बिलासपुर. मास्टर ऑफ लॉ (एलएलएम) की परीक्षा में अनोखा मामला सामने आया है। इसमें जांजगीर कालेज के प्राचार्य केंद्राध्यक्ष तो थे ही, एलएलएम की परीक्षा भी दी। परीक्षा के दिन भी उन्होंने छुट्टी भी नहीं ली। रिजल्ट आया तो इस केंद्र के 60 परीक्षार्थियों में से सिर्फ तीन पास हुए, जिनमें वे खुद शामिल हैं।
बिलासपुर यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं के लिए जांजगीर कालेज को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। यहां के केंद्राध्यक्ष कालेज के प्राचार्य सुभाष दत्त झा हैं। वे केंद्राध्यक्ष रहते हुए एलएलएम की परीक्षा में शामिल हुए थे। यहां कौशलेंद्र राव विधि कालेज, डीपी विप्र कालेज व जांजगीर के टीएलएस कालेज के 60 छात्र शामिल हुए।
परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। इसके मुताबिक कुल 60 परीक्षार्थियों में से सिर्फ 3 ही पास हो सके हैं। पास हुए परीक्षार्थियों में केंद्राध्यक्ष यानी सुभाष दत्त झा भी शामिल हैं। निराशाजनक नतीजों से इसका खुलासा हुआ। फेल हुए परीक्षार्थी यह पचा नहीं पा रहे हैं कि प्राचार्य झा ने केंद्राध्यक्ष रहते हुए पूरी पारदर्शिता से पर्चा हल किया है। फेल
परीक्षार्थी इस मामले को लेकर कुलपति से शिकायत करने की तैयारी में हैं। बिलासपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. गौरीदत्त शर्मा अभी प्रवास पर है और 20 मई को यूनिवर्सिटी आएंगे। इसके बाद परीक्षार्थी उनसे मुलाकात करेंगे।
यूनिवर्सिटी की पहली परीक्षा
कालेजों में चल रहीं परीक्षाओं में कालेज के प्राचार्य केंद्राध्यक्ष रहते हुए परीक्षा में शामिल होना उच्च शिक्षा विभाग के नियमों में नहीं है। ऐसा कारनामा मॉस्टर ऑफ लॉ की परीक्षा में सामने आया। बिलासपुर यूनिवर्सिटी पहली बार मुख्य परीक्षाएं ले रही है। यही वजह है परीक्षाओं को लेकर कालेजों में गंभीरता नहीं बरती जा रही। फार्म की न तो गंभीरता से जांच की जा रही है और न ही परीक्षा को लेकर अधिकारी गंभीर हैं।
कोर्ट जाने की तैयारी
परीक्षा में शामिल छात्रों में इतनी अधिक नाराजगी हैं कि वे हर तथ्य की जानकारी निकालने के लिए आरटीआई में आवेदन दे रहे हैं। इनमें से कुछ परीक्षार्थी कोर्ट जाने की भी तैयारी में हैं।
ये है प्रावधान
सामान्य मामलों में पद पर रहते हुए परीक्षा में शामिल होना गलत है। आशंका होती है कि इससे पूरे सिस्टम पर पारदर्शिता नहीं होती। फिर भी यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के अनुसार नियम कहते हैं कि कालेज के प्राचार्य केंद्राध्यक्ष थे और परीक्षार्थी रूप में शामिल होना था तो उन्हें परीक्षा वाले दिन किसी और को केंद्राध्यक्ष की जिम्मेदारी दे देनी थी। विधिवत आयुक्तउच्च शिक्षा से छुट्टी लेकर ही परीक्षा देनी थी।
ऐसा नियम में ही नहीं है, गंभीर मामला है..
इस मामले की जानकारी ही नहीं है। प्रावधान में भी ऐसा नहीं है कि केंद्राध्यक्ष रहते हुए उसी केंद्र में कोई परीक्षा दी जाए। अगर ऐसा हुआ है तो देखा जाएगा। यह गंभीर मामला है।
डा. गौरीदत्त शर्मा, कुलपति बिलासपुर यूनिवर्सिटी
केंद्राध्यक्ष को परीक्षा वाले दिन उच्च शिक्षा आयुक्त से विधिवत अवकाश लेना था, फिर परीक्षा देनी थी। इस मामले की जानकारी नहीं है। ऐसा हुआ है तो गंभीर है।
अरुण सिंह, रजिस्ट्रार, यूनिवर्सिटी
यह बात बाद में पता चली कि जांजगीर कालेज के केंद्राध्यक्ष परीक्षार्थी के रूप में शामिल हुए। इस बात की जानकारी नहीं है कि उन्होंने अवकाश लिया था कि नहीं।
यूके श्रीवास्तव, परीक्षा नियंत्रक, यूनिवर्सिटी