बिलासपुर. सहेली शाला बंद होने के बाद भी खाते से एक करोड़ रुपए निकालने के मामले में जिला पंचायत सीईओ ने 32 शैक्षिक समन्वयकों और 29 सहेली शाला प्रभारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई भाई-भतीजावाद से ग्रसित नजर आ रही है। वजह यह कि जांच रिपोर्ट में दोषी ठहराए गए जिला स्तरीय अफसरों को बचाने की कोशिश की गई है। तत्कालीन एपीसी (वित्त) अखिलेश तिवारी पर कार्रवाई के लिए प्रकरण शासन को भेजा गया है, जबकि वह शिक्षाकर्मी है। तिवारी पर कार्रवाई जिला स्तर पर होनी है। इसी तरह शाखा प्रभारी व लेखापाल के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिला पंचायत सीईओ नीरज बंसोड ने एक साथ 61 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करके प्रशासनिक व्यवस्था में भूचाल ला दिया है। 32 शैक्षिक समन्वयक एवं 29 सहेली शाला प्रभारी को एक साथ सस्पेंड किया गया है।
दैनिक भास्कर ने यह मामला उजागर किया था। सीईओ की कार्रवाई में भी कई तरह की खामियां नजर आईं। निलंबन की गाज सिर्फ मैदानी अमले पर ही गिरी है, जबकि जिला मुख्यालय में पदस्थ अफसरों को बचा लिया गया है। गड़बड़ी की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने तत्कालीन डीपीसी एसपी पांडेय, एपीसी वित्त अखिलेश तिवारी, शाखा प्रभारी, लेखापाल के अलावा मैदानी अमले के बीआरसी कोटा, पेंड्रा और तखतपुर की भूमिका संदिग्ध बताई गई। इसी तरह 36 सहेली शाला प्रभारियों को दोषी बताया गया। जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष में भी इन दोषियों पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई। इधर जिला पंचायत सीईओ ने इस मामले में कार्रवाई तो की है, लेकिन आधी-अधूरी। इसे लेकर कर्मचारियों में आक्रोश देखा जा रहा है।
स्लाइड्स पर क्लिक कर पढ़िए पूरी खबर...