तखतपुर. बिलासपुर. 9 से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं के जाति प्रमाण पत्र स्कूलों के माध्यम से बनाएं। इसके लिए उनसे फार्म भरवाकर एक हफ्ते में संबंधित दस्तावेजों के साथ जमा करें।
इस आशय के निर्देश जनपद पंचायत सभाकक्ष में एसडीएम फरिहा आलम सिद्दीकी ने विकासखंड के शासकीय, अर्ध शासकीय हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों की बैठक में दिए।
उन्होंने स्कूलों में जारी निर्माण कार्य बाबत दिशानिर्देश देते हुए कहा स्कूल में निर्माण अधूरा है या निर्माण एजेंसी काम नहीं करा रही है या स्कूल में निर्माण कार्य की जरुरत है, तो सरपंच से प्रस्ताव लेकर इसकी जानकारी दें। अधूरा काम पूरा कराने सरपंच से संपर्क करें। जो सरपंच काम में अनियमितता बरतता है या उदासीनता दिखाता है उसकी जानकारी दें। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे वह निर्माण से संबंधित हो, सफाई से संबंधित हो, मध्याह्न भोजन से संबंधित हो या शिक्षकों की लापरवाही के संबंधित हो।
विधायक राजू सिंह क्षत्री ने स्कूल व शिक्षण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा शिक्षक अपनी जिम्मेदारी समझें, देश का भविष्य उन्हें सौंपा जाता है, जिसे तराशना उनका काम है। उन्होंने कहा मध्याह्न भोजन का संचालन स्व-सहायता समूह करते हैं। रसोईए को नाममात्र का वेतन मिलता है। फिर भी रसोइया बनने व मध्याह्न भोजन संचालन के लिए लोग लाइन लगा देते हैं। उन्होंने कहा समूह, रसोइया या प्रधान पाठक कोई भी मध्याह्न भोजन से कुछ बचाना चाहता है, तो वह किसी न किसी तरह बच्चों के हिस्से पर डाका डाल रहा है जो उचित नहीं है। मध्याह्न भोजन की व्यवस्था में सुधार के लिए हम-आपको जिम्मेदारी लेनी होगी तभी इसकी गुणवत्ता सुधरेगी। उन्होंने प्राचार्यों से कहा आप कभी भी अपनी समस्या लेकर
मुझसे मिल सकते हैं।
इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरिकृष्ण जोशी, उपाध्यक्ष प्रतिनिधि संतोष कश्यप, विकासखंड शिक्षा अधिकारी डाॅ. महालक्ष्मी सिंह, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी हूप सिंह क्षत्री सहित हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्य उपस्थित थे।
पुराने आवेदन नहीं निपटे
2012 में भी नवमी से बारहवीं तक के छात्र-छात्राओं से जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन मांगे गए थे। इसमें ब्लाॅक से 500 आवेदन जमा हुए। आज तक इन्हें जाति प्रमाण पत्र नहीं मिला। जिन्हें जाति प्रमाणपत्र की जरुरत पड़ी उनके पालकों ने तहसील आिफस व कोटा कार्यालय के चक्कर लगाकर जाति प्रमाण पत्र बनवा लिए हैं। इस तरह करीब 100 से अधिक लोगों के ही जाति प्रमाण पत्र बने हैं। अब फिर छात्र-छात्राओं से आवेदन मांग रहे हैं।
भाजपा नेता प्रदीप कौशिक ने बताया उनके पुत्र का जाति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन इसी योजना के तहत तहसील में लटका था। जरुरत पड़ने पर स्वयं तहसील कार्यालय के चक्कर लगाकर करीब एक सप्ताह में बनवाया था। सामान्य व्यक्ति के लिए तो जाति प्रमाण पत्र बनवा पाना मुश्किल हो गया है। यही कारण है कि लोग दलाल से बनवाना पसंद करते है। आजकल एक जाति प्रमाण पत्र के लिए 1500 से 2000 रु तक लिए जाते हैं।