ऑटोनॉमी ऑफ द यूनिवर्सिटीज एंड रिलेशन विद स्टेट यानी विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और राज्यों से संबंध। इस विषय पर मंथन करने बिलासपुर यूनिवर्सिटी में देश की कई ख्यात यूनिवर्सिटी के कुलपति और विशेषज्ञ जुटे। कॉन्फ्रेंस के पहले दिन कमोबेश सभी ने यूनिवर्सिटीज की स्वायत्तता का समर्थन किया, लेकिन इसके साथ प्राध्यापकों, स्टूडेंट और समाज के प्रति यूनिवर्सिटी की जवाबदेही पर भी जोर दिया।
बिलासपुर. यूनिवर्सिटी ने ऑटोनॉमी ऑफ द यूनिविर्सटीज एंड रिलेशन विद स्टेट विषय पर दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया है। ये सालों से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रासंगिक और महत्वपूर्ण विषय रहा है। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री समेत देश की कई यूनिवर्सिटीज के कुलपति, पूर्व कुलपति, शिक्षाविदों ने इस विषय पर अपने बेबाक विचार रखे। ज्यादातर विशेषज्ञों ने यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता का समर्थन तो किया, लेकिन जवाबदेही तय करने पर जोर दिया। इसी तारतम्य में विशेषज्ञों ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र अकादमिक और प्रशासनिक सुधार,समाजपरक और रोजगारपरक शोध, शिक्षकों में खुली और व्यापक मानसिकता, शिक्षा का उद्देश्य और इसे प्राप्त करने के लिए परीक्षा पद्धति में बदलाव की जरूरत समेत कई मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान ऑटोनॉमी पर्याप्त है। वहीं बीयू के कुलपति प्रो. जीडी शर्मा ने कहा कि आज भी यूनिवर्सिटीज यूजीसी की तरफ देखती हैं कि कब सिलेबस आएगा। यह काम यूनिवर्सिटी की एक्जीक्यूटिव व एकेडमिक कौंसिल से भी हो सकता है लेकिन उसकी स्वायत्तता नहीं है।
बेहतर माहौल जरूरी है- प्रो. फरकान कमर, महासचिव, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज
भास्कर से बात करते हुए एआईयू के महासचिव प्रो. फरकान कमर ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए। जब तक सर पर छत और पेट में रोटी की व्यवस्था नहीं होगी तब तक शिक्षा सार्थक नहीं होगी। यूनिवर्सिटी को वित्तीय सपोर्ट मिलनी चाहिए। अभी यहां धन, रिसर्च, संसाधनों और फैकल्टी की कमी है। इसके लिए राज्य के स्तर पर ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। इन कमियों के चलते विश्व की टॉप 200 यूनिवर्सिटी में भी देश की एक भी यूनिवर्सिटी शामिल नहीं है। हर राज्य में एक आईआईएम और आईआईटी की सुविधा स्टूडेंट्स को मिलनी चाहिए।