बिलासपुर। बिलासपुर हो या संभाग के कोरबा, रायगढ़, जांजगीर-चांपा जिले,हर जगह दूसरे प्रांत के अपराधी आए दिन वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस के पास इनकी गतिविधियों को रोकने के लिए कोई सिस्टम नहीं है। इन पर अंकुश लगाने के लिए कभी कोई ठोस योजना भी नहीं बनी। अपराधी इसका फायदा उठा रहे हैं। उत्तरप्रदेश, बिहार, उड़ीसा, मध्यप्रदेश व झारखंड के बदमाशों के लिए संभाग के ये क्षेत्र "ठीहा' बन गए हैं।
दूसरे सूबों से वे अपराधों को अंजाम देकर आते हैं और यहां भी डकैती, चोरी कर अासानी से निकल जाते हैं। खुफिया तंत्र, मुखबिर और पुलिस की अपनी व्यवस्था जरूर है, लेकिन इनमें सामंजस्य नहीं है। यही वजह है कि अपराधी अपने मंसूबों में कामयाब हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद संभाग में अपराधियों की घुसपैठ बढ़ी है। सबसे अधिक अपराधी सीमावर्ती जिले के सक्रिय हैं। शहडोल के अपराधियों को यहां आने में केवल दो से तीन घंटे लगते हैं। वे पहले यहां आकर रैकी करते हैं, फिर सीधे वारदात करते हैं। पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगती। सीमावर्ती थाने चौकस नहीं हैं। अपराधी आने के लिए ऐसे रास्तों का चयन करते हैं, जहां की पुलिसिंग कमजोर हो। मध्यप्रदेश के अपराधी राजेंद्रग्राम होते हुए अमरकंटक में प्रवेश करते हैं, फिर यहां से केंवची होकर सीधे जिले में घुस आते हैं। वे स्थानीय लोगों और सरकारी मुलाजिमों को पैसे का लालच देकर उन्हें भी अपने साथ अपराध में शामिल कर लेते हैं।
इसी का नतीजा है- डकैती, हत्या, गैंगवारी, सुपारी लेकर हत्या, अपहरण जैसी वारदातें तेजी से बढ़ रहीं हैं।
एमपी से अमरकंटक के रास्ते तो उड़ीसा से रायगढ़ के रास्ते होती है आमद, सीमावर्ती थानों में तालमेल नहीं :
इन बदमाशों का थानों में कोई रिकाॅर्ड नहीं
जिले में कितने लोग बाहर से आकर ठहरे हैं, पुलिस के पास कोई रिकाॅर्ड नहीं है। कुछ दिन पहले एसपी ने सभी थानेदारों को उस क्षेत्र में किराए के मकानों में रहने वाले बाहरी लोगों की जानकारी मांगी थी। इसके लिए प्रोफार्मा भी जारी किया गया था। थानेदारों ने इसमें रुचि नहीं दिखाई।
पुलिस बेबस, सिस्टम ही नहीं बना सकी
अपराधी वारदात कर चले जाते हैं, लेकिन पुलिस अपराधियों के आगे बेबस रहती है। संभाग या जिले में ऐसा कोई सिस्टम ही नहीं है। हालात ऐसे हैं कि पुलिस अधिकारी इन मामलों पर बात भी नहीं करना चाहते।
पुलिस बेबस हो सकती है, आप जागरूक बनें
अगर आपको अपने आस-पास कोई भी ऐसा शख्स या संदिग्ध गतिविधि दिखती है तो स्थानीय थाने को जानकारी जरूर दें।
अपनी सुरक्षा के लिए घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में क्लोज सर्किट कैमरे लगवाएं।
गली-मोहल्ले या सड़कों पर फेरी लगाने वालों की गतिविधियों पर नजर रखें।
किसी अजनबी को अपने यहां संरक्षण न दें, न ही उनकी बातों पर विश्वास करें।
पुरानी गाड़ियां खरीदते समय कागजात, चैचिस व इंजन नंबर भी देखें। आरटीओ से तस्दीक कर लें।
शराब ठेकेदारों के कर्मचारी उत्तरप्रदेश और बिहार के
जिले में तीन बड़े व इतने ही छोटे ठेकेदार हैं। इनके सभी कर्मचारी, यूपी-बिहार के हैं। पुलिस ने कभी इनका वेरीफिकेशन नहीं किया। ठेकेदार इनका उपयोग शराब दुकान चलवाने के लिए करते हैं। आदतन होने के कारण ऐसे लाेग छोटी-छोटी बातों पर लोगों से भिड़ जाते हैं। बड़े अपराध करने से भी नहीं चूकते। ऐसी कई घटनाएं जिले में हो चुकी हैं।
सीधी बात
सीमा की पुलिस से नहीं मिल रही मदद
बीएन मीणा, एसपी, बिलासपुर
आखिर क्या वजह है कि अन्य राज्यों के अपराधियों काे हमारा संभाग सुरक्षित लगता है?
{यहां के लोग सीधे-सादे हैं, जल्दी किसी पर भरोसा कर लेते हैं। अपराधी इसी का फायदा उठाते हैं।
इन्हें रोकने के लिए पुलिस के पास क्या प्लान है?
{सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस नाकेबंदी करती है। हमने जिले से लगे दूसरे राज्य की पुलिस से कई बार बातचीत की कोशिश की, लेकिन सकारात्मक सहयोग नहीं मिला।
बाहरी अपराधियों की आमद राेकने ये हो सकते हैं उपाय
होटलों व वाहनों की नियमित चेकिंग की जाए। डॉक्यूमेंट देखकर ही एंट्री दी जाए।
सीमावर्ती थानों की पुलिस टीमें संयुक्त नाकेबंदी और गश्त करें।
थानों को आॅनलाइन करने से बाहरी अपराधियों का रिकाॅर्ड देखा जा सकेगा।
हथियारों के भी लाइसेंस खंगाले जाएं।
दूसरे राज्यों के क्रिमिनल जो जिले में पकड़े गए
12 सितंबर 2014: पुलिस ने उत्तरप्रदेश के वाहन चोर गिरोह के 11 सदस्यों को पकड़ा। इस गैंग ने संभाग में बाहर से लाकर चोरी की 16 बड़ी गाड़ियां बेची थीं। गिरोह के कुछ साथी स्थानीय भी हैं।
31 अगस्त 2013: मध्यप्रदेश का मोस्ट वॉन्टेड नरेंद्र शुक्ला साथियों के साथ बिलासपुर में पकड़ा गया था। उस पर हत्या, लूट, डकैती समेत करीब 40 गंभीर वारदातों में शामिल होने का आरोप है। उसके कब्जे से पुलिस ने 7.62 एमएम का आॅटोमैटिक कट्टा, तीन कारतूस बरामद किए। नरेंद्र पर एक लाख रुपए का ईनाम घोषित था।
21 अप्रैल 2013: मध्यप्रदेश कोतमा के शातिर बदमाश रामसुशील शुक्ला उर्फ छुट्टा को मगरपारा से पकड़ा गया। उसके पास से कट्टा मिला था। वह आधा दर्जन मामलों में आरोपी था। कोतमा में अपराध करने के बाद यहां आकर छिपा था।
18 जून 2012: तखतपुर में पीएमटी फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपियों में से रवि सिंह झारखंड, संजीत कुमार झारखंड, धीरज कुमार उपाध्याय बिहार और अखिलेश पांडेय बिहार का था। मुख्य आरोपी संतोष सिंह उर्फ संजय सिंह व ओम उर्फ विधायक भी बिहार के ही थे।