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  • नागोराव शेष स्कूल को बचाने समाजसेवियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

नागोराव स्कूल के स्थानांतरण का मामला हाईकोर्ट पहुंचा

5 वर्ष पहले
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बिलासपुर. जूना बिलासपुर के नागोराव शेष स्कूल को बचाने के लिए समाजसेवियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर स्कूल के स्थान पर स्कूल ही चलाने की मांग की है। उन्होंने इसके स्थानांतरण को 0-14 वर्ष तक के बच्चों को मिलने वाले शिक्षा के अधिकार का हनन बताया है। मामले में डिवीजन बैंच ने 17 फरवरी को शिक्षा अधिकारी को उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
शहर के 111 साल पुराने नागोराव शेष स्कूल का स्थानांतरण कर भवन को आयुर्वेद कॉलेज को दिया जा रहा है। यहां पढ़ने वाले कक्षा 6वीं से 12वीं तक के बच्चों को गवर्नमेंट स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया। वहीं प्राइमरी स्कूल पुत्रीशाला में लगाया जा रहा है।
स्कूल का नाम मिटाकर आयुर्वेद कॉलेज ने अपने नाम कर दिया। इससे स्कूल का भविष्य संकट में चला गया। इसे लेकर पूर्व पार्षद ओमप्रकाश देवांगन ने अधिवक्ता सौरभ शर्मा और तारकेश्वर नंदे के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।
इसमें उन्होंने बताया कि बच्चों को कन्या स्कूल में भेजा जा रहा है, इससे उनका मिड डे मील प्रभावित हो रहा है। नगर निगम ने 8 दुकानों को आयुर्वेद कॉलेज को दिया था, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी ने पूरा स्कूल कॉलेज को दे दिया।
यह स्कूल कहीं और मर्ज नहीं हुआ है, मर्ज करने के लिए राज्य शासन से अनुमोदन जरूरी है। राज्य और केंद्र सरकार प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा दे रही है, जबकि यहां प्राथमिक स्कूल के बच्चों को निकालकर भवन को कॉलेज के छात्रों के लिए दिया जा रहा है। इसके कारण बच्चों के राइट टू एजुकेशन का भी हनन हो रहा है।
मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने जवाब के लिए बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी को 17 फरवरी को उपस्थित होने को कहा है।
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