बिलासपुर. आप 1 जनवरी 2015 को 18 साल के होने जा रहे हैं या आपका नाम विधानसभा या लोकसभा चुनाव के दौरान वोटर लिस्ट में नहीं जोड़ा जा सका है तो 22 सितंबर को आखिरी तारीख है। इस बार आप चूक गए तो हो सकता है कि नाम जुड़वाने के लिए पूरे चार साल इंतजार करना पड़े। नाम जुड़ेगा तो मतदाता परिचय-पत्र मिलेगा। इससे नगर निगम चुनाव में अपने वार्ड से पार्षद और नगर निगम में मेयर का चुनाव कर सकेंगे।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटवाने के लिए शहर के सभी वार्डों में 57 जगह 11 सितंबर से कैंप जारी हैं। इसके लिए शिक्षक-शिक्षाकर्मियों के साथ ही जल संसाधन विभाग के सब इंजीनियरों की ड्यूटी लगाई गई है। अधिकारी-कर्मचारियों को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक अनिवार्य रूप से कैंप में रहकर लोगों से आवेदन लेने की हिदायत दी गई।
कैंप में 1 जनवरी 2015 को 18 साल पूरे करने जा रहे युवक-युवतियों के अलावा वे लोग भी आवेदन कर सकते हैं जिनके नाम किसी वजह से विधानसभा और लोकसभा चुनाव में नहीं जोड़े जा सके थे। ऐसे में वे वोट देने से वंचित रह गए थे। इसके बाद वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए चार साल का लंबा इंतजार करना पड़ सकता है क्योंकि इस बीच शहर में कोई चुनाव नहीं है। 2013 में विधानसभा चुनाव हुआ था, जो फिर 2018 में होगा। शहर में इस समय वोटरों की संख्या 2.84 लाख है।
खामियां मिलने का सिलसिला नहीं थम रहा
नगर निगम की मतदाता सूची में खामियां मिलने का सिलसिला थम नहीं पा रहा है। इधर, वार्डों के आरक्षण को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो रही हैं तो वहीं पार्षद प्रशासन से मतदाता सूची में गड़बड़ियों की शिकायत कर रहे हैं। अब वार्ड एक और 33 के पार्षद ने तहसीलदार से गड़बड़ी को लेकर शिकायत की है।
दिसंबर में होने जा रहे चुनाव के लिए दो लाख 84 हजार मतदाताओं के नामों वाली मतदाता सूची का प्रकाशन 11 सितंबर को किया गया। सूची प्रकाशित होने के दूसरे ही दिन से वार्डों के पार्षद प्रशासन के पास पहुंचने लगे। नगर निगम के उप नेता प्रतिपक्ष व जूना बिलासपुर के भाजपा पार्षद ओम प्रकाश देवांगन ने नायब तहसीलदार नरेंद्र बंजारा से उनके वार्ड में एक-एक मतदाता का नाम सूची में कई जगह प्रकाशित होने की शिकायत की। वार्ड 16 व वार्ड 21 के पार्षदों ने भी मतदाता सूची में खामियां होने की जानकारी प्रशासन को दी।
दरअसल वार्ड 16 के 150 मतदाताओं के नाम वार्ड 17 की मतदाता सूची में चले गए हैं। यही हाल वार्ड 21 का है। यहां के नागरिकों के नाम वार्ड 22 में शामिल हो गए हैं। जनप्रतिनिधि इसके लिए अधिकारियों की लापरवाही और सर्वे करने वाले कर्मचारियों को दोषी ठहरा रहे हैं। दबाव में आकर प्रशासन ने मतदाता सूची की जांच और भौतिक सत्यापन के लिए आधा दर्जन टीमों का गठन किया। पिछले तीन दिनों से ये टीमें डोर-टू-डोर सर्वे कर रही हैं। फिर भी गड़बड़ी जारी है।
वार्ड 33 की पार्षद राखी लाल्टू घोष ने वार्ड से 400 मतदाताओं के नाम गायब होने की शिकायत की। मौके पर जाकर सत्यापन किया गया। पता चला कि 400 तो नहीं पर 246 मतदाताओं के नाम गायब हैं। इसी तरह वार्ड क्रमांक एक के पार्षद ने 150 मतदाताओं के नाम वार्ड तीन की मतदाता सूची में जुड़ने की शिकायत प्रशासन से की है। नगर निगम के 66 वार्डों का आरक्षण सोमवार को होने वाला है। इसके बाद वार्डों की तस्वीर साफ हो जाएगी।