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भाजपा-कांग्रेस के बीच बराबरी की स्थिति, निर्दलीय के सपोर्ट से इनमें से कोई भी हासिल

6 वर्ष पहले
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बिलासपुर। जिला पंचायत के फाइनल नतीजे आ गए हैं। 25 सीटों वाली जिला पंचायत में भाजपा और कांग्रेस के बीच लगभग बराबर की स्थिति है। दोनों ही पार्टियां जोड़-तोड़ में जुट गई हैं। निर्दलीय सदस्यों के सहयोग के बिना कोई भी पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी नहीं पा सकती। मौजूदा स्थिति में भाजपा के खाते में नौ, कांग्रेस के आठ और इतने ही निर्दलीय जीतकर जिला पंचायत पहुंचे हैं। अध्यक्ष बनाने के लिए 13 सदस्य होने चाहिए।
रविवार को टेबुलेशन के बाद तखतपुर के पांच सदस्यों के अलावा कोटा के तीन क्षेत्रों के विजेता प्रत्याशी घोषित किए गए। अटकलों पर मुहर लगी और जिला पंचायत की निवर्तमान अध्यक्ष अंजना मुलकलवार को करारी हार झेलनी पड़ी। वहीं तखतपुर क्षेत्र से पूर्व उपाध्यक्ष घनश्याम कौशिक अपनी हार नहीं बचा सके। तखतपुर की पांच सीटों में से दो पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी तो दो पर निर्दलीय जीते।
भाजपा को एक सीट से संतोष करना पड़ा। कोटा की तीन सीटों में से दो पर निर्दलीय तो एक पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी ने बाजी मारी। कोटा के क्षेत्र क्रमांक 20 से जिला पंचायत की निवर्तमान अध्यक्ष मुलकलवार को कांग्रेस की सुकवारा यादव ने हराया। न्यू कंपोजिट बिल्डिंग में मस्तूरी व मरवाही की रोकी गई सीटों के नतीजे भी घोषित किए गए। इसमें जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 13 मस्तूरी से भाजपा समर्थित दीपक साहू ने जीत दर्ज की, वहीं कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी को चौथा स्थान मिला। 24 मरवाही में कौशिल्या देवी ओटावी को जीत मिली। उसे कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है।
इस तरह रविवार को घोषित 10 में से चार सीटों पर कांग्रेस तो दो सीटों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी जीते। वहीं चार निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। जिला पंचायत की सभी 25 सीटों पर नजर डालें तो इनमें से भाजपा के नौ, कांग्रेस के आठ प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है, जबकि बाकी सात सीटों पर निर्दलीयों ने जीत दर्ज कर पार्टियों की नींद उड़ा दी है।
बगैर इनके सहयोग के जिला पंचायत की सत्ता चलाना तो दूर हासिल करने के बारे में भी नहीं सोचा जा सकता। हालांकि इनमें से अधिकांश भाजपा या कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। कांग्रेस योगिता श्रीवास, तपेश्वर मरावी, माखन पटेल और पृथ्वीपाल राय का समर्थन मिलने की बात कह रही है, जबकि इनके नाम भाजपा की लिस्ट में भी शामिल हैं। यानी चुनाव का रिपोर्ट कार्ड सामने आते ही दोनों ही पार्टियां निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन हासिल करने के लिए जोर लगा रही है।
जल्द घोषित होगा कांग्रेस का कैंडिडेट, भाजपा अभी मंथन में जुटी
जिला पंचायत के फाइनल नतीजे आने के तुरंत बाद कांग्रेस भवन में समर्थित सदस्यों की मीटिंग हुई। जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष राजेंद्र शुक्ला ने सदस्यों को इस बात के लिए तैयार किया कि पार्टी अध्यक्ष के लिए जो नाम तय करेगी, वे उसे मानेंगे। सदस्यों ने ऐसा करने की हामी भरी। एक नाम पर सहमति बनाने की कोशिश भी की गई।
पूर्व सांसद व पर्यवेक्षक करुणा शुक्ला 10 या 12 फरवरी को अाएंगी और अध्यक्ष के उम्मीदवार की घोषणा करेंगी। इधर 25 में से केवल नौ सदस्य चुनकर आने से भाजपा में बौखलाहट की स्थिति है। निर्दलीय में भी ज्यादातर का बैकग्राउंड भाजपा के बजाय कांग्रेस है। दो तो बसपा से ताल्लुक रखते हैं जिनकी विचारधारा भाजपा के विपरीत है। ऐसे में उनसे समर्थन हासिल करना आसान नहीं होगा। स्थानीय तौर पर तो कोई बैठक नहीं हुई और जिला कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा, लेकिन राजधानी
कांग्रेस से रमेश, भाजपा से दीपक की दावेदारी
जिला पंचायत में अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस से रमेश कौशिक तो भाजपा से मस्तूरी से जीतकर जिला पंचायत पहुंचे दीपक साहू की दावेदारी सामने आ चुकी है। रमेश के जोगी समर्थक होने की वजह से संगठन किसी और नाम को भी आगे बढ़ा सकती है, वहीं भाजपा में दीपक को सांसद लखनलाल साहू के करीबी होने का लाभ मिलने की चर्चा है। पुराने सियासतदारों की हार के बाद भाजपा को अध्यक्ष का उम्मीदवार तलाश करने
पार्टी का निर्णय सर्वमान्य
भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। अध्यक्ष पद का उम्मीदवार अभी तय नहीं किया गया है। उनके नाम पर सहमति बनी तो यह उनके लिए सौभाग्य की बात होगी पर पार्टी का निर्णय सर्वमान्य है।
- दीपक साहू, जिपं में भाजपा से अध्यक्ष पद के दावेदार
पार्टी का आशीर्वाद चाहता हूं
मैं पिछले कई सालों से पार्टी के सक्रिय सदस्य के रूप में काम करता रहा हूं। जनपद में काम करने का मौका मिला, फिर चुनाव में असफलता भी मिली। पार्टी ने फिर से मौका दिया और चुनाव में जीत मिली।
- रमेश कौशिक, जिपं में कांग्रेस से अध्यक्ष पद के दावेदार