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बच्चों के बस्ते का बोझ अगले सत्र से होगा कम

5 वर्ष पहले
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एजुकेशन रिपोर्टर | बिलासपुर

स्कूल शिक्षा विभाग ने छोटे बच्चों को बस्ते के बोझ से बड़ी राहत दी है। कापी-पुस्तक के लिए पैमाना तय कर दिया गया है। बच्चे 200 से 400 पन्‍नों की कापियों की जगह अब 80 से 100 पन्‍नों की कापी ही स्कूल ले जाएंगे। शिक्षा विभाग के आदेश पर गौर करें तो पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को होमवर्क ही नहीं दिया जाएगा। वहीं कक्षा तीसरी से पांचवीं तक के बच्चों को एक दिन में सिर्फ एक ही विषय का होमवर्क दिया जाएगा। शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह नियम तो पहले से लागू है, लेकिन इस शिक्षा सत्र से कड़ाई से इसका पालन कराया जाएगा। बस्ते के बोझ से छोटे बच्चों को हो रहे शारीरिक और मानिसक नुकसान को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन ने आदेश जारी किया है। चालू शिक्षा सत्र में तो अब परीक्षा नजदीक आ गई है। इसलिए अगले शिक्षा सत्र से इसका कड़ाई से पालन किए जाने की बात कही जा रही है।

बच्चों के वजन के 10 पसरसेंट से ज्यादा नहीं होना चाहिए वेट: शिशु रोग विशषेज्ञ डॉ. प्रदीप सिहारे का कहना है कि बस्ते का वजन बच्चों के वजन के 10 परसेंट से अधिक नहीं होना चाहिए। इससे अधिक वजन होने पर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर प्रभाव पड़ता है। खासकर स्माइन और कंधे पर। उन्होंने बताया कि यदि बच्चे का वजन 16 केजी है तो बस्ते का वेट 1 केजी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। यदि बच्चे का वेट 20 केजी है तो बस्ते का वजन 2 केजी से अधिक नहीं होना चाहिए। यही बस्ते का लिमिट है।

बोझ से मिलेगा छुटकारा
बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को ध्यान मे रखते हुए बस्ते का बोझ कम करने को लेकर आदेश जारी किया गया है। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इसका कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।’’ - सुब्रत साहू, सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग

शासकीय स्कूलों में नहीं है समस्या, टीम बनाएंगे
बस्ते के वजन काे लेकर जारी गाइड लाइन का पालन कराया जा रहा है। शासकीय स्कूलों में तो यह समस्या नहीं है, लेकिन निजी स्कूलों में यह समस्या है। अगले शिक्षा सत्र से इसका कड़ाई से पालन किया जाएगा और जांच के लिए टीम भी बनाई जाएगी।’’ - हेमंत उपाध्याय, डीईओ, बिलासपुर

ये होते हैं छोटे बच्चों के बस्ते में

निजी स्कूल-
भाषा अध्ययन, इंग्लिश, गणित, ड्राइंग समेत अन्य किताबें, सभी विषयों के लिए अलग-अलग मोटी कापियां, लंच बॉक्स, कंपास, वॉटर बॉटल समेत स्कूलों की गतिविधियों के हिसाब से अन्य पुस्तकें।

सरकारी स्कूल- अधिकतम दो कापी-पुस्तक, सिलेट-बत्ती या पेंसिल

जिला शिक्षाधिकारियों के लिए चुनौती
निजी स्कूलों में इस आदेश का पालन करना जिला शिक्षाअधिकारियों से किसी चुनौती से कम नहीं है। दिसंबर में आदेश जारी होने के बाद भी अधिकांश स्कूलों में इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। इसलिए अधिकारी अगले शिक्षा सत्र से इसे कड़ाई से लागू कराने का दावा कर रहे हैं।

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