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विकास दिखाने की होड़, जल्दबाजी में जारी किए वर्क ऑर्डर, टिकने पर सवाल

7 वर्ष पहले
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(कर्बला में नाली का निर्माण। पानी भरा है और स्लैब ढाली जा रही है।)
बिलासपुर. विधानसभा और लोकसभा की तर्ज पर एक बार फिर नगरीय निकाय चुनाव से पहले शहर में निर्माण कार्यों की बाढ़ सी आ गई है। कहीं सड़क का डामरीकरण चल रहा है तो कहीं गलियों का काॅन्क्रीटीकरण। नाला-नाली निर्माण, सामुदायिक भवन, डिवाइडर, फुटपाथ आदि के काम युद्ध स्तर पर चल पड़े हैं। हर तरफ विकास ही विकास दिखाने के चक्कर में जल्दबाजी। थोक में वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि हड़बड़ी में हो रहे ये काम कितने टिकाऊ होंगे? एक्सचेंज रोड, व्यापार विहार हाे या लिंक रोड... पिछले चुनाव में बनी इन सड़कों की हालत से इनके घटिया निर्माण की पोल खुलती जा रही है।

विधानसभा के चुनाव के दौरान शहरभर की खस्ताहाल सड़कें जिस तेजी से पक्की की गईं, उनकी पोल बारिश के बाद उसी तेजी खुल गई। दर्जनों सड़कें कई जगहों पर उखड़ गईं हैं और बड़े गड्ढे हो गए हैं। पब्लिक, कारोबारियों की ओर से इनकी शिकायतें भी हो रही हैं। इसके बावजूद उन्हीं ठेकेदारों को दोबारा काम दे दिया गया। बताया जा रहा है कि ठेकेदारों पर चुनाव से पहले काम पूरा करने का दबाव है, ताकि उनका राजनैतिक लाभ उठाया जा सके। अहम सवाल यह है कि आखिर ऐसे निर्माण का क्या फायदा, जो टिकाऊ न हों।
नदी किनारे से गलियों

तक चल रहे काम
सालों इंतजार के बाद बनी रिवर व्यू रोड को चकाचक करने के लिए अब जाकर पहल हुई है। नदी किनारे रिटेनिंग वॉल बनाई जा रही है। इसकी गुणवत्ता देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि दीवार कितनी मजबूत होगी। इसी तरह कई गलियों में कॉन्क्रीटीकरण और नाली निर्माण का काम चल रहा है। नगर निगम ने हफ्तेभर पहले ही थोक में 180 वर्क ऑर्डर जारी किए थे। ये सभी वर्क ऑर्डर अलग-अलग वार्डों में सामुदायिक भवन, सड़क निर्माण व अन्य कार्यों के हैं। अलग-अलग समाज और वार्डों के लिए सामुदायिक भवन बनवाने में ही करीब पांच करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। तेजी से हो रहे काम को देखकर पब्लिक में भी चर्चा आम है कि यह सब सिर्फ चुनावी लाभ के लिए हो रहे हैं।
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