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गुटबाजी को रणनीति बताती रही कांग्रेस, नामांकन से पहले तय होते हैं कैंडिडेट

7 वर्ष पहले
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(भाजपा के प्रत्याशी जिस समय लोगों के बीच प्रचार में जुटे थे तब कांग्रेस के लोग इस बात से सुकून महसूस कर रहे थे कि चलो देर से ही सही मेयर पद समेत पार्षदों के नाम घाेषित हो गए।)
बिलासपुर। कांग्रेस में हर चुनाव में नामांकन से चंद घंटे पहले कैंडिडेट डिक्लीयर करने की परंपरा रही है। ऐसा गुटबाजी के चलते होता है, हालांकि इस बार पार्टी इसे रणनीति का हिस्सा बता रही है। यह सभी को पता है कि पार्टी में आंतरिक गुटबाजी के चलते जूतमपैजार की नौबत तक आ चुकी है और तीन दिनों से जमकर घमासान मचा है। हालात इतने बिगड़ गए कि कई जगहों से इस्तीफे का दौर शुरू हो गया। इधर, नामांकन की अंतिम तारीख से ठीक एक दिन पहले यानी रविवार रात बिलासपुर नगर निगम के मेयर के लिए रामशरण यादव के नाम की घोषणा हुई तो देर रात पार्षद पद के दावेदारों की लिस्ट फाइनल हो सकी।

धान खरीदी नीति व नसबंदी कांड के विरोध में किए गए आंदोलन का लाभ नगरीय निकाय चुनाव में लेने का दावा करने वाली पार्टी आंतरिक कलह से नहीं उबर पा रही है। प्रत्याशी चयन लेकर छिड़ा विवाद शांत नहीं हो रहा है और अभी भी जोगी व बघेल गुट आमने-सामने हैं। नाराजगी दोनों खेमों में है और बगावत के सुर भी। ऐसे में बिलासपुर मेयर के प्रत्याशी का टिकट अंतिम समय तक फंसा रह गया है, बाकी प्रत्याशियों के नामों की घोषणा भी रोक दी गई थी।
गुरुवार रात जब रायपुर स्थित कांग्रेस भवन में जूतमपैजार की नौबत बनी तो प्रत्याशी चयन की गेंद केंद्रीय नेताओं के पाले में डाल दी गई। इधर, जिन दावेदारों का टिकट तय है, उन्हें भी भरोसा नहीं हो पा रहा है। वे कह रहे हैं कि कांग्रेस में कुछ भी हो सकता है। ऐन वक्त प्रत्याशी बदल दिया जाता है। ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि 2009 के लोकसभा चुनाव में आशीष सिंह ठाकुर को बिलासपुर सांसद प्रत्याशी बना दिया गया था, लेकिन ऐन समय पर बी फॉर्म पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पत्नी डाॅ. रेणु जोगी को दे दिया गया। गौरतलब है कि दिसंबर 2009 में भी भाजपा ने 3 दिसंबर को प्रत्याशी घोषित कर दिए थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी ऐन वक्त फाइनल हुए। वोटिंग 23 दिसंबर को हुई थी। यही हाल बीते विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी रहा।
नगरीय निकाय 12
कुल वार्ड 231
जिले में वोटर 4.64 लाख
जनसंख्या 20 लाख
पार्टियां: भाजपा, कांग्रेस, बसपा के अलावा दर्जनभर अन्य
नगर निगम की दलीय स्थिति
2009 के चुनाव
भाजपा- 30
कांग्रेस- 18
निर्दलीय- 07
2004 के चुनाव
भाजपा- 32
कांग्रेस- 15
निर्दलीय- 08
आज नामांकन का अंतिम दिन
पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 15 दिसंबर है। नगर निगम चुनाव के लिए भाजपा के प्रत्याशी फॉर्म जमा कर प्रचार में जुट गए हैं और कांग्रेस में रात तक प्रत्याशियों के नाम ही फाइनल नहीं होते रहे। शनिवार देर रात निकायों के मेयर व अध्यक्ष प्रत्याशियों की सूची जारी की गई। इसके बाद पार्षद प्रत्याशी तय किए जा सके। टिकटों की घोषणा में देरी की गई ताकि विवाद का मौका ही न मिले।
मुखर नेताओं की चुप्पी पर सवाल
अब तक मुखर रहने वाले नेताओं की निगम चुनाव के ठीक पहले चुप्पी से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी प्रवक्ताओं ने भी मुंह बंद कर रखा है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं, इन्हें हिदायत दी गई है कि अभी कुछ भी बताया तो छुट्टी तय है। वहीं संभावित कैंडिडेट को भी जुबान बंद रखने के निर्देश थे।
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