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नहीं सहेज पा रहे धान तो सरकार ले आई ‘धान के बदले दलहन-तिलहन’ योजना

6 वर्ष पहले
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बिलासपुर। राज्य सरकार के पास धान को सहेजने के लिए सिस्टम और गोदाम नहीं हैं। यही वजह है कि अब धान के कटोरे को खाली करने दलहन-तिलहन की खेती को बढ़ावा देने की योजना शुरू कर दी गई है। रबी मौसम में किसानों को धान के बदले मक्का, चना, गेहूं जैसी उन्हारी उपज लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए उन्हें मुफ्त में बीज भी बांटे जा रहे हैं।

किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदा जा रहा है लेकिन सरकार इसको सुरक्षित रखने के इंतजाम नहीं कर पा रही है। ऐसे में हर साल करोड़ों रुपए का धान बारिश में भीग कर खराब हो जाता है। सरकार इसे अमानक कहकर शराब बनाने के लिए नीलाम कर देती है। इधर, समर्थन मूल्य पर बेचने किसानों ने श्री पद्धति से खेती शुरू कर दी, जिससे राज्य में धान की पैदावार में 50 फीसदी की वृद्धि हुई।
शुरू में धान खरीदी और पैदावार बढ़ाने सरकार ने खूब वाहवाही बटोरी, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार हासिल किए लेकिन जल्द ही यह उसके लिए मुसीबत बन गया। सरकार धान खरीदने लगी लेकिन सहेजने में पूरी तरह नाकाम रही।
पिछले साल 850 करोड़ रुपए का घाटा हुआ तो सरकार की कमर टूट गई। इस साल सरकार को धान खरीदी की लिमिट तय प्रति एकड़ महज 10 क्विंटल धान खरीदने का निर्णय लिया। किसानों के अलावा कांग्रेस ने विरोध किया तो सरकार बैकफुट पर आ गई और किसानों से 10 के बजाय 15 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदा गया।
इसके बाद भी पिछले के मुकाबले इस साल 18 लाख मीट्रिक टन धान कम खरीदा गया। इतना धान भी सहेज पाएंगे या नहीं, चिंता बनी हुई है। अब किसानों का धान लेने से मना तो नहीं कर सकते। ऐसे में सरकार किसानों का ध्यान धान की बजाय उन्हारी की खेती पर लगाने की तरकीब अपना रही है। इस रबी सीजन से सरकार “धान के बदले दलहन-तिलहन’ योजना लेकर आई है। किसानों को मुफ्त बीज, खाद, कीटनाशक तक दिए जा रहे हैं। हालांकि किसानों को धान की खेती से शिफ्ट करना इतना आसान नहीं होगा।