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ताकि कोई कर न पाए चोरी, घर का हर कोना अब मोबाइल पर दिखता है online

7 वर्ष पहले
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(अपार्टमेंट के तकरीबन सभी घरों में इस तरह के हाईटेक सिस्टम यूज किए जा रहे हैं। घर का हर कोना मोबाइल पर ऑनलाइन रहता है।)
70 रुपए के मामूली खर्च पर अपार्टमेंट के रहवासियों को मिली हुई है सिक्योरिटी
बिलासपुर। अपनी सुरक्षा, अपने हाथ... यही फॉर्मूला अपनाया है, शहर में कुछ काॅलोनीवासियों ने। चोरी-लूट जैसी वारदातें रोकने, उन्होंने पुलिस पर निर्भर रहने के बजाय खुद के हाईटेक इंतजाम कर लिए हैं। ऐसी ही एक कॉलोनी है सरकंडा की रामकृष्ण इन्क्लेव। नूतन चौक हीरो होंडा शोरूम के पीछे स्थित 92 घरों वाली इस काॅलोनी में 32 इंफ्रारेड नाइट विजन कैमरे लगे हैं, जो दिन-रात आने-जाने वालों की निगरानी करते हैं। वीडियो रिकॉर्डिंग सहेजने के भी इंतजाम किए गए हैं।

रामकृष्ण इन्क्लेव परिसर में गेट, पार्किंग एरिया, सीढ़ियां, पिछले हिस्से और छत को कवर करते हुए कुल 32 जगह सीसी कैमरे लगवाए गए हैं। डिस्ट्रीब्यूटर ने रहवासियों के इस प्रयास को प्रोत्साहित करने पूरे सिस्टम की लागत स्टॉलमेंट में चुकाने की स्कीम दे दी है। रखरखाव पर मासिक केवल 70 रुपए खर्च आता है। रहवासी बताते हैं कि पांच साल पहले तत्कालीन एसपी विवेकानंद सिन्हा ने सुरक्षा का जिम्मा हाईटेक कैमरों से करने की सलाह दी।
शहर की बाकी काॅलोनियों में इस सिस्टम को इंस्टॉल करना था, लेकिन सिन्हा के तबादले के बाद किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। तब छत्तीसगढ़ की यह पहली कॉलोनी थी, जिसकी सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी सर्विलेंस सिस्टम लगवाया गया था। कैमरों की नजर से कंट्रोल रूम में पूरा परिसर दिखता है कॉलोनी में सिस्टम के लिए अलग से कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहां से परिसर में आने-जाने वालों की हर गतिविधियां देखी जा सकती है। वीडियो रिकाॅर्डिंग के लिए दो डीबीआई और 16 चैनल हैं। यह कैमरे और कंट्रोल रूम से जुड़ा है। यहां लगे सभी कैमरे नाइट विजन हैं। घटना की रिकॉर्डिंग पेन में भी ली जा सकती है। घर पर परिंदा भी पर मारे तो मोबाइल स्क्रीन पर दिख जाता है रिंग रोड स्थित बाबजी काॅलोनी के रवि सिंह का घर कैमरे व अलार्म की हाईटेक व्यवस्था से लैस है। इसके बाद कोई परिंदा भी पर मारे तो उनके मोबाइल की स्क्रीन पर दिख जाता है। दरअसल, रवि का घर वाई-फाई और इंटरनेट की सुविधा से लैस है। उन्होंने दो से तीन हजार रुपए का कैमरा दरवाजे के बाहर लगवाया और उसे वाई-फाई से कनेक्ट कर दिया।
इस कैमरे का डिटेक्शन दिन-रात आॅन रहता है। ऐसे में कैमरे की जद में कोई भी आया तो सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है। लाइव तस्वीरें सीधे ई-मेल से मोबाइल पर आने लगती हैं। रवि ने इसे लैपटाॅप से भी जोड़ रखा है। इसी तरह घर के दरवाजे पर ऐसा सिस्टम है कि कोई भी दरवाजा खोले तो भीतर अलार्म बजने लगता है। यह पूरी तरह वायरलेस है और बाजार में महज दो से तीन सौ रुपयों में मिल जाता है।

इलेक्ट्रॉनिक सिक्योरिटी सिस्टम के उपकरण
सीसीटीवी, सेंसर अलार्म, मेटल डिटेक्टर, वीडीŸ" डोर फोन, बायोमैट्रिक्स, रेडियाे फ्रिक्वेंसी आईडेंटीफिकेशन सिस्टम यानी आरएफआईडी, एटीएस, आॅटोमैटिक ट्रैकिंग सिस्टम/ जीपीएस आदि।
सॉल्यूशन प्रोवाइडर को जरूरत और बजट बता दें
सबसे अहम सवाल यह है कि हम आखिर कितनी क्षमता के सीसीटीवी या अन्य कैमरे लगवाएं कि चोर-उचक्कों की गतिविधियां रिकॉर्ड हो जाएं और उसका चेहरा पहचान में आ जाए। विशेषज्ञ के अनुसार जगह और जरूरत के हिसाब से इसे तय किया जाता है। कैमरा खरीदने से पहले सॉल्यूशन प्रोवाइडर को अपने घर बुलवाएं और उसे अपनी जरूरत और बजट बता दें।
... और जिम्मेदारी पूरी, ऐसा न मान लें
आमतौर पर लोगों की सोच है कि कैमरे लगवाने के बाद उनका काम खत्म हो गया। नियमित देखभाल नहीं करने पर ये भी हो सकता है कि जब घटना हुई तब कैमरे बंद हों। लोग इसका इस्तेमाल सॉल्यूशन के तौर पर करें, लेकिन ऐहतियात पूरी रखें। इन्हें खरीदते समय ऐसी कंपनी का चयन करें जो बेचने व लगाने के साथ-साथ नियमित मेंटेनेंस की सुविधा दें। कैमरे सामान्य मोबाइल, टीवी या कंप्यूटर की तर्ज पर न खरीदें।
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