बिलासपुर। मुंगेली जिले के जिम्मेदार अधिकारी 20 गांवों की 40 हजार जनता की पानी की समस्या नहीं सुलझा पा रहे हैं। मंत्री, कलेक्टर के साथ दूसरे अफसरों को भी इसकी जानकारी है, लेकिन इसके लिए कोई भी गंभीर प्रयास करता नजर नहीं आ रहा है। कलेक्टर मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं तो पीएचई के ईई सरकार को भेजे गए प्रस्ताव पर जल्द अनुमति मिलने का पुराना राग अलाप रहे हैं। कोई अफसर यह बताने को तैयार नहीं है कि 10 किलोमीटर दूर से पीने का पानी ला रहे ग्रामीणों की परेशानी का निराकरण कितने दिनों में होगा।
सरगांव-पथरिया मार्ग पर बिदबिदा, काचरबोड़, हथकेरा और अन्य गांवों का भू-जल खारा है। लोगों को 10 किलोमीटर से मीठा पानी लाना पड़ रहा है। वृद्ध, महिलाएं और बच्चे सभी इसके लिए सुबह से शाम तक जद्दोजहद करते देखे जा सकते हैं। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत जल संसाधन मंत्री और कलेक्टर से की, पर हुआ कुछ नहीं। दैनिक भास्कर ने ग्रामीणों के संघर्ष से दो-दो हाथ करने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
कलेक्टर और पीएचई के अधिकारियों ने मिल-जुलकर समाधान करने की बात कही, लेकिन महीनों बाद यहां के गांवों की तस्वीर नहीं बदल सकी है। पीएचई के अधिकारी यहां आर-ओ प्लांट और वाटर प्यूरीफायर लगाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने का दावा कर रहे हैं। ईई आरके उरांव के मुताबिक राज्य मद से इस सप्ताह के भीतर बजट मिलने की उम्मीद है। उनका कहना है कि सरकार की अनुशंसा के बाद मामले में ग्रामीणों को राहत मिल सकती है। इससे पहले उन्होंने समूह नल-जल और बीआरजीएफ योजना में बजट सेंशन करवाने की बात कही है, लेकिन रुपए अभी तक नहीं मिले हैं। जाहिर तौर पर अफसर मामले में रुचि नहीं ले रहे हैं और सरकार ग्रामीणों की अनदेखी कर रही है।
दो साल बाद भी हालात देखने नहीं पहुंचे अधिकारी
ग्रामीणों का आरोप है कि कलेक्टर और दूसरे अधिकारियों ने दो साल बाद भी इन गांवों का दौरा नहीं किया है। शिकायत करने पर अफसर व्यवस्था जल्द ठीक करने का आश्वासन देते हैं। अब नागरिकों ने अफसरों के पास जाना ही बंद कर दिया है। उनके मुताबिक पूर्व स्पीकर और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष धरमलाल कौशिक का क्षेत्र होने के बावजूद उनका गांव खुद सालों से उपेक्षित है।
प्रस्ताव भेजा है, जल्द सुलझ जाएगी समस्या
समूह नल-जल और बीआरजीएफ योजना के बाद हमने राज्य मद से इन गांवों के लिए वाटर प्यूरीफायर और आरओ प्लांट लगवाने का प्रस्ताव भेजा है। इस सप्ताह तक बजट पास होने का अनुमान है। कुछ दिनों में ग्रामीणों की समस्या का समाधान हो सकता है।''
आरके उरांव, ईई, पीएचई मुंगे