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10 माह बाद भी बच्चे को नहीं मिला जीवन रक्षा पुरस्कार

7 वर्ष पहले
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रायगढ़. देश में रायगढ़ जिले का नाम गौरवांवित करने वाला छात्र रंजन प्रधान जिला प्रशासन की उपेक्षा का शिकार हो रहा है। उसे भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा नामांकित किए जाने के 10 माह बाद भी जीवन रक्षा पुरस्कार नहीं मिला है।छात्र के पिता कृष्णचंद्र प्रधान ने प्रशासन से एक-दो बार नहीं कई दफे पुरस्कार के लिए गुहार लगाई।

इसके बाद भी जिला प्रशासन के अधिकारी इस कदर व्यस्त है कि उन्हें प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार में मिले चेक को देने की फुर्सत नहीं मिल रही है। प्रदेश के अन्य जिलों में साहसी छात्रों को यह पुरस्कार दिया जा चुका है। जिले के सरिया थाना क्षेत्र के ग्राम भथाली निवासी कृष्णचंद प्रधान के पुत्र रंजन प्रधान ने एक 4 वर्षीय बच्चे की जान 35 से 40 फीट कुएं में अपनी जान जोखिम में डालकर बचाई थी।

घटना 8 मई 2011 को दोपहर 3 बजे की है। 4 वर्षीय राहुल प्रधान भथाली में रहने वाले अपने रिश्तेदार के यहां आया था। गांव में स्थित कुएं के पास खेलते हुए अचानक वह उसमें गिर गया और डूबने लगा। 17 वर्षीय रंजन प्रधान ने अपनी जान की परवाह न करते हुए कुएं में छलांग लगा दी। राहुल को बचा लिया। इसी बहादुरी को देखते हुए जिला प्रशासन ने उसका नाम राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए भेजा था। उसे वीरता पुरस्कार के लिए चुन लिया गया।

26 जनवरी 2012 को दिल्ली में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के हाथों उसे सम्मानित किया गया। इस बच्चे को गृह मंत्रालय द्वारा फिर मार्च 2013 में भारत के 50 और छत्तीसगढ़ प्रदेश के 7 अदम्य साहस लड़कों के साथ जीवन रक्षा पदक के लिए नामांकित किया था।

पिछले साल अप्रैल में छत्तीसगढ़ शासन के गृह मंत्रालय का एक पत्र उसे मिला कि उसका नाम जीवन रक्षा पदक के लिए चुन लिया गया है। उसे बड़ा पदक और एक छोटा पदक, प्रमाण-पत्र और 40 हजार नगद राशि दिए जाने का जिक्र था। इसकी पावती भारत सरकार गृह मंत्रालय की ओर से भिजवाई गई, पर जिला प्रशासन दस महीने बाद भी बालक को पुरस्कार नहीं दे पाया है।

जन समस्या निवारण शिविर और जनदर्शन में सौंपा ज्ञापन

रंजन प्रधान के पिता कृष्णचंद ने अगस्त 2013 में ग्राम पंचायत बार में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में कलेक्टर को गृह मंत्रालय से मिले लेटर दिखाया था। इस पर कलेक्टर ने जल्द ही साहसी बालक को उसके पुरस्कार से सम्मानित करने का आश्वासन दिया था, पर प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया गया है। ऐसे में 25 नवंबर 2013 को जनदर्शन में ज्ञापन देकर एक बार जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया। इसके बाद भी जिला प्रशासन को उसे सम्मानित करने का फुर्सत नहीं मिली है।

एसडीएम के पास भेज दिया है पुरस्कार : कलेक्टर
कलेक्टर मुकेश बंसल ने कहा कि जीवन रक्षा पुरस्कार की राशि सारंगढ़ एसडीएम के पास भेज दी गई है। उन्हें तत्काल बच्चे को पुरस्कृत करने के लिए कहा गया है।
दे दिया गया पुरस्कार : एसडीएम

सारंगढ़ एसडीएम निलेष क्षीरसागर महादेवन साहू ने कहा कि बरमकेला जनपद सीईओ द्वारा गुरुवार को बच्चे को पुरस्कार प्रदान कर दिया गया है।
नहीं मिला पुरस्कार : प्रधान