एनजीटी ने शासन को दिया नोटिस

4 वर्ष पहले
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सकरी-कोटा रोड में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर 4 हजार पेड़ काटे जाने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने छत्तीसगढ़ शासन को नोटिस जारी कर जवाब देने कहा है। याचिकाकर्ता शैलेष पाण्डेय ने शासन के पेड़ काटने के फैसले के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, भोपाल में याचिका लगाई थी। जिसमें मेडिशनल प्लांट काटे जाने के विरोध के साथ पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखने लिए पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। ट्रिब्यूनल ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार, प्रमुख सचिव छत्तीसगढ़ शासन, सचिव पीडब्लूडी, रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड, जिला कलेक्टर और ठेकेदार सुनील अग्रवाल को नोटिस जारी करके जवाब देने कहा है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

सकरी कोटा रोड में पेड़ काटे जाने के विरोध में शैलेष पाण्डेय की याचिका पर एनजीटी ने सभी अनावेदकों को नोटिस जारी किया है। शैलेष पाण्डेय ने अपनी याचिका में कहा है कि सकरी-कोटा रोड में हजारों की संख्या में आयुर्वेदिक पेड़ है, जो वर्षों पुराने है साथ ही भरनी और गनियारी सहित कई गांव को आयुर्वेद गांव घोषित किया गया है। ऐसे में इन पेड़ को काटे जाने के फैसले के पूर्व हजारों आयुर्वेदिक पेड़ों के संरक्षण के लिए कोई योजना नहीं बनाई गई। न ही इसके रोकने के प्रयास किए गए। श्री पाण्डेय की याचिका में यह भी कहा गया है कि इस क्षेत्र में अचानकमार टाइगर रिजर्व है, जहां बड़ी संख्या में वन्यप्राणी है। इसके कारण प्रशासन ने वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। अब मात्र कोटा-लोरमी और टाइगर रिजर्व के पर्यटकों हेतु इस मार्ग का उपयोग छोटे वाहनों के लिए होता है। श्री पाण्डेय ने बताया कि सकरी-कोटा मार्ग में सड़क चौड़ीकरण करने लगभग 4 हजार पेड़ों को काटने की तैयारी की जा रही थी।

49.3 तक पहुंचा गया था तापमान: श्री पाण्डेय ने बताया कि कुछ दिन पूर्व बिलासपुर शहर का तापमान 49.3 तक जा पहुंचा था, इसका सीधा व स्पष्ट कारण है कि अंचल में विकास के नाम पर बेतरतीब तरीके से पेड़ काटे जा रहे हैं। शहर में पूरी तरह से हरियाली खत्म हो चुकी है। ऐसे में शहर से ब्लाक को और गांव को जोड़ने वाले सड़क में हरियाली शेष है। कोनी बिलासपुर, बिलासपुर रायपुर, मोपका-बिलासपुर और कोटा बिलासपुर जैसे सभी सड़क के पेड़ काटे जाएंगे तो यह तापमान 50 डिग्री तक पहुंचना तय है। यही हाल रहा तो हमारी आने वाली पीढ़ी को सांस लेने के लिए शुद्घ आक्सीजन भी नहीं मिलेगा।

इन पेड़ों की यह है उपयोगिता
प्रस्तावित सड़क के दोनों किनारों के वृक्ष उपयोगी हैं। इनमें नील गिरी का पेड़ पेपर बनाने एवं तेल बनाने में काम आता है। औषधीय अर्जुन का पेड़ बुखार और पीलिया की दवा बनाने में काम आता है। इसी तरह हर्रा भी कफ त्रिफला, ब्लड प्रेशर एवं अपच की दवा बनाने में उपयोग किया जाता है। बहेरा वृक्ष त्रिफला, ब्लड प्रेशर एवं अपच की दवा बनाने में काम आता है। सड़क के किनारे लगा आंवला का पेड़ भी अपच और बालों के लिए उपयोगी है। साल का पेड़ त्वचा रोग में काम आता है और तेल भी बनाया जाता है। बरगद व पीपल का पेड़ धार्मिक महत्व है। बेल के फल से गैस, अपच की दवा के लिए बेहद उपयोगी है। शीशम इमारती लकड़ी है इससे दर्द के लिए तेल बनाया जाता है। कोटा रोड़ में आयुर्वेद ग्राम भरनी और गनियारी आयुर्वेदिक ग्राम हैं। यहां दुर्लभ औषधीय के पौधे है। सकरी से कोटा मोड के 4 हजार पेड़ काटे जाने के कारण ये दुर्लभ पेड़ भी काट दिए जाएंगे। ऐसे में इस आयुर्वेद ग्राम का अस्तित्व ही खतरे में है।

तकनीकी जानकारों का कहना है कि रोड में सड़क की डिजाइन में समस्त वृक्ष मुख्य सड़क के बाद दूसरे शोल्डर यानी बाहरी शोल्डर में आ रहे हैं। अतः इनको कटने से बचाया जा सकता है। प्रस्तावित सड़क की डिजाइन में बीटी 7 मीटर, पेव्ड शोल्डर 1.5, हार्ड शोल्डर 2 मीटर है। पेड़ों के मध्य की दूरी 12 मीटर है। इस प्रकार पेड़ हार्ड शोल्डर में भी एक मीटर बाद आ रहे हैं। पेड़ और उसकी जड़ें भी सड़क के किनारों को दबा कर रखती है, और टूटने से बचाती है। इस प्रकार वे एक मजबूत शोल्डर को कार्य करते हैं। वृक्षों की वजह से भू-जल का स्तर स्थिर रहता है, और तापमान के उतार-चढ़ाव के असर से भूमि के आयतन में अंतर नहीं आता। सड़क किनारे लगे हुए वृक्ष बेरियर का काम करते हैं।

क्या कहते है तकनीक के जानकार
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