बिलासपुर। गांव में रहने वाले शख्स ने ऑनलाइन शॉपिंग कर इंडक्शन कुकर मंगवाया। पार्सल में उन्हें इसके टुकड़े भेज दिए गए। उन्होंने दस्तावेजों के आधार पर फोरम का दरवाजा खटखटाया। फोरम ने कंपनी को पूरी कीमत के साथ जुर्माना देने का आदेश दिया। इसी तरह एक युवती ने गायें खरीदीं। बेचने वाले ने लिखकर दिया था कि गाय सीधी-सादी हैं। दूध भी खूब देती हैं।
घर लाते ही गायें मारने दौड़ीं। युवती
फोरम पहुंची। यहां बेचने वाले को पूरी कीमत लौटाने का आदेश दिया। इस तरह के ढेरों मामले उपभोक्ता फोरम रोजाना पहुंचते हैं।
शर्त एक ही है कि पूरे दस्तावेज पेश किए जाएं, जिससे सेवा और उत्पाद में कमी साबित हो। दरअसल, सिर्फ 29 धाराओं वाले अधिनियम में उपभोक्ताओं की राहत के लिए कई प्रावधान हैं। बस, जरूरत है अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की। फोरम में वाद दायर करने किसी वकील की जरूरत नहीं है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 में 31 धाराएं थीं। 2002 में हुए संशोधन के बाद सिर्फ 29 धाराएं बची हैं। इस कानून ने रोजमर्रा व लक्चरी के सामान खरीदने, डॉक्टर, इंजीनियर, दूरसंचार, बैंकिंग, बिजली, निर्माण समेत हर तरह की सेवाओं के मामले में कमी होने पर लोगों को राहत का रास्ता आसान कर दिया है। अधिनियम लागू होने से पहले तक ऐसे मामलों को सिविल कोर्ट में लगाने की मजबूरी होती थी। वकील करने पड़ते थे। तारीखें मिलती थीं। झंझट से बचने ज्यादातर लोग अधिकारों के लिए लड़ने की बजाय समझौते कर लिया करते थे। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लागू होने के बाद हालात बदले हैं। अब अपने अधिकारों को लेकर सजग रहने वाले लोग सेवा और उत्पाद में किसी तरह की कमी होने और संबंधित कंपनी या व्यक्ति से राहत नहीं मिलने पर उपभोक्ता फोरम में अर्जी लगाते हैं।
0 केस- 1
जया जीतीं, क्योंकि कागजात सहेज रखे थे
राजकिशोर नगर लिंगियाडीह की जया अग्रवाल को गायें पालने का शौक हुआ। उन्होंने बिजौर गांव में रहने वाले अर्जुन लाल कौशिक से चार गायों का सौदा किया। बेचने वाले ने लिखकर दिया गायें सीधी-सादी हैं। मारती नहीं, दूध भी देती हैं। घर लाते ही गायें मारने दौड़ने लगीं। कुछ दिन रखकर देखा, लेकिन रवैये में बदलाव नहीं हुआ। बेचने वाले ने शिकायत पर ध्यान नहीं दिया तो उपभोक्ता फोरम पहुंच गईं। फोरम ने अर्जुन लाल को पूरी कीमत के साथ जुर्माना देने का आदेश दिया है। जया की जीत के पीछे उनकी जागरूकता थी। उन्होंने खरीदी का इकरारनामा संभालकर रखा था।
0 केस-2
दीवारों की पुताई उधड़ी तो फोरम से न्याय मिला
तिफरा में रहने वाले एसके लोध ने जरहाभाठा के विकास पेंट मार्ट से नए मकान का वेदरकोट करवाया। एजेंसी ने पांच साल तक मकान में सीलन या दरारें नहीं आने की गारंटी दी, लेकिन कुछ महीनों बाद दिखने लगीं। बारिश में दीवारों से रिसाव होने लगा। शिकायत पर एजेंसी ने कोई कार्रवाई नहीं की तो लोध फोरम जा पहुंचे। फोरम ने पूरी कीमत के साथ जुर्माना देने का आदेश एजेंसी के संचालक को दिया है।
वकील की जरूरत नहीं, अाप भी लगा सकते हैं अर्जी
वर्ष 1986 से पहले उपभोक्ताओं के सामने शिकायतों के लिए सिविल कोर्ट एकमात्र उपाय थीं। कोर्ट जाने वकील की जरूरत पड़ती थी। यहां मामलों की लंबी फेहरिश्त के बीच सुनवाई का नंबर सालों बाद आता था। इस परेशानी को देखते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम बनाया गया। इसमें जिला, राज्य और केंद्र के स्तर पर फोरम का प्रावधान है। जिला स्तर पर 20 लाख रुपए तक के मामले प्रस्तुत किए जा सकते हैं। वहीं राज्य स्तर पर 20 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए और केंद्रीय स्तर के आयोग में 1 करोड़ रुपए से ज्यादा के मामले पेश किए जा सकते हैं। फोरम में किसी तरह फीस का नियम नहीं है। न ही आपको वकील करने की जरूरत है। सादे कागज पर अपनी समस्या बताई जा सकती है। हां, दस्तावेज पुख्ता होने चाहिए। जैसे किसी भी सामान की खरीदी करने कैश मेमो यानी पक्का बिल ही लें। किराया आदि के मामलों में इकरारनामा साथ रखें, क्योंकि फोरम के फैसले सबूतों के आधार पर होते हैं।
इन मामलों में शिकायतें दर्ज करवा
खरीदे गए सामान में किसी तरह की खराबी आने पर
{तय या प्रिंट रेट से ज्यादा कीमत वसूलने पर
{किराए में लिए सामान या उपयोग की गई सेवा में कमी होने पर
{कानून का उल्लंघन कर जीवन या सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा करने वाला सामान बेचने पर
{इस तर3ह के दूसरे मामलों को लेकर उपभोक्ता फोरम में अर्जी दी जा सकती है
भास्कर ने आपके लिए बनाई एक्सपर्ट ास्कर यहां एक्सपर्ट्स और सीनियर वकीलों के नाम और नंबर दे रहा। इस पैनल से आप उपभोक्ता फोरम से जुड़े मामलों में गाइडेंस ले सकते हैं।
1. टीके केशरवानी, पूर्व अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन- 98261-41910
2. शैलेंद्र गोरख, अधिवक्ता, 93000-68466
3. राम अयोध्या देवांगन, अधिवक्ता, 98279-10716