(सिम्स के एनआईसीयू के वॉर्मर में एकसाथ तीन-चार बच्चों को रखा जा रहा है। इससे इन्फेक्शन फैलने की आशंका बनी रहती है। )
बिलासपुर। शहर के मेडिकल कॉलेज को अब इलाज की जरूरत है। लापरवाही के चलते सिम्स में अव्यवस्था हावी है। पूरे कैंपस में साफ-सफाई का अभाव है। हालात ये हैं कि परिजनों से पैसे लेकर एनआईसीयू जैसे संवेदनशील वार्ड की सफाई करवाई जाती है। पैसे नहीं मिलने पर गंदगी पसरी रहती है। अस्पताल में 18 नवजातों की मौत के पीछे गंदगी से फैल रहे इन्फेक्शन को भी बड़ी वजह माना जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज होने के कारण शहर समेत आस-पास के हजारों लोग इलाज के लिए सिम्स की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखते हैं। उनकी उम्मीद यहां पहुंचते ही खत्म हो जाती है। ओपीडी से लेकर वार्डों तक पूरी तरह से अव्यवस्था हावी है। कैंपस में पार्किंग के किनारे ही मरीजों के परिजनों को खाना बनाने के लिए जगह दी गई है। यहां की स्थिति गौशाला या अस्तबल से भी बुरी है। धूल, कचरे से भरी इस जगह में मरीजों के परिजन ईंट के अस्थाई चूल्हे बनाते हैं।
फिर लकड़ी की व्यवस्था कर खाना बनाते हैं। सब्जी काटने, चावल-दाल धोने, आटा गूंथने से लेकर खाना खाने तक उन्हें धूल-धुसरित जगह में ही रहना पड़ता है। यहां से गंदगी की शुरुआत होती है, जो वार्डों के अंदर तक नजर आती है। ये ही मरीजों के लिए इन्फेक्शन की वजह बन रहा है।
कर्मचारी ले रहे रुपए
लाफागढ़ अर्जुनी से आए अजय बंजारे ने बुधवार को पत्नी रवीना को सिम्स में भर्ती करवाने की जानकारी दी। उसी दिन उनकी बच्ची हुई। मां-बेटी दोनों बीमार हैं। वार्ड में डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचते। किसी प्रकार की तकलीफ होने पर जब वहां मौजूद नर्सों को बुलाया जाता है तो वे डाक्टरों के आने का इंतजार करने को कहती हैं। डॉक्टर दोपहर 12 बजे के बाद ही वार्ड में पहुंचते हैं। सफाई कर्मचारियों उनसे बिस्तर बदलने, उसे उठाने-बैठाने या कपड़े बदलने के 50-50 रुपए लिए जा रहे हैं।
कहते हैं जच्चे-बच्चे को ले जाओ
जयराम नगर निवासी लक्ष्मी प्रसाद साहू ने बताया कि उनकी बहू चंद्रकली का शुक्रवार को सुबह 11.5 पर सिम्स में बेटा हुआ है। मां तो स्वस्थ है, मगर नवजात पेट में पानी भरने से सीरियस है। बच्चा होने के बाद डाॅक्टरों ने कहा कि उनका बच्चा सीरियस है, लिहाजा उन्हें बाहर जहां भी इलाज कराना हो ले जाएं। गरीब होने और प्राइवेट अस्पताल में इलाज नहीं करा पाने का हवाला देने पर नवजात को कहते हुए भर्ती किया गया कि वे उसके जीवन की कोई गारंटी नहीं दे सकते।