की सुरक्षा और स्वच्छता पर ध्यान दे रहा है। इसके लिए एसी बोगियों में डबल एक्टिंग डोर लगाए जा रहे हैं। वहीं, कपलिंग के पास एक्स्ट्रा डस्टबीन दी गई है। उम्मीद है कि यात्री भी स्वच्छता के प्रति जागरूक होंगे।’’ रश्मि गौतम, सीनियर डीसीएम, बिलासपुर

बिलासपुर में एसी बोगियां
एसी टू टायर - 18

एसी फर्स्ट कम टू टायर - 12

एसी थ्री टायर - 46

एसी टू कम थ्री टायर - 3

ऐहतियात
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