(चकरभाठा रोड में सड़क किनारे कोयले के कई डिपो नजर अाते हैं। इनमें से कई अवैध हैं, जिनके खिलाफ सालों तक कोई कार्रवाई नहीं होती।)
बिलासपुर । जिले में लिंकेज के कोयले पर एसईसीएल, खनिज और पुलिस ने अचानक पहरा बढ़ा दिया है। इसी का नतीजा है कि बीते डेढ़ महीने में तीन बड़ी कार्रवाई हुई जाे एसईसीएल की विजिलेंस टीम, खनिज विभाग व पुलिस महकमे ने की। इनमें 17 वाहन पकड़े गए, जिनमें से ज्यादातर रसूखदारों के हैं। दरअसल, कोरबा रोड में बेलतरा से लेकर रायपुर रोड के सरगांव तक नेशनल हाईवे के किनारे कोल डिपो में अवैध कोयले का कारोबार चल रहा है।
फैक्टरियों या रजिस्टर्ड प्लाॅट के लिए जारी माल से कोयला चोरी कर इन डिपो में खपाया जाता है। पिछले साल पुलिस ने 22 कोल डिपो में छापेमारी कर लाखों का अवैध कोयला जब्त किया था। खनिज विभाग की जांच में इन डिपो में स्टॉक समेत कई गड़बड़ियां सामने आईं। बड़ी कार्रवाई के बाद इस पर लगाम लगने की उम्मीद थी, लेकिन लगातार निगरानी और धरपकड़ के कारण ऐसा नहीं हुआ। इसी साल अगस्त में बेलतरा के एक डिपो से ढाई लाख का कोयला जब्त हुआ। रायपुर, कोरबा, कोटा हो या मस्तूरी रोड, सड़क के दोनों ओर प्लाॅटों में कोयले का अवैध कारोबार जारी है। हालांकि कोलवाशरी को मिलाकर करीब 80 लाइसेंसधारियों के भी प्लाॅट हैं। इनकी आड़ में कहीं अधिक अवैध प्लाॅट चल रहे हैं, जिनमें चोरी का कोयला खपता है। इधर, एक बार फिर लिंकेज के कोयले के अवैध कारोबार के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू हो गई है।
जानकार बता रहे हैं कि यह कोयला एसईसीएल की कुसमुंडा खदान से निकाला जा रहा है। ऐसे में एसईसीएल की विजिलेंस टीम कोयला लेकर निकल रहे ट्रकों की निगरानी कर रही है, वहीं पुलिस व खनिज अमले को भी कड़ी निगरानी के लिए कहा गया है। इधर, सवाल खनिज चौकियों पर भी है कि जब अमला जांच में जुटा रहता है, फिर कैसे ट्रक के ट्रक पार हो जाते हैं। इन पर ध्यान क्यों और किनके इशारे पर नहीं दिया जाता?