पेंड्रा. बिलासपुर. शिक्षकविहीन गर्ल्स हाईस्कूल की छात्राओं का आंदोलन, समाजसेवियों द्वारा शिक्षकों की मांग को लेकर बैनर लगाकर प्रदर्शन करने, स्कूल के गेट में ताला लगाने की घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया। इस मामले में बीईओ से प्रतिवेदन मांगा गया है।
बिलासपुर से इस मामले की जांच में आए सहायक संचालक बंधक बनाए जाने के डर से हाईस्कूल नहीं पहुंचे। हाईस्कूल के प्राचार्य ने संभावित परेशानी से बचने के लिए समय से पहले छुट्टी कर दी। समाजसेवी प्रदर्शनकारी इस जिद पर अड़े थे कि जो भी अधिकारी आएगा उसे बंधक बनाएंगे।
सरकारीपारा के लाल अमोल सिंह गर्ल्स हाईस्कूल में शिक्षकों की पदस्थापना न होने से छात्राओं की पढ़ाई चौपट हो रही पढ़ाई को लेकर 19 सितंबर को पं. रामनिवास तिवारी के नेतृत्व में समाजसेवियों ने आंदोलन व प्रदर्शन के माध्यम से जिस तरह से शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया, उससे शिक्षा व ट्राइबल विभाग के अधिकारी सहित प्रशासन सवालों के घेरे में है। इस स्कूल में नवमी में 59, दसवीं में 76 छात्राओं सहित कुल 135 छात्राओं को पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं है।
इस समस्या के निराकरण के लिए शिक्षा विभाग के सहायक संचालक एनके चंद्रा आए थे पर वे प्रदर्शनकारियों से आमना-सामना न हो, यह सोचकर स्कूल नहीं गए। प्रशासन को यह जानकारी पहले ही मिल चुकी थी कि स्कूल की अव्यवस्था से नाराज पुरानी बस्ती के नागरिक व समाजसेवी स्कूल आने वाले अधिकारी को बंधक बना सकते हैं। ऐसे में सहायक संचालक कार्यालयीन लोगों से मिलकर रिपोर्ट बनाकर लौट गए।
पीजीडीसीए में 50 फीसदी अंक की बाध्यता समाप्त करने का छात्रों ने स्वागत किया
पेंड्रा. पीजीडीसीए पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 50 फीसदी अंक की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। यह नियम अगले सत्र से लागू होगा। बिलासपुर विश्वविद्यालय के अंतर्गत कई कॉलेज दूरस्थ आदिवासी इलाकों में स्थित हैं। इनमें पीजीडीसीए पाठयक्रम में प्रवेश के लिए 50 प्रतिशत अंकों की बाध्यता थी। इसलिए निर्धन-आदिवासी व अन्य छात्र पीजीडीसीए कोर्स में प्रवेश से वंचित हो जाते थे। इस नियम को शिथिल करने मांग लेकर 2009 से गायत्री परिवार, पूर्व विधायक पहलवान सिंह मरावी व रामजी श्रीवास पूर्व अध्यक्ष नगर पंचायत द्वारा राज्यपाल कुलाधिपति से पत्राचार किया जा रहा था। बिलासपुर विवि ने इस पर विचार करते हुए इस कोर्स में प्रवेश के लिए 50 प्रतिशत की बाध्यता समाप्त करने का निर्णय लिया।
शासन को भेजेंगे
एसडीएम पेण्ड्रारोड ने सरकारीपारा कन्या हाईस्कूल के संबंध में प्रतिवेदन मांगा है जिसे कलेक्टर के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा। - आरएस परस्ते, बीईओ पेण्ड्रा
रिपोर्ट बनाकर ले गए हैं
सहायक संचालक शिक्षा आए थे, रिपोर्ट बनाकर ले गए हैं। बीईओ से प्रतिवेदन मांगा गया है। स्कूल के सेटअप की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव कलेक्टर के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा। -सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, एसडीएम
छात्राएं अपना आंदोलन परीक्षा के बाद और तेज करेंगी
तिमाही परीक्षाओं के कारण बीते सप्ताह छात्राओं ने आंदोलन स्थगित कर रखा था लेकिन तिमाही परीक्षा समाप्त होते इसी सप्ताह से छात्राएं अपने आंदोलन को और तेज करेंगी। शिक्षकों एवं भवन की मांग को लेकर छात्राएं शासन एवं प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए पहले तो गेट के बाहर ही बैठकर गांधीवादी तरीके से अपना विरोध फिर से दर्ज कराएंगी। यदि गांधीवादी तरीके से शासन-प्रशासन पर तत्काल प्रभाव नही पड़ा तो छात्राएं अपने अभिभावकों के साथ मिलकर उस केम्पस के स्कूलो में ताला बंदी करके एवं रैली निकालकर शिक्षा के अधिकार कानून के तहत शिक्षक एवं भवन की मांग को पूरा कराने के लिए शासन-प्रशासन पर दबाव बनाएंगी।
सामाजिक कार्यकर्ता रामनिवास तिवारी, राजा उपेंद्र बहादुर सिंह, रिंकू शर्मा, राजकुमार रजक, प्रशांत गुप्ता, सुभाष गुप्ता सहित उक्त स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं के अभिभावक भी लाल अमोल सिंह कन्या हाईस्कूल के प्रति पिछले 13 वर्षो से शासन-प्रशासन के उपेक्षापूर्ण रवैये से नाराज है इसलिए इन्होने भी छात्राओं के आंदोलन को भरपूर समर्थन देने का निर्णय कर लिया है। स्कूल में चौपट हो रही पढ़ाई को लेकर जिस तरह से समाजसेवियों और छात्राओं ने शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया है उससे शिक्षा विभाग व ट्राइबल विभाग के अधिकारी सहित प्रशासन भी सवालों के घेरे में हैं। दूसरी ओर छात्राओं का कहना है कि एक बार आंदोलन करने के बाद भी प्रशासन नहीं जागा है इसलिए वे लोग तिमाही परीक्षा खत्म होने के बाद फिर से आंदोलन करेंगे।