पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

इस शख्स को देख भाग गए थे अंग्रेज वरना आज भी हम होते उनके गुलाम

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

जगदलपुर. 26 जनवरी को नई दिल्ली के राजपथ में गुंडाधुर की झांकी छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेगी। रक्षा मंत्रालय की उच्चस्तरीय समिति ने इसकी अंतिम मंजूरी की सूचना जनसंपर्क विभाग को दे दी है। मिली जानकारी के मुताबिक चार माह तक चली चयन प्रक्रिया के दौरान झांकी की त्रियामी डिजाइन, थीम, मॉडल, संगीत को कसौटी पर कसा गया।

जनसंपर्क विभाग सचिव अमन कुमार सिंह के मुताबिक छग राज्य की झांकी को 2006 में पारंपरिक आभूषणों के लिए 2010 में कोटमसर पर आधारित झांकी को और 2013 में समृद्ध सांस्कृतिक, समृद्धता और धार्मिक सहिष्णुता पर केंद्रित सिरपुर की झांकी को पुरस्कार मिल चुके हैं। गुंडाधुर को बस्तर के भूमकाल का जन नायक माना जाता है।

1910 के विप्लव या भूमकाल के नायक गुंडाधुर को इंद्रावती नदी तट पर कमान सौंपी गई। उसने आदिवासियों को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह के लिए सेना के रुप में संगठित किया। गुंडाधुर के द्वारा मिर्ची आंदोलन की काफी चर्चा है। खिलाफत के गुप्त संदेशों के आदान-प्रदान के लिए आम की टहनी से लाल मिर्च बांध कर भेजा जाता था।

आगे की स्लाइड्स में पढ़िए कौन थे गुंडाधुर...