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डाउनलोड करेंबिलासपुर. आरटीओ पर प्रताड़ना के आरोप के बाद मामले की जांच के लिए शहर आए परिवहन उपायुक्त ने बयान लेने के लिए महिला कर्मचारियों को रात में ही बुलवा लिया। कर्मचारी संघ ने इसका विरोध करते हुए मामले की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री व परिवहन आयुक्त से की है।
डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर डी. रविशंकर द्वारा महिला कर्मचारियों को बयान देने के लिए रात में ही बुलवाने पर छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय कर्मचारी संघ ने विरोध जताया है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष पीआर यादव के अनुसार जांच अधिकारी को शाम 6 बजे के भीतर महिलाओं को बयान के लिए बुलाना था। पद का धौंस दिखाते हुए उन्हें रात में बुलवाना सही नहीं था। यह उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि अटपटे समय व पुरुष अधिकारी के सामने महिला कर्मचारी सहज नहीं हो सकीं। यही वजह है कि उन्होंने बयान नहीं दिया। यादव का आरोप है कि डिप्टी कमिश्नर का कहना है कि वे शाम 6 बजे शहर पहुंचे थे, पर वास्तविकता तो यह है कि वे दोपहर में ही शहर पहुंचकर आरटीओ नायक के साथ रुके हुए थे। यादव ने कहा, विभागीय जांच होने के कारण उन्होंने इस पर हस्तक्षेप नहीं किया, लेकिन नगर विधायक व स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल और परिवहन आयुक्त एनके ओसवाल से उन्होंने इसकी शिकायत जरूर की है।
बुधवार को रायपुर में जांच अधिकारी के समक्ष उनका बयान दर्ज होना है। विभागीय जांच के बाद ही वे आगे की रणनीति तय करेंगे। मंगलवार को महिला उत्पीड़न समिति जिला योजना एवं सांख्यिकीय अधिकारी पायल पांडेय के समक्ष महिलाओं का बयान दर्ज किया गया। बुधवार को परिवहन मुख्यालय रायपुर में महिला कर्मचारी बयान देने जाएंगी। आरटीओ का मामला संभलता नजर नहीं आ रहा है। कर्मचारी संगठनों का आंदोलन निरंतर जारी है।
आरटीओ के मामले में दो फाड़ हुए कर्मचारी
इस मामले को लेकर कर्मचारी दो फाड़ हो गए हैं। एक वर्ग व कुछ सामाजिक संगठनों ने छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के बैनर तले आरटीओ के खिलाफ आंदोलन छेड़ रखा है, तो दूसरा वर्ग सर्व आदिवासी समाज व छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ आरटीओ के पक्ष में आ खड़ा हुआ है। सर्व आदिवासी समाज ने तीन दिन पूर्व कलेक्टर को ज्ञापन देकर आरटीओ नायक को सुरक्षा देने व वास्तविकता की जांच के लिए महिला कर्मचारियों का नार्को टेस्ट कराने की मांग की थी।
सोमवार को छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह व परिवहन आयुक्त एनके ओसवाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि आरटीओ की छवि खराब करने वाले परिवहन माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। यदि ऐसा न किया गया तो संघ के साथ पूरा आदिवासी समाज आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएगा। संघ के प्रांतीय महासचिव आनंद प्रकाश टोप्पो ने चर्चा में बताया कि प्रशासन ने एक प्रशासनिक अधिकारी को आरटीओ बनाकर इसीलिए भेजा था कि वर्षो से चली आर ही गड़बड़ियों व अव्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा सके। इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
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