बिलासपुर. सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए पीएससी परीक्षा ले रहा है। इसमें आवेदन करने के लिए सैकड़ों उम्मीदवार स्लेट के पात्रता प्रमाण पत्र की राह देख रहे हैं। उनकी राह अब आसान हो जाएगी। एक हफ्ते के भीतर ये उम्मीदवार अपने रोलनंबर के आधार पर पात्रता प्रमाण पत्र नेट से डाउनलोड कर सकते हैं। व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) ने रिजल्ट घोषित करने के बाद पात्रता प्रमाण पत्र जारी नहीं किए थे।
पीएससी ने हाल ही में सहायक प्राध्यापकों के 966 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया है। इन पदों के लिए स्लेट व नेट की अनिवार्यता मांगी गई है। राष्ट्रीय स्तर पर नेट तो साल में दो बार होते हैं, लेकिन राज्य में सात साल बाद स्लेट करवाया गया था। यह एग्जाम व्यापमं ने लिया था। व्यापमं ने स्लेट का रिजल्ट तो घोषित कर दिया, लेकिन पात्रता प्रमाण पत्र जारी नहीं होने से उम्मीदवार सहायक प्राध्यापक के खाली पदों के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि कहीं स्लेट का पात्रता प्रमाण पत्र उनके पास नहीं आया तो वे आवेदन करने से चूक जाएंगे। इधर, व्यापमं और उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के बीच इस संबंध में चर्चा हुई, जिसके बाद सप्ताहभर के भीतर प्रमाण पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया। सहायक प्राध्यापक के पद लंबे समय बाद निकले हैं। इसकी वजह से स्लेट में शामिल 1364 परीक्षार्थियों का भविष्य दांव पर लगा था। व्यापमं ने एक हफ्ते के भीतर पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने की बात से इन परीक्षार्थियों की चिंता एक हद तक दूर हो गई है।
आॅनलाइन जारी किए जाएंगे प्रमाण पत्र
स्लेट परीक्षार्थियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। एक हफ्ते के भीतर पात्रता प्रमाण पत्र आॅनलाइन जारी कर दिए जाएंगे, जिसे वे व्यापमं की साइट से डाउनलोड कर सकते हैं। सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी होते ही इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग से चर्चा चल रही थी। '' प्रदीप चौबे, परीक्षा नियंत्रक, व्यापमं
पीएचडी व एमफिल को भी अनिवार्य योग्यता में शामिल करने की मांग
सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में एमफिल को अनिवार्य योग्यता में शामिल करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। यूजीसी ने अभी नेट व स्लेट को ही इसके लिए अनिवार्य रखा है। एमफिल व पीएचडी को शामिल नहीं करने से सैकड़ाें बेरोजगार आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं। ऐसे उम्मीदवारों की संख्या भी अधिक है, जाे पुराने प्रावधानों के अनुसार सिर्फ पीएचडी कर पद निकलने का इंतजार कर रहे थे। लंबे समय बाद सहायक प्राध्यापक के 966 पद निकाले गए हैं।
राज्य शासन ने यूजीसी के प्रावधानों के अनुसार ही सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए पद निकाले हैं। इन प्रावधानों के अनुसार सिर्फ नेट व स्लेट डिग्रीधारी ही सहायक प्राध्यापक की परीक्षा दे सकेंगे। राज्य बनने के बाद से अब तक सिर्फ दो बार स्लेट हुआ है, जबकि यह परीक्षा भी नेट के समान साल में दो बार होनी है। अब तक सिर्फ दो बार परीक्षा होने से कम परीक्षार्थी स्लेट की डिग्री हासिल कर पाए हैं। डिग्री पाने वाले तो सहायक प्राध्यापक के लिए आवेदन कर लेंगे, लेकिन जो पूर्व में पीएचडी कर चुके हैं और नेट व स्लेट के लिए अपने आपको अपडेट नहीं कर पाए हैं वे निराश हैं। इन उम्मीदवारों ने एमफिल डिग्री को अनिवार्य योग्यता में शामिल करने की मांग की है।
उच्च शिक्षा सचिव को ज्ञापन
इस संबंध में जबड़ापारा निवासी मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि वर्ष 2009 में लागू नए प्रावधानों के मुताबिक पीएचडी की लगातार उपेक्षा की जा रही है। मध्यप्रदेश में एमफिल पीएचडी को योग्यता में शामिल किया गया है। इस मांग को लेकर मनोज कुमार तिवारी, दीपक तिवारी, शिवनारायण जायसवाल, चुड़ामणी पटेल, भरत साहू, विनोद पटेल सहित अन्य उम्मीदवारों ने रायपुर जाकर राज्य लोक सेवा आयोग, उच्च शिक्षा विभाग और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा है।