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कोनी में सिर्फ ट्रांजिट पाइंट रखें, स्थायी रूप से कचरा डंप न करें- हाईकोर्ट

4 वर्ष पहले
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बिलासपुर. कोनी में कचरा डंप करने, उसके आग लगाने के कारण पूरे क्षेत्र में फैल रहे प्रदूषण के खिलाफ नागरिकों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी। हाईकोर्ट ने पूर्व में कचरे में आग लगाने पर रोक लगा दी थी। साथ ही कलेक्टर, नगर निगम, नगरीय विकास विभाग के सचिव, पर्यावरण संरक्षण मंडल समेत अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। 
 
बाद में ठेकेदार एमएसडब्ल्यू सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को भी पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया गया था। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है कि कोनी की जमीन को सिर्फ ट्रांजिट पाइंट के रूप में उपयोग किया जाए, जहां कचरों को अलग-अलग करने के बाद निश्चित जगह पर डंप किया जाए। कलेक्टर को इसकी मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं कि यहां स्थायी रूप से कचरा डंप न किया जाए। एसपी और संबंधित पुलिस अधिकारियों को कलेक्टर और पर्यावरण संरक्षण मंडल के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। 
 
कोनी में बिलासा ताल के पास खसरा नंबर 407 स्थित 1. 03 हैक्टेयर सरकारी जमीन पर पूर्व में कचरा डंप किया जाता था। नागरिकों की शिकायत के बाद तत्कालीन संभागायुक्त ने पूर्व में रोक लगा दी थी। बिलासपुर कलेक्टर ने 13 जनवरी 2016 को यहां कचरा डंप करने की अनुमति दे दी, इसके बाद यहां दोबारा कचरा डंप किया जाने लगा है। रोज शहर से निकला हजारों टन कचरा यहां डंप किया जा रहा है, जबकि यहां करीब आधा दर्जन कॉलोनियां, कई शैक्षणिक संस्थान, सरकारी दफ्तर व धार्मिक निर्माण,बिलासा ताल आदि हैं।
 
हां बड़ी मात्रा में कचरा डंप होने के बाद नगर निगम ने इसमें आग लगा दी, इससे निकले धुएं से कई लोगों की तबीयत खराब हो गई। इसके बाद यहां कचरा डंप करने पर रोक लगाने की मांग करते हुए कलेक्टोेरेट, नगर निगम में आवेदन प्रस्तुत किए गए, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद यहां रहने वाली सरस्वती बाजपेई, अर्चना तिवारी, शैल शर्मा, प्रियंका पांडेय समेत 8 ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका प्रस्तुत की थी। 9 मई को प्रारंभिक सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यहां डंप किए गए कचरे में आग लगाने पर रोक लगा दी थी। साथ ही नगरीय विकास विभाग के सचिव, पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड, बिलासपुर कलेक्टर और नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।
 
बाद में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कचरे पर अभी भी आग लगाई जा रही है, इससे वहां रहने वाले लोग परेशान हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने कलेक्टर से शपथ पत्र मांगा था। कलेक्टर, नगर निगम, पर्यावरण संरक्षण मंडल और ठेका कंपनी एमएसडब्ल्यू सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से बताया गया कि कोनी में कचरे को डंप करने के बाद कचरों को अलग-अलग कर संबंधित जगह पर डंप किया जा रहा है। 
 
 
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