(फोटो- हांथियों ने रौंदी फसल, कई एकड़ में लगी धान व मक्के की फसल को किया बर्बाद)
बिलासपुर।अंबिकापुर/राजपुर. अविभाजित सरगुजा में जंगली हाथियों का उत्पात फिर से बढ़ गया है। मंगलवार को लमगांव इलाके में एक ग्रामीण को कुचलने के बाद इस दल ने शुक्रवार रात बरियों क्षेत्र के आरा में एक युवक को उस वक्त मार डाला जब वहां के ग्रामीण उन्हें भगाने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान दल के एक हाथी ने युवक को अपनी चपेट में ले लिया। धान व मक्के की खेती को भी इस दल ने काफी नुकसान पहुंचाया है। सप्ताहभर में हाथियों के हमले में यह दूसरी मौत है। आरा व उसके आसपास के गांवों के लोग दहशत मे हैं। हाथी फिलहाल चांची के पास जंगल में हैं। वन विभाग हाथियों को सुरक्षित इलाके में ले जाने के प्रयास में है।
गौरतलब है कि पांच हाथियों का दल एक पखवाड़े पहले मोरगा के जंगलों से प्रेमनगर क्षेत्र में पहंुचा था। यहां से उदयपुर, लखनपुर होते हुए दल दरिमा के जंगल में था। दल में तीन बड़े एवं दो छोटे हाथी हैं। बाद में हाथी दरिमा से बेलकोटा, बरगीहडीह, देवरी होते हुए लमगांव के जंगलों में चले गए। अनुमान लगाया जा रहा था कि हाथी बतौली या सीतापुर की ओर जाएंगे। इस बीच हाथी लुंड्रा की ओर पहुंच गए। शुक्रवार की देर रात हाथी लुंड्रा के जंगल से आरा बस्ती के पास पहुंच गए। ग्रामीणों को हाथियों के आने की जानकारी मिल गई थी। रात करीब बारह बजे ग्रामीणों ने हाथियों को भगाने जगह-जगह टायर जला लिए। पटाखे फोड़कर एवं शोर मचाकर उन्हें खदेड़ने का प्रयास किया जा रहा था। इस भीड़ में आरा गांव का 22 वर्षीय बशीर खान पिता रियाजुद्दीन खान भी शामिल था। लगातार शोर मचाने से नाराज एक हाथी ने अचानक बशीर को अपनी चपेट में ले लिया और उसे पटककर मार डाला। इस घटना के बाद वहां दहशत फैल गई। लोग इधर-उधर भागने लगे। रात मेें इसकी जानकारी वन विभाग एवं पुलिस को दी गई। एसडीओ फारेस्ट जेआर भगत, रेंजर बीएस भगत अपने स्टाफ के साथ आरा पहुंचे। मृतक के शव को पीएम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। विभाग द्वारा पीड़ित परिवार के सदस्यों को तात्कालिक सहायता के रूप में दस हजार रुपए दिए गए हैं।
कई एकड़ में लगी धान व मक्के की फसल को किया बर्बाद
आरा गांव मेें धान व मक्के की खेती कई एकड़ में की गई है। हाथियों ने फसलों को खाया कम, रौंदा ज्यादा है। करीब दर्जनभर किसानों की पच्चीस एकड़ में लगी धान व मक्के की फसल बर्बाद हो गई है। फसल को बचाने के चक्कर में ही ग्रामीण मशाल जलाकर पटाखे फोड़ रहे थे। इसी दौरान हाथी ने उक्त युवक को सूंड से पकड़कर मार डाला था। वन विभाग ने शनिवार सुबह प्रभावित किसानों से मुलाकात कर नुकसान हुई खेती का आंकलन किया। जांच के बाद किसानों को मुआवजा राशि दिए जाने की बात कही गई है।
चांची से लगे गांवाें में दहशत
रात में उत्पात मचाने के बाद हाथी गागर नदी के ऊपर चांची के जंगल की ओर चले गए हैं। इलाके के ग्रामीण अपने परिवार की सुरक्षा के चलते रतजगा करने विवश हैं। चांची जंगल से लगे करजी, मंदरीडांड़, परसागुड़ी, नवकी, डिगनगर, पतरापारा, अमदरी, खुखरी, चिलमा, नरसिंहपुर गांव में दहशत का माहौल है। हाथी का यह दल ज्यादा अटैकिंग होने के कारण लोग रात में जंगल से सटे हुए घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थान में शरण लिए हुए हैं। रेंजर श्री भगत ने बताया कि हाथियों काे आबादी से दूर सुरक्षित इलाके की ओर खदेड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से हाथियों के नजदीक नहीं जाने एवं उससे छेड़छाड़ नहीं करने को कहा है।
एक माह में तीसरी मौत
हाथियों के हमले में महीनेभर के भीतर यह तीसरी मौत है। पहली घटना बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर इलाके में हुई। बंडा हाथी ने इस दौरान एक बालक और उसकी मां पर हमला किया था। मां तो किसी तरह बच गई लेकिन बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई थी। बाकी दोनों मामले में इसी पांच हाथियों का दल शामिल था। दूसरी घटना बतौली ब्लॉक के लमगांव की है। यहां बीते मंगलवार की शाम गांव से भगाने के प्रयास में एक ग्रामीण को हाथी ने कुचलकर मार डाला था। यहां से भगाए जाने पर हाथी लुंड्रा जंगल की ओर चले गए थे। वहां से शुक्रवार की रात इस दल ने आरा गांव में उत्पात मचाया।