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पत्थरों की खातिर बंजर बना रहे हैं जमीन, कर रहे हैं अवैध उत्खनन

9 वर्ष पहले
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बिल्हा। बिल्हा-पथरिया विकासखंड सहित आसपास का पथरीला इलाका संगदिल थैली-शाहों के लिए सोने की खान साबित हो रहा है। राजनैतिक संरक्षण में बेखौफ खनन ठेकेदार अवैध उत्खनन मनमाने ढंग से खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं। पत्थर खदानों में लगातार अवैध उत्खनन के लिए किए जा रहे विस्फोट से ग्रामीणों की छाती छलनी हो रही है।
सवाल यह है कि अवैध खदान मालिकों को विस्फोट हेतु विस्फोटक सामग्री कहां से और कैसे मिल रही है। यह इस बात का संकेत है कि खदानों में विस्फोट हेतु प्रयुक्त किए जाने वाले डेटोनेटर व केप जैसी संवेदनशील सामग्री की अवैध बिक्री व परिवहन क्षेत्र में धड़ल्ले से जारी है।
इन अवैध धंधों का जाल बिल्हा-पथरिया विकासखंड में फैला हुआ है। बिलासपुर -रायपुर का राजधानी से न्यायधानी को जोड़ने वाले अति विशिष्ट मार्ग पर आवागमन कितना जोखिम भरा है, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। पत्थरों के सौदागरों का यह कारोबार इलाके के अमन में खलल डालने वाला साबित हो जाए तो किसी को आश्चर्य की बात नहीं होगी।
ताज्जुब तो यह भी है कि इस इलाके के पत्थर खदानों में वैध-अवैध विस्फोटक पहुंच जाता है। बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड के अंतर्गत धौंराभाठा, संबलपुरी, पौंसरी, भैंसबोड़, पत्थरखान सहित बुटेना गांवों से लगी जमीन पर खुलेआम विस्फोट होते हैं।
बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे रोड पर क्रशर की डस्ट राहगीरों के लिए परेशानियों का सबब बन गई है। मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड में 50 से अधिक खदानें अवैध रूप से संचालित हो रही हैं। नगर पंचायत सरगांव के समीप मोहभट्ठा गांव अवैध खदानों में विस्फोटों का अड्डा बन चुका है।
माइनिंग विभाग खानापूर्ति के नाम पर कार्यवाही कर रहा है। मोहभट्ठा गांव की खदानों में विस्फोट से पहले भी 3 मजदूरों की मौत हो चुकी है पर माइनिंग विभाग नही जागा। इधर भखरीडीह गांव की खदानों में चल रही ब्लास्टिंग से क्षेत्र की फसलें चौपट हो रही हैं।
बरसात का पानी रुकता ही नहीं, आसपास की खदानें खेतों का पानी सोख लेती हैं। खनिज माफिया शासकीय भूमि पर कब्जा करता जा रहा है। क्षेत्र की पत्थर खदानों का यदि ईमानदारी से भौतिक सत्यापन कराया जाए तो करोड़ों की खनिज रायल्टी चोरी व बड़ी मात्रा में विस्फोट सामग्री की अवैध खरीदी बिक्री का चौंकाने वाला मामला सामने आ सकता है।
सरकारी जमीन की मनमानी खुदाई, नहीं होती कार्रवाई
विकासखंड अंतर्गत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहे ताला गांव से कुछ ही दूर पर शासकीय भूमि के 30 एकड़ जमीन पर बरसों से अवैध खुदाई चल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि ट्रस्ट का पदाधिकारी ही इसे चला रहा है। बरसों से शासकीय भूमि पर अवैध ब्लास्टिंग और खुदाई की जानकारी माइनिंग से लेकर क्षेत्र के पटवारी, तहसीलदार को भनक नहीं है। बिलासपुर, मुंगेली, पथरिया, विकासखंड का ऐसा कोई इलाका न होगा जहां अवैध खदानें न हों।
ग्राम पंचायत की सीमा में खदान चलाने के लिए पंचायत की अनुमति जरूरी है। पर इसमें नियम कायदे का कहीं पालन नहीं हो रहा है। बिल्हा विकासखंड के ही ग्राम पंचायत पौसरी में दर्जनों खदानें बगैर पंचायत प्रस्ताव के बरसों से संचालित हो रही हैं। कभी भी विभाग ने इन क्षेत्रों में कार्रवाही नहीं की। अवैध खदानों से सबसे ज्यादा प्रभावित पौसरी गांव के किसान हो रहे हैं।
गांव की कृषि भूमि पर खदानों के विस्तार से किसानों के सामने सिंचाई की समस्या आ खड़ी हुई है। बारिश के दिनों में खेतों में पानी नहीं रुक पाने के कारण उत्पादन कम होता गया और किसान कंगाल होते गए और खनिज माफिया मालामाल। ततीश में आश्चर्य जनक बात यह सामने आई कि बिल्हा लाक का भैसबोड़ अमेरी, अकबरी धौराभाठा, ताला, पौसरी गांवों में चल रहे अवैध उत्खनन करने वालों के पास ग्राम पंचायत का प्रस्ताव है।
माइनिंग विभाग को जानकारी: वर्तमान एसडीएम अजरुन सिंह सिसोदिया कुछ साल पहले बिल्हा में तहसीलदार रह चुके हैं। लेकिन उनका कहना है कि उन्हें आसपास के क्षेत्रों में चल रहे अवैध खदानों की जानकारी नहीं है। इससे विभाग के कामकाज का स्तर समझा जा सकता है।
गांवों में सक्रिय है भू-माफिया
बिल्हा और आसपास का इलाका अवैध उत्खन्न और भू-माफिया का गढ़ बन चुका है। यहां आसपास के गांवों में बदस्तूर अवैध उत्खनन व सरकारी जमीन पर कब्जे का दौर जारी है। इससे एक ओर जहां खनिज संपदा का लगातार दोहन हो रहा है, वहीं इन क्षेत्रों में जमीन के अवैध कब्जे की रोकथाम करने प्रशासनिक अमला भी सक्रिय नजर नहीं आता। सालों से इन क्षेत्रों में सक्रिय अवैध भू-माफिया मनमाफिक अवैध उत्खन्न करते आसानी से देखे जा सकते हैं।
इन्हें प्रशासनिक अधिकारियों ने खुली छूट दे रखी है। इस काम में उनका भी हिस्सा तय होता है। यही वजह है कि ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद इन पर कार्रवाई नहीं हो पाती।