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  • गन्ने की खेती करने किसानों को तैयार किया, दर्जनों युवकों को रोजगार मिल रहा

जमीन बेची, उधार लिया और गुड़ का प्लांट लगाकर दे रहा रोजगार

5 वर्ष पहले
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बिलासपुर. मुंगेली जिले के नवलपुर में रहने वाले महेंद्र कश्यप उन जिद्दी लोगों में से हैं, जो ठान लेते हैं तो करके ही दिखाते हैं। महेंद्र ने रोजगार के विकल्प और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए गुड़ प्लांट लगाया। इसके लिए उन्हें अपनी जमीन तक बेचनी पड़ी और रिश्तेदारों से उधार भी लेना पड़ा। आज वह क्षेत्र के बेरोजगार को रोजगार भी दे रहे हैं।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक लोरमी में लिपिक होने की वजह से महेंद्र को अपने रोजगार की चिंता तो नहीं थी, लेकिन वे गांवों से हो रहे पलायन और महानगरों में ग्रामीणों को बंधुआ बनाए जाने से आहत थे। किसान भी धान की खेती से खास फायदा नहीं होने का रोना रोते थे।
इन समस्याओं को दूर करने के लिए महेंद्र कुछ नया करने की सोचते थे। साढ़े तीन साल पहले किसी काम से वे अपने ससुराल कुंडा (पंडरिया) गए। वहां एक गुड़ बनाने का प्लांट देखा। सप्ताहभर रुककर प्लांट का कामकाज समझा। घर लौटते हुए वे मन वे गांव में प्लांट लगाने की योजना बना चुके थे।
उन्होंने घर वालों से इस बारे में बात की, लेकिन 35 लाख की बड़ी लागत से उनके घर के लोग डर गए। जब महेंद्र ने बताया कि इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा और किसान गन्ने की खेती कर ज्यादा फायदा कमाएंगे। इसमें सभी का हित है तो महेंद्र की जिद के आगे घरवाले भी सहमत हो गए।
महेंद्र ने भाई उत्तम के साथ एक साल तक इलाके का सर्व किया और उन किसानों से मिला, जो गन्ने की खेती करना चाहते थे। महेंद्र ने उनकी मदद की। खुद भी गन्ने की खेती शुरू की। धीरे-धीरे रकबा बढ़ने लगा।
अब 35 लाख रुपए का इंतजाम करना था। लोन के लिए दफ्तरों के कई चक्कर जाया हो गए। फिर घरवालों की सहमति से लोरमी मेनरोड की जमीन बेची और रिश्तेदारों को योजना बताकर सात लाख रुपए उधार देने राजी किया।
मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जाकर प्लांट के लिए मशीनें खरीदीं और मशीन को चालू करने के लिए उत्तरप्रदेश से एक्सपर्ट बुलाया। फरवरी 2014 में प्लांट शुरू हुआ और उनकी मेहनत रंग लाई। यह तीसरा साल है, जब उनके प्लांट में किसान उचित मूल्य में गन्ना की बिक्री करते हैं और उन्हें तत्काल रकम मिल जाती है। वहां रोजाना 600 क्विंटल तक गन्ना खपता है। दर्जनों युवकों को रोजगार मिल रहा है। किसानों की खेती के प्रति सोच बदल रही है। अब वे केवल धान के भरोसे न रहकर गन्ने की खेती भी करने लगे हैं। पूरे इलाके में तीन सौ एकड़ से ज्यादा रकबे में फैली गन्ने की खेती महेंद्र के जज्बे और जिद की कहानी बयां करती है।
कीचड़ में फंस गई मशीन, रतजगा कर चोरी से बचाया
बारिश का सीजन और कच्चे रास्ते पर 15 टन वजन की क्रशर मशनी, धर्मकांटा और गियर बॉक्स कई दिनों तक गांव से दो किलोमीटर पहले कीचड़ में फंसे रहे। मशीन चोरी न हो जाए, इसलिए महेंद्र ने वहां रात-रात भर जागकर पहरा दिया। किसी तरह 15 हजार रुपए खर्च कर मशीनें लेकर वे घर पहुंचे।
इन गांवों में बदलाव की बयार, गन्ने की खेती कर रहे किसान
लोरमी क्षेत्र के नवलपुर, सकेरी, सुकली, हरनाचाका, भठली, देवरहट, धनगांव, बोईरपारा, हड़गांव, कोतरी, पीपरखुंटी, झझपुरी समेत अन्य गांवों में बदलाव की बयार चल रही है। किसान धान के साथ ही गन्ने की खेती भी करने लगे हैं। महेंद्र के प्लांट में मुंगेली और पथरिया इलाके के किसान भी गन्ना बेचते हैं।
मुश्किल सफर में हौसला बनाए रखा
प्लांट के लिए जमीन बेची, उधार लिया। जमीन डायवर्सन, बिजली सप्लाई के लिए ट्रांसफार्मर, पर्यावरण अनुमति के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए। लोन के लिए कोशिश की, लेकिन नहीं मिला। सफर मुश्किलों भरा रहा। हौसला बनाए रखने की वजह से प्लांट शुरू हुआ।''
-महेंद्र कश्यप, प्लांट संचालक