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बिहार, झारखंड और उत्तरप्रदेश से अंबिकापुर के रास्ते न्यायधानी पहुंच रहे अवैध हथियार

7 वर्ष पहले
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बिलासपुर. न्यायधानी में ऐसे कई इलाके हैं, जहां दो से तीन हजार रुपए में अवैध कट्टे मिल रहे हैं। एक लाख रुपए में विदेशी पिस्टल भी उपलब्ध हैं। उत्तरप्रदेश, बिहार से अंबिकापुर के रास्ते यहां तक हथियारों की सप्लाई हो रही है। मंगलवार को पकड़ा गया गिरोह उत्तरप्रदेश के लखनऊ से फर्जी लाइसेंस बनवाता था और बिहार के छपरा से बंदूकों की सप्लाई करता था। अब तो झारखंड और उत्तराखंड से भी हथियार पहुंचने लगे हैं। सड़क और रेल मार्ग से इसके एजेंट सामान्य झोले में कट्टे-पिस्टल लेकर शहर आते हैं और बदमाशों तक पहुंचा देते हैं। इसी का खामियाजा है कि बदमाश अब कट्‌टा अड़ाकर संगीन अपराधों को अंजाम दे रहे हैं।

कुछ दिन पहले तोरवा में कट्टा अड़ाकर लूट की घटना को अंजाम दिया गया। आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। रतनपुर में डकैती की योजना बनाते हुए आठ लोगों को पुलिस ने पकड़ा था। उनके पास पांच कट्टे जब्त किए गए थे। शराब माफियाओं के पंडों के बीच गैंगवारी ने भी अवैध हथियारों की तस्करी को बढ़ावा दिया। आरोपियों से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि बिहार, झारखंड और उत्तरप्रदेश से हथियार यहां पहुंचाए जा रहे हैं। इसके बाद भी किसी मामले में पुलिस ने तह तक जाकर सप्लायर को पकड़ने की कोशिश नहीं की। आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई कर अपना कर्तव्य पूरा समझ लिया। गौरतलब है कि जिले में पिछले साल आर्म्स एक्ट के 72 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें 53 शहर के हैं। पिछले सालों की तुलना में यह आंकड़ा 30 से 35 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है।
बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर निगरानी की पुख्ता व्यवस्था नहीं
बिलासपुर रेलवे स्टेशन हो या फिर बस स्टैंड, शहर में क्या सामान लाया जा रहा है और क्या जा रहा है, इसकी निगरानी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। रेलवे स्टेशन पर लाखों की लागत से मेटल डिटेक्टर और बैगेज स्केनर लगाए गए हैं, लेकिन किसी का लगेज चेक नहीं किया जाता। स्टेशन पर आने-जाने के लिए 10 रास्ते हैं। अपराधी अपने साथ हथियार और मादक पदार्थों को लाते-ले जाते हैं।
ज्यादातर लोग जान काे खतरा बताकर मांगते हैं लाइसेंस
ज्यादातर लोग अपनी और अपनों की जान को खतरा बताकर लाइसेंस का आवेदन लगाते हैं। पुलिस लाइसेंस ले चुके लोगों से कभी पूछताछ नहीं करती कि इनका इस्तेमाल कहां और कैसे किया जा रहा है। शौकिया तौर पर दो से ढाई लाख रुपए तक की इटेलियन बेल्जियम पिस्टल और माउजर रखने वाले भी शहर में हैं।
सालाना 100 आवेदन आते हैं लाइसेंसी हथियार के लिए
1961 में जिले में हथियार के लाइसेंस बनाने की प्रकिया शुरू की गई।
2000 से पहले जिले में लाइसेंसी हथियार के लिए सालाना औसतन 5 अर्जियां आती थीं।
2001 के बाद लाइसेंस के आवेदनों संख्या बढ़कर 100 से अधिक हुई।
1400 लोगों के पास लाइसेंसी हथियार हैं, पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार।
पेंड्रा के टिक नहीं पाए, बाहर से शुरू हुई सप्लाई
किसी जमाने में जिले के पेंड्रा में कट्टे बनाए जाते थे, लेकिन घटिया क्वाॅलिटी के चलते टिक नहीं पाए। ऐसे में बिहार, झारखंड और उत्तरप्रदेश के बांदा, लखीसराय, गिरीडीह, मुजफ्फर नगर आदि में बनने वाले कट्टे व कारतूस यहां आने लगे। अब तो मप्र के शहडोल में भी कट्टे बनाए जाने की खबर है। शहडोल छत्तीसगढ़ की सीमा से लगा है और बिलासपुर के नजदीक है। क्वाॅलिटी के हिसाब से कट्टे की कीमत तय होती है। 2000 रुपए में सिंगल फायर कट्‌टा मिलता है।
बाहरी लोगों ने यहां आकर रंगदारी शुरू की
बीते कुछ सालों में शहर और आस-पास के क्षेत्रों में दर्जनों छोटे-बड़े उद्योग लगे हैं। एनटीपीसी पाॅवर प्लांट जैसी बड़ी यूनिटों के चलते बाहरी लोग भी यहां आए हैं। इलाके में धाक जमाने के लिए रंगदारी का चलन बढ़ा। अपराधियों के गुट बन गए और वे हथियारों की खरीद-फरोख्त कर ताकत बढ़ाने लगे। एक जमाने में रेलवे क्षेत्र, लालखदान और महमंद इलाके ही अवैध हथियार रखने वालों के गढ़ होते थे। अब इनके साथ नए इलाके भी जुड़ गए हैं।
एसपी डांगी के कार्यकाल में हुई थी बड़ी कार्रवाई
19 मार्च 2013 को पुलिस ने सरकंडा चांटीडीह निवासी संजय यादव उर्फ संजू 32 वर्ष से 6 पिस्टल, 2 रिवाॅल्वर, 1 एयरगन, 1 कट्टा सहित 24 कारतूस बरामद किए। तत्कालीन एसपी रतनलाल डांगी के कार्यकाल में प्रशिक्षु आईपीएस अभिषेक मीणा के नेतृत्व में साइबर सेल की टीम ने कार्रवाई की थी। संजय यादव मूलत: कोनी थाना क्षेत्र के ग्राम बिरकोना का रहने वाला है। 2007 में भी वह कोनी क्षेत्र में 11 पिस्टल, 4 मैग्जीन और 34 कारतूस के साथ पकड़ा गया था। पूछताछ में उसने बताया था कि वह बिहार में मुंगेर निवासी एक साथी से हथियार मंगवाकर यहां बेचता है।
पुलिस कार्रवाई में लगातार मिल रहे हैं अवैध हथियार, अपराधियों ने बताया चैनल, दूसरे राज्यों से किस तरह यहां पहुंचाते हैं हथियार
सड़क और रेल मार्ग से एजेंट सामान्य झोले में कट्टे-पिस्टल लेकर शहर आते हैं और
बदमाशों तक पहुंचा देते हैं
बिलासपुर पुलिस दूसरे राज्यों में छानबीन या कार्रवाई करने के लिए जाने के बजाय आर्म्स एक्ट दर्ज कर अपना कर्तव्य पूरा समझ लेती है