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लंबी कवायद के बाद लमेर नाले पर शुरू होगा पुल बनाने

6 वर्ष पहले
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बिलासपुर। तुरकाडीह से भैंसाझार तक 26 किलोमीटर की सड़क पर सुचारू यातायात में बाधा बना लमेर नाला आने वाली बरसात में गांवों और आबादी का नहीं काट पाएगा। लंबी कवायद के बाद आखिरकार लोक निर्माण विभाग ने पुल निर्माण के लिए दोबारा टेंडर कॉल किया है।
सकरी-कोनी बाइपास रोड पर तुरकाडीह पुल बंद हाेने से रतनपुर जाने के लिए तुरकाडीह से भैंसाझार वाली सड़क को ही सबसे उपयुक्त माना गया था। लेकिन इस सड़क पर सबसे बड़ी बाधा खरगहनी के पास स्थित लमेर नाला है। अरपा नदी से लगभग एक किलोमीटर पहले नाले का पाट लगभग 50 मीटर चौड़ा है। इतने चौड़े पाट पर पुल तैयार होने में भी समय लगेगा। लोक निर्माण विभाग के डिवीजन क्रमांक 1 ने तुरकाडीह से निरतु, घुटकू, गो बंद, लमेर, खरगहनी होते भैंसाझार तक 26 किलोमीटर सड़क तैयार करवा दी है। खरगहनी के पास स्थित लमेर नाला इस सड़क को सुचारू चलाने में सबसे बड़ी बाधा थी।
इस पर छोटा पुल का निर्माण होना है। इसकी बजट में मंजूरी पीडब्ल्यूडी ने ले ली। इसके बाद रॉक टेस्टिंग के लिए तत्काल टेंडर कर दिया गया। 6 महीने तक रॉक टेंडर नहीं होने के बाद अब विभाग ने नए सिरे से टेंडर कॉल किया है। रॉक टेस्टिंग होते ही पुल के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। पुल की लंबाई 50 मीटर है इसलिए इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा। 6 महीने में यह तैयार हो जाएगा। यानि कि अगली बारिश से पहले पुल बनकर तैयार हो सकता है। ऐसा विभागीय अफसर दावा कर रहे हैं।
मिलेगी राहत
लमेर नाला में पुल का निर्माण होने से मुख्य मार्ग पर बसे गांव तुरकाडीह, निरतू, घुटकू, गो बंद, खरगहना, खरगहनी, लमेर सहित कुछ अन्य गावों के ग्रामीणों को भैंसाझार होकर रतनपुर और जोगीपुर होते हुए करगीरोड कोटा तक सीधे पहुंचने में आसानी होगी। बारिश उसके उसके चार महीने बाद तक लमेर नाला नहीं सूखता है इसलिए ग्रामीणों को घूमकर दूसरे गांव से अपने गांव तक आना पड़ता है।
पुल बन गया तो सबकुछ आसान हो जाएगा। सड़क पर पड़ने वाले गांव के अलावा रतनपुर, कोटा और आसपास क्षेत्रों की एक लाख से अधिक आबादी को इसका लाभ मिलने वाला है। इस पुल का निर्माण आपस में बंट चुके गांवों को एक करने में खासी भूमिका निभाएगा।

एनीकट भी बनेगा सहारा
लमेर नाला पर पुल बनाने का निर्णय लोक निर्माण विभाग ने लिया। इससे पहले वहां पर सिंचाई विभाग ने एनीकट निर्माण का काम शुरू कर दिया है। लगभग दो करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन एनीकट के दोनों ओर के