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कभी भी हो सकता है ब्लैक आउट

8 वर्ष पहले
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बिलासपुर. मई के दूसरे पखवाड़े या जून के आने तक शहर या जिले में ब्लैकआउट की स्थिति बन जाए तो इसके लिए खुद बिजली विभाग जिम्मेदार होगा। शहर में आधा दर्जन से अधिक सब स्टेशन नहीं बन सके या बनकर भी शुरू नहीं हुए। हालात ये हैं कि जिले को सप्लाई देने वाले तीनों प्रमुख सब स्टेशनों में हर साल 10-15 फीसदी तक बढ़ने वाला अतिरिक्त लोड इस बार खतरे के आंकड़े को पार कर 22 फीसदी तक पहुंच गया है। लोड शिफ्ट करने की स्थिति नहीं हैं। दिन हो या रात, बढ़ते लोड के असर से फाल्ट और पब्लिक की परेशानी आम हो गई है। पिछले डेढ़ महीने में ही 57 ट्रांसफार्मर बस्र्ट हो चुके हैं।
सीमित संसाधनों और हर साल लगातार बढ़ रहे लोड के बाद भी गर्मी में सप्लाई सही रखने के लिए बिजली विभाग कोई प्लानिंग नहीं कर सका है। तीन सालों से किसी भी 33 केवीए लाइन की मरम्मत नहीं हुई। विभाग के अफसर भी मानते हैं कि बड़ी खराबी की वजह से कभी भी सप्लाई का पूरा सिस्टम बैठ सकता है। शेष पेजत्न२२
बढ़ते लोड से गल रहे जंपर
करंट का लोड इतना अधिक है कि बिजली सप्लाई में छोटी-छोटी समस्याओं की बाढ़ सी आ गई है। इसका नतीजा लोड शेडिंग या बिजली गुल के रूप में सामने आ रहा है। करंट अधिक होने से जंपर गलने के सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं।
विभाग के पास कोई प्लानिंग नहीं
बिजली विभाग के बड़े अधिकारियों को गर्मी आने से पहले बकायदा प्लानिंग करनी चाहिए थी, जो हुई ही नहीं। शहर और ग्रामीण क्षेत्र में अधिकारियों ने इसकी जरूरत ही नहीं समझी। प्लानिंग और अदूरदर्शिता का ही नतीजा है कि पिछले तीन सालों में किसी भी 33 केवीए लाइन को दुरुस्त नहीं किया जा सका। शहर में ऐसी करीब 10 केवीए लाइन हैं। बड़े सब स्टेशनों में ट्रांसफार्मर लगाने का काम गर्मी से पहले होना था, ताकि लोड बढ़ने पर परेशानी न हो।
नए स्टेशनों के पुराने दावे
बिजली विभाग का अभी भी वही पुराना दावा है कि दो बड़े सब स्टेशन बन जाने के बाद लोड कम हो जाएगा। 132 केवी क्षमता वाले ये सब स्टेशन कोनी व कोटा में शुरू होने हैं। इसी तरह मोपका, सिलपहरी व तिफरा में एक-एक ट्रांसफार्मर लगना है। यह काम गर्मी के पहले होता तो समस्या से बचा जा सकता था।
एमडी ने कहा, ऐसी स्थिति नहीं
बिजली विभाग के ही अफसर स्वीकार कर रहे हैं कि जिले में तीनों बड़े सब स्टेशनों फुल लोडिंग हो रही है। सप्लाई कहीं भी शिफ्ट करने के हालात नहीं हैं। व्यवस्था दुरुस्त करने में समय लगेगा। इधर, ट्रांसमिशन विभाग के एमडी विजय सिंह का कहना है कि ऐसी कोई स्थिति नहीं है। विकल्प के तौर पर ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे हैं।
जानिए.. कैसे होती है जिले में बिजली सप्लाई
जिले में तीन बड़े सब स्टेशनों से ही सप्लाई होती है। इनमें मोपका, तिफरा व सिलपहरी सब स्टेशन शामिल हैं। कोरबा से बिजली सप्लाई 220/132 केवीए मोपका में होती है। यहां से 132/33 केवीए तिफरा व 132/33 केवीए सिलपहरी सब स्टेशन को सप्लाई की जाती है। तिफरा सब स्टेशन से आधे शहर और ग्रामीण क्षेत्र में सप्लाई की जाती है।
ऐसे आ सकती है बिजली की परेशानी
कभी भी ओवरलोड के कारण एक सब स्टेशन की सप्लाई कट कर दूसरे में जोड़ दी जाती है। ऐसा तब होता है, जब सप्लाई लेने वाले सब स्टेशन का लोड कम हो। इस साल हालात बेकाबू हैं। सप्लाई प्रभावित होने पर दूसरे सब स्टेशन से सप्लाई नहीं दी जा सकती, क्योंकि तीनों बड़े सब स्टेशनों में फुल लोड है और वे डेडलाइन पार करने की स्थिति में हैं। जून में स्थिति और बिगड़ सकती है।
कहीं से अतिरिक्तसप्लाई की गुंजाइश नहीं है। मई में बने ये हालात जून तक और भी बिगड़ने की आशंका है।
> 220/132 केवी मोपका सब स्टेशन में 1400 एंपीयर से अधिक लोड चल रहा है, जो उसकी क्षमता की डेडलाइन है।
> 132/33 केवी तिफरा सब स्टेशन में 40-40 मेगावाट के तीन ट्रांसफार्मर हैं। इनके लोड की क्षमता कुल 2100 एंपीयर है। यह भी इसकी डेडलाइन है।
> 132/33 केवी सिलपहरी सब स्टेशन में 640 एंपीयर की लोडिंग क्षमता है। यहां भी क्षमता से अधिक सप्लाई दी जा रही है।
१. विभाग बिजली चोरी पर अंकुश लगाने का दावा करता है, लेकिन छोटी-मोटी चोरियां ही पकड़ी जाती हैं। कोई बड़ी बिजली चोरी लंबे समय से नहीं पकड़ी गई है।
२. शहर में ही करीब 3५ हजार एसी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें से सिर्फ 5000 एसी व्यावसायिक कनेक्शन से और शेष घरेलू कनेक्शन से ही चल रहे हैं।
शहर के लिए पूर्वी जोन में दयालबंद, बस स्टैंड, लिंगियाडीह और पश्चिम जोन में सर्किट हाऊस, गल्र्स डिग्री कालेज में सब स्टेशन बनना है, लेकिन दो सालों में इनके लिए जमीन नहीं मिल सकी है। सिर्फ मोपका, साइंस कालेज में काम शुरू हुआ है।
समस्या
जिले को बिजली देने वाले तीनों प्रमुख सब स्टेशन मोपका, तिफरा और सिलपहरी में पहली बार 22 फीसदी तक अधिक लोड बढ़ा
असर
शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सप्लाई का बुरा हाल। लोड शेडिंग, कटौती, ट्रांसफार्मर जलने और बिजली गुल होने की रोज 200 शिकायतें। सप्लाई शिफ्ट करने के हालात नहीं
वजह
अतिरिक्त सब स्टेशन बनने थे, जो नहीं बन सके। कोनी व कोटा में बनने के बाद भी शुरू नहीं हुए। शहर की 10 मुख्य लाइनों की तीन सालों से रिपेयरिंग नहीं
उपाय
कोनी और कोटा सब स्टेशन जल्द शुरू हों। शहर की 33 केवीए लाइन की मरम्मत कर खामियां दूर की जाएं। मरम्मत के लिए स्टाफ बढ़ाया जाए
ट्रांसमिशन विभाग का काम
॥सब स्टेशनों की स्थिति जानना हमारा नहीं, ट्रांसमिशन विभाग का काम है। सब स्टेशनों के बारे में वे ही बता सकते हैं। शहर के अंदर अतिरिक्त 33 केवीए लाइन जोड़ी गई है। यह प्रक्रिया में है। इससे लोड कम हो जाएगा।ञ्जञ्ज
डीके भोजक, अधीक्षण यंत्री, सिटी सर्किल
3-4 महीने लग जाएंगे
॥हर साल 10 से 15 प्रतिशत बढ़ने वाला लोड इस साल 22 प्रतिशत तक पहुंच गया है। तीनों सब स्टेशन में एक-एक ट्रांसफार्मर लगने हैं। कोटा व कोनी में सब स्टेशन शुरू होना है। प्रक्रिया में 3-4 माह का समय लग सकता है।ञ्जञ्ज
शरद श्रीवास्तव,अधीक्षण यंत्री, परीक्षण व संचार
चिंताजनक हैं हालात
॥तीनों सब स्टेशनों में लोडिंग फुल होने से स्थिति चिंताजनक है। सब स्टेशनों में ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे हैं। एक पखवाड़ा लग सकता है। इससे लोड कुछ हद तक कम होगा।ञ्जञ्ज
सीएस सिंह, अधीक्षण यंत्री, ओएंडएम