बिलासपुर. न सरकारी आदेश न कलेक्टर का अनुमोदन। झारखंड के व्यापारी ने आवेदन किया और संयुक्त कलेक्टर एसआर कुर्रे ने बिना वरिष्ठ अफसरों की जानकारी के सभी जनपद पंचायतों को सरकारी योजनाओं के नाम पर घरों-घर नंबर प्लेट लगाकर पैसे वसूलने के आदेश जारी कर दिए। इसी पत्र को आधार मानकर जनपद पंचायत सीईओ हरिकृष्ण जोशी ने सरपंचों को वसूली का आदेश दिया।
डीबी स्टार टीम ने मामले की पड़ताल कर पोल खोली तो अधिकारी हरकत में आ गए। उन्होंने आनन-फानन में इसे बंद करने को कहा। गंभीर बात है कि जिस अधिकारी ने अपनी नोटशीट से इसे जारी किया है उसके खिलाफ जांच के लिए जिम्मेदारों के हाथ कांप रहे हैं। कलेक्टर इस मामले को टालने के मूड में हैं तो एडिशनल कलेक्टर ने जांच करवाने की बात कहकर किनारा कर लिया है।
गौरतलब है कि जनपद पंचायत तखतपुर के सीईओ हरिकृष्ण जोशी ने ब्लॉक की सभी पंचायतों में हर घर से 20-20 रुपए वसूल करने का आदेश जारी किया है। इसकी जानकारी न तो जिला पंचायत सीईओ नीरज बंसोड़ को थी और न अपर कलेक्टर नीलकंठ टेकाम को। संयुक्त कलेक्टर ओपी वर्मा ने इस संबंध में जानकारी से इनकार किया। उन्होंने इसमें जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया, पर एक सप्ताह बाद भी मामले की जांच शुरू नहीं हुई। टीम ने पड़ताल की तो पाया कि जिला प्रशासन के जनगणना अधिकारी और संयुक्त कलेक्टर कुर्रे ने जनपदों को यह आदेश दिया है।
झारखंड मेें कोडरमा जिले के चंदवारा निवासी संतोष प्रसाद गुप्ता के आवेदन पर पंचायतों को यह फरमान जारी किया गया। 22 अगस्त को उसने सं. कलेक्टर को लिखे पत्र में बताया कि वह राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी योजना का प्रसार कर रहा है। उसनें रायपुर, बालोद, सरगुजा, सूरजपुर और खंडवा के दस्तावेज लगाकर दावा किया कि वहां भी उसने यह काम किया है। इधर, गड़बड़ी की जानकारी होने के बाद भी कलेक्टर सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी इसकी जांच में रुचि नहीं ले रहे हैं।
जनपद सीईओ की सफाई... मैंने तो सिर्फ आदेश का पालन किया
तखतपुर के जनपद पंचायत सीईओ अब तक पुराना राग अलाप रहे हैं। वे बार-बार वरिष्ठ अधिकारियों का हवाला देकर कह रहे हैं कि उन्होंने संयुक्त कलेक्टर के आदेश का पालन किया है, लेकिन सवाल यह है कि आदेश जारी होने के बाद उन्होंने हकीकत जानना मुनासिब नहीं समझा। जो पत्र उन्हें भेजा गया है उसकी प्रतिलिपि न तो कलेक्टर को और न जिला पंचायत सीईओ को दी गई है। लेटर में सरकार के आदेश-निर्देश का या कलेक्टर के अनुमोदन का जिक्र नहीं है। यही वजह है कि इसे फर्जीवाड़ा माना जा रहा है।
ये चाहते तो रुक सकती थी गड़बड़ी
- सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कलेक्टर : प्रशासन में सबसे अग्रिम पद पर होने के बावजूद उनके दफ्तर में उनसे जुड़े एक अफसर ने गड़बड़ी की। वे कार्रवाई के लिए दूसरे फर्जीवाड़े का इंतजार रहे हैं। कलेक्टर ने कहा है कि इसके बाद गड़बड़ी हुई तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगे।
- नीलकंठ टेकाम, अपर कलेक्टर : जानकारी के बाद भी मामले से किनारा कर लिया है। जांच के आश्वासन के बाद उन्होंने प्रकरण को जानना जरूरी नहीं समझा। कोटा एसडीएम को इसे रोकने के निर्देश देकर वे खामोश हो गए।
- नीरज बंसोड़, जिला पंचायत सीईओ : जिला पंचायत में मुखिया होने के नाते उनकी जिम्मेदारी थी कि ब्लॉक की पंचायतों में जाकर इसकी हकीकत जानते। जबकि ग्रामीणों ने उनसे शिकायत की थी।
प्रशासन की बदनामी हो रही है, इसे बंद करो...
प्रकरण में खुलासे के बाद संयुक्त कलेक्टर वर्मा ने कुर्रे को पत्र लिखकर कहा है कि इस गड़बड़ी को बंद करें। बिना सरकारी निर्देश या आला अधिकारियों की जानकारी के नोटशीट जनपद पंचायतों को भेजी गई है। इससे जिला प्रशासन की बदनामी हो रही है। उन्होंने अपर कलेक्टर नीलकंठ टेकाम को भी इसकी सूचना भेजी है और एनजीओ संचालक को उपस्थित होने का आदेश भेजा है।
सीधी बात : दूसरी बार गड़बड़ी होगी तो कानूनी कार्रवाई : सिद्धार्थ कोमल परदेशी, कलेक्टर
- संयुक्त कलेक्टर एसआर कुर्रे ने जनपदों को निर्देश भेजा है कि वे जनता से सरकारी योजना के नाम पर पैसे लें, क्या उनका आदेश वैध है?
नहीं... इसे रोकने के निर्देश तो दिए गए हैं। ये गलत और गंभीर है।
- फिर संबंधित अधिकारी के खिलाफ जांच या कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं?
वे दूसरी बार गड़बड़ी करेंगे तो कानूनी कार्रवाई होगी।
- अभी मामला ठंडे बस्ते में क्यों डाल रहे हैं?
ऐसी बात नहीं है। मैं देखता हूं।
सीधी बात : बाबू के कहने पर जारी किया है आदेश : एसआर कुर्रे, संयुक्त कलेक्टर
- आपने सभी जनपदों को सरकारी योजना के प्रचार-प्रसार के नाम पर नंबर प्लेट लगाकर पैसे वसूल करने का आदेश दिया है?
हां... दूसरे राज्यों में भी यह चल रहा है। इसलिए संबंधित व्यक्ति के नाम से इसे जारी किया गया है।
- क्या ये शासन के आदेश हैं या कलेक्टर से अनुमोदन लेकर यह काम करवाया जा रहा है?
नहीं बाबू ने कहा कि सभी राज्यों में ऐसा चल रहा है, इसलिए आदेश कर दिया?
- पर कलेक्टर तो कह रहे हैं कि यह गलत है फिर आपने इसे कैसे जारी किया?
हां, अब यह काम रुक गया है। संबंधित व्यक्ति को उपस्थित होने को कहा है। अब नहीं करुंगा ऐसा।