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हफ्ता वसूली करने वाले माओवादियों ने अस्मत लूटी तो टूटा सब्र का बांध

7 वर्ष पहले
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जशपुरनगर. जशपुर जिले के झारखंड से सटे छोटे से गांव ठुठीअंबा और आसपास के 25 गांवों के करीब 500 लोगों ने सोमवार को नक्सलियों के खिलाफ हथियार उठा लिए। कुल्हाड़ी, फरसे, तीर-कमान जैसे हथियारों से लैस ये आदिवासी 50 से ज्यादा नक्सलियों से मुकाबला करने के लिए जंगल में घुस गए हैं। इनमें 11 साल के बच्चे से लेकर 70-72 साल के वृद्ध तक शामिल हैं। इलाके में नक्सलियों के दो प्रमुख गुट हैं। माओवादी बंदूकों के दम पर आए दिन ग्रामीणों से मारपीट और लूटपाट करते थे। हर घर से 50 रुपए महीने वसूली की जाती है। बड़ी मुश्किल से दो वक्त का खाना जुटा पा रहे आदिवासी अब तक इसे सह रहे थे। पर नक्सलियों ने हाल में जब महिलाओं की इज्जत पर हाथ डालना शुरू किया, तो ग्रामीणों का सब्र टूट गया। गौरतलब है कि दक्षिण बस्तर में सलवा जुड़ूम आंदोलन की शुरुआत भी कुछ इसी तरह के हालात में हुई थी।
जशपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर आरा ग्राम पंचायत के गांव ठुठीअंबा से झारखंड की सीमा बमुश्किल सात किमी दूर है। कई सालों से नक्सली यहां सक्रिय हैं। परेशान ग्रामीणों ने गुरुवार को बैठक की। नक्सलियों से निपटने की रणनीति बनाई। इसी बीच नक्सलियों को बैठक की सूचना मिल गई। नक्सली संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) का स्वयंभू एरिया कमांडर बुधराम गांव में पहुंच गया और उसने लोगों की पिटाई शुरू कर दी। साथियों को पिटता देख ग्रामीण बिफर गए और उन्होंने नक्सलियों को खदेड़ दिया। आदिवासियों ने इसके बाद आर-पार की लड़ाई का फैसला कर लिया। कटहलड़ाड, आरोटोली, सकरडेगा, लाटादाईन, पुरनापानी, कादोपानी, सालामाली समेत 25 गांवों के लोग जुट गए।
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