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अंतिम दिन 1800 एडमिशन, छात्रों का आरोप- हर सीट पर एक लाख तक बोली

7 वर्ष पहले
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बिलासपुर. बीएड में एडमिशन के लिए हर सीट पर 50 हजार से एक लाख रुपए तक की बोली लगी है। शिक्षा की डिग्री हासिल करने के लिए पात्र उम्मीदवारों की अनदेखी की गई। शहर के कई काॅलेजों में ऐसे मामले सामने आए हैं। काउंसिलिंग करवाने वाली एमकेसीएल के तरीके पर भी सवाल उठाए गए हैं। काउंसिलिंग के आखिरी दिन 1800 सीटों पर एडमिशन से भारी गड़बड़ी की बात सामने आ रही है।

बीएड में एडमिशन के लिए एमकेसीएल ने पिछले दिनों काउंसिलिंग करवाई। पहली काउंसिलिंग में एडमिशन के बाद दूसरी में उम्मीदवारों ने रुचि नहीं ली। यही कारण है कि प्रदेश के बीएड कॉलेजों में 1800 सीटें खाली रह गईं, लेकिन तीसरी काउंसिलिंग में सभी 1800 सीटों पर एडमिशन हो गया। आखिरी दिन बीएड काॅलेजों में अधिकांश सीटों पर एडमिशन नहीं सौदेबाजी की गई। इसमें कम रैंकिंग वाले स्टूडेंट बाहर हो गए और अधिक रैंक वालों को एडमिशन दे दिया गया। इस तरह की गड़बड़ी करने वालों में सीएमडी कॉलेज सबसे आगे है। कुछ उम्मीदवारों ने इसके एवज में 50 हजार से एक लाख रुपए तक की बोली लगने का आरोप लगाया है।
आईडी कहीं और की, फिर भी हो गई काउंसिलिंग

सीएमडी कॉलेज से दो छात्राओं की काउंसिलिंग 50800074 आईडी से हुई है। शहर में एमकेसीएल के पांच अधिकृत काउंसिलिंग सेंटर हैं। यह आईडी उन सेंटरों की आईडी से मैच नहीं करती। जाहिर है, यह आईडी कहीं और की है। हालांकि कोई स्टूडेंट किसी भी जगह के सेंटर से काउंसिलिंग में शामिल हो सकता है, लेकिन यहां दो छात्राअों के मामले में ऐसा नहीं है। शहर में रहने वाली ये छात्राएं कहीं और जाकर काउंसिलिंग में शामिल क्यों होंगी, जबकि यहां काउंसिलिंग के सेंटर हैं। यह इसलिए हुआ क्योंकि वे यहां के सेंटर में शामिल होतीं तो उनकी अधिक रैंक होने पर भी गलत तरीके से एडमिशन का पर्दाफाश हो जाता। इन छात्राओं से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया।
पारदर्शिता नहीं अपनाई गई
मुझसे अधिक रैंक वालों का एडमिशन हो गया है, लेकिन मेरा नहीं। यह मेरे और ऐसे ही अन्य स्टूडेंट के साथ अन्याय है। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं अपनाई गई है।- तृप्ति नेताम, रैंक 43495
फिर काउंसिलिंग होनी चाहिए
मेरा एक साल बर्बाद हो जाएगा। अधिक रैंक होने के बाद भी दूसरे स्टूडेंट का हो गया, मेरा नहीं। इस पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर फिर से काउंसिलिंग होनी चाहिए।- राकेश कुमार भट्ट, रैंक 32851
सीधी बात :
मुझे भी लगता है, कॉलेजों ने अतिक्रमण किया है : हेमंत साव, उप संचालक, एससीईआरटी
- बीएड काउंसिलिंग में गड़बड़ी हुई है?
नहीं, ऐसा नहीं है।
- कम रैंक वालों को किनारे कर अधिक रैंक वालों को एडमिशन दिया गया है?
शिकायतें हैं... पर ऐसे मामले कम हैं।
- एडमिशन के लिए 50 हजार से एक लाख रुपए तक लिए गए हैं?
मुझे भी लगता है कॉलेजों ने अतिक्रमण किया है। प्रमाण लाइए, कार्रवाई होगी।
मुझ पर लगाए गए आरोप झूठे, नियमों का पालन हुआ है : राजकुमार पंडा, बीएड प्रभारी, सीएमडी कॉलेज
- आप पर आरोप हैं कि पैसे लेकर अधिक रैंक वाले को एडमिशन दिया?
ये आरोप सरासर झूठे हैं। मैंने ऐसा नहीं किया।
- तो कम रैंक वालों का एडमिशन क्यों नहीं हुआ?
स्टूडेंट को अारक्षण की जानकारी नहीं है। इस वजह से उन्हें गलतफहमी हुई है।
- आपके यहां रैंक 11 हजार से 44 हजार कैसे पहुंची?
हमने एससीईआरटी के नियमों का पूरी तरह पालन किया है। कोई भी देख सकता है।