बिलासपुर. वेलकम डिस्टलरी बंद करवाने के लिए आंदोलनकारी जुट नहीं पाए। इसके कारण मजदूरों के साथ टकराव की स्थिति पैदा नहीं हुई। ऐहतियात के तौर पर यहां पुलिस के 60-70 जवान तैनात किए गए थे।
कोटा छेरकाबांधा स्थित वेलकम डिस्टलरी बंद करने की मांग को लेकर जिला पंचायत सदस्य दीपक रजक की अगुवाई में कुछ लोग सोमवार को फैक्टरी के बाहर धरना देने वाले थे। इधर, फैक्टरी के मजदूरों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इससे दाेनों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई।
मजदूरों ने कलेक्टर से मिलकर जहां कथित नेता के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करवाने की मांग की, वहीं शनिवार को उसे गिरफ्तार करने उन्होंने कोटा थाने का घेराव कर दिया। प्रशासन के सामने असमंजस की स्थिति बन गई। किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसके लिए पुलिस ने एक दिन पहले ही रविवार को जिला पंचायत सदस्य को बुलाकर शांतिपूर्वक आंदोलन के लिए लिखित में आश्वासन ले लिया था। यह भी कहा था कि वह अपना तंबू फैक्टरी से करीब 500 मीटर दूर लगाए।
टीआई ने गड़बड़ी होने पर उसे ही जिम्मेदार मानकर कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। आंदोलन में शामिल लोगों को जब यह पता चला तो उन्होंने सोमवार को प्रदर्शन करने के लिए जिला पंचायत सदस्य के साथ जाने से मना कर दिया।
सुबह से दोपहर तक केवल 5-10 लोग ही फैक्टरी के करीब जुट पाए। इधर, मजदूर भी आक्रामक नजर आए। काम छोड़कर सभी गेट के बाहर बैठे हुए थे। उनके बीच टकराव की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने उन्हें भीतर भेजा। दोपहर के बाद आए हुए प्रदर्शनकारी भी लौट गए।
परदे के पीछे कुछ शराब माफिया
जिले के कुछ शराब माफिया वेलकम डिस्टलरी को बंद करवाना चाहते हैं। इससे उन्हें दो फायदे होंगे। वे यहां खुद फैक्टरी डालने की जुगाड़ में हैं। दूसरा फैक्टरी प्रबंधक जो दूसरे प्रदेशों में खुद शराब की ठेकेदारी करता है, वह यहां भी अपना कारोबार शुरू न कर दे। वेलकम डिस्टलरी स्प्रिट बनाती है। यह शराब बनाने के काम आता है। इसकी खपत बाहरी प्रदेशों में होती है। प्रदेश में स्प्रिट की यह एकमात्र फैक्टरी है।
गंदा पानी व दुर्गंध ग्रामीणों की समस्या
फैक्टरी से निकलने वाला गंदा पानी ग्रामीणों की समस्या है। प्रबंधन इसका उपयोग कंपोस्ट खाद बनाने के लिए करता है। यह किसानों को मुफ्त दी जाती है। फैक्टरी से दूर इसका अलग प्लांट है। गंदा पानी नालियों के जरिए उस प्लांट में जाता है। कुछ किसान इसे बीच में ही फोड़कर पानी अपने खेतों में ले जाते हैं। इसी के चलते दुर्गंध फैलती है।
2000 से अधिक मजदूरों के काम करने का दावा है
छेरकाबांधा, जोगीपुर, खुरदुर सहित आस-पास के 8-10 गांव के मजदूर फैक्टरी में काम करते हैं। इनकी संख्या 2000 से अधिक बताई जा रही है। फैक्टरी बंद होने की स्थिति में उनसे काम छिन जाएगा, इसलिए वे बार-बार आंदोलन का विरोध करते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजा जांच के लिए
ग्रामीणों की मुख्य समस्या फैक्टरी से निकलने वाला गंदा पानी है। यह सड़क व खेतों में फैलकर बदबू पैदा करता है। जिला प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम को जांच के लिए भेजा था। बोर्ड ने फैक्टरी के आस-पास जाकर जांच की और अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद प्रबंधन को फैक्टरी के भीतर वाटर प्यूरीफायर लगाने के निर्देश दिए थे। कहा गया था कि फैक्टरी संचालक पानी को साफ कर बाहर छोड़े।
फैक्टरी प्रबंधन ने प्रदूषण बोर्ड को लिखित में आश्वासन देकर समय मांगा था। इसके लिए करीब दो करोड़ की लागत से एक प्लांट बन रहा था। इसी बीच हादसा हो गया। एवरेटर लगने से बाहर निकलने वाला गंदा पानी रुक जाएगा। मशीन गंदे पानी को भीतर ही भाप बनाकर उड़ा देगी। जो बच जाएगा, वह साफ होकर निकलेगा। बचे-खुचे कचरे से प्लांट के भीतर खाद बनाई जाएगी। सोमवार को पर्यावरण नियंत्रण की टीम फिर जांच के लिए छेरकाबांधा गई थी।