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कविता फार्मेसी ने टेबलेट खरीदी 51 हजार, सप्लाई तीन लाख की

7 वर्ष पहले
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बिलासपुर। नसबंदी कांड की जांच कर रही पुलिस को पता चला है कि तिफरा की कविता फार्मेसी ने रायपुर की महावर कंपनी से केवल 51 हजार सिप्रोसिन टेबलेट खरीदी थी। इस सप्लायर ने जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को तीन लाख टेबलेट सप्लाई की थी। बाकी उसके पास कहां से आईं, पता नहीं चल सका है। पुलिस को आशंका है कि कविता फार्मेसी ने खुद यह दवा बनाई होगी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा और कई स्थानों पर दवा बेचने का संदेह है। फार्मेसी के केवल एक संचालक की गिरफ्तारी हो पाई है। जांच टीम का दावा है कि फरार आरोपी के पकड़े जाने के बाद कुछ और खुलासे हो सकते हैं।

नसबंदी कांड में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए खुलासे हो रहे हैं। अभी तक यही पता चला था कि तिफरा की कविता फार्मेसी ने रायपुर की महावर कंपनी से दवा लेकर इनकी सप्लाई स्वास्थ्य विभाग को की। कविता फार्मेसी ने जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में तीन लाख सिप्रोसिन टेबलेट की सप्लाई की थी। जांच में पाया कि उसने सिर्फ 50 हजार टेबलेट महावर कंपनी से ली थी। पुलिस को संदेह है कि कविता फार्मेसी में सिप्रोसिन टेबलेट बनाई जाती रही होगी। कंपनी के पास 250 व 500 एमजी की दवा बनाने का लाइसेंस है, लेकिन रिकाॅर्ड के मुताबिक कभी दवा नहीं बनाई।
फार्मेसी संचालन आर्या कालोनी निवासी राजेश खरे बड़े भाई राकेश खरे के साथ मिलकर करता था। पुलिस ने राजेश खरे को 15 नवंबर को गिरफ्तार कर लिया था। राकेश फरार है। पुलिस का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद और खुलासे होंगे।
खुद दवा बनाने का संदेह गहराया

कविता फार्मेसी के पास बाकी की 2.49 लाख टेबलेट्स आखिर कहां से आईं, इसकी पुलिस जांच कर रही है। आशंका है कि उसने यह दवा खुद ही बनाई होगी।