बिलासपुर. शहर में सड़कों की बदहाली और यहां पसरी अव्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। उन्होंने अधिकारियों से दो टूक शब्दों में कहा कि जब उन्हें सड़कों की बदहाली दिखती है तो अफसरों ने कौन सा चश्मा पहन रखा है, जिसके कारण उन्हें यह दिखाई नहीं देता।
कोर्ट ने गौरव पथ निर्माण के सालभर बाद डामरीकरण करने की बात को गंभीरता से लिया है। इसके लिए अधिकारियों से पूछा गया है कि संबंधित ठेकेदार और सुपरविजन करने वाले अफसरों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है? अधिकारियों ने इस पर कोई जवाब पेश नहीं किया है।
सीवरेज परियोजना और ट्रैफिक अव्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई है। याचिकाकर्ता डॉ. प्रदीप सिहारे, शेखर तिवारी समेत अन्य हैं, जिन्होंने कोर्ट को इन बातों से अवगत कराया है। मामले की सुनवाई जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर और इंदरसिंह उपवेजा की डिवीजन बेंच में चल रही है।
सुनवाई के दौरान शुक्रवार को कलेक्टर अन्बलगन पी, ट्रैफिक डीएसपी समेत अन्य अधिकारी कोर्ट में मौजूद थे। कोर्ट ने सीवरेज और यातायात के कारण जनता को रही परेशानी के मद्देनजर इन्हें सुधार करने की नसीहत दी।
गौरवपथ में किए गए निर्माण को लेकर उन्होंने साफ तौर पर कहा कि किसी कांक्रीट रोड की लाइफ 35 साल की होती है, पर इस सड़क पर सालभर के भीतर डामरीकरण करना पड़ गया। इससे काम में बदइंतजामी दिखती है।
उन्होंने यहां के ठेकेदार और माॅनिटरिंग करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है? इस पर भी सवाल किया। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अधिकरियों का काम कागज में दिखता है, पर मौके पर यह तस्वीर नजर क्यों नहीं आती हैं, जिससे पब्लिक को राहत मिले।
याचिकाकर्ता के वकील को भी सुनाई खरी-खोटी
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकीलों को भी खरी-खोटी सुनाई है। उन्होंने अधिवक्ता से कहा है कि कोर्ट कोई पोस्ट ऑफिस नहीं है, जहां आवेदन लगाकर भूल गए। उनकी याचिका के बाद शहर में क्या चल रहा है, इससे भी कोर्ट को अवगत कराना उनकी जिम्मेदारी है।
ऐसा नहीं करने के कारण उन्होंने वकीलों को बहस करने से रोक दिया और आगे की सुनवाई के लिए 3 मार्च 2015 की तारीख बढ़ा दी है।