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प्रबंधक और बिचौलिए की मिलीभगत, बिचौलिए को सौंप दिया 17 लाख का चेक

9 वर्ष पहले
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बिलासपुर. लाखासार खरीदी केंद्र में प्रबंधक और बिचौलिए की मिलीभगत से 17 लाख रुपए के धान अवैध रूप से खरीदे जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

बिचौलिए ने किसानों के नाम पर धान बेचकर शासकीय योजना का गलत तरीके से लाभ लिया है। संयुक्त टीम की छापेमार कार्रवाई में चेक पंजी के निरीक्षण के दौरान यह गंभीर आर्थिक अनियमितता का पता चला।


केंद्र में अवैध रूप से रबी सीजन का धान खरीदने,ऋण पुस्तिका की जांच नहीं करने और किसानों को आवक पर्ची नहीं देने का भी खुलासा हुआ। तखतपुर ब्लाक के धान खरीदी केंद्र लाखासार में किसानों से रबी सीजन का धान खरीदने की शिकायत अधिकारियों को मिली।


आला अफसरों के निर्देश पर जांच के लिए चार सदस्यीय संयुक्त टीम का गठन किया गया जिसमें गनियारी केंद्र में लाखों के घोटाले का पर्दाफाश करने वाले फूड इंस्पेक्टर देवेंद्र बग्गा,तहसीलदार एसपी बंजारे,कृषि विस्तार अधिकारी संतोष टोंडे और पटवारी विजय कुमार जोशी को शामिल किया गया।

संयुक्त टीम ने शनिवार को केंद्र में छापा मारा। अचानक अधिकारियों के पहुंचने से प्रबंधक महेंद्र कुमार यादव सहित अन्य कर्मचारी हड़बड़ा गए और इसके पहले कि वे अपनी गलतियों पर पर्दा डालते अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी।

जांच में खरीदा गया 85 बोरा (4200 किग्रा)रबी फसल का धान मिला जबकि ऐसा ही 27 बोरा धान खरीदने के लिए रखा हुआ था। इसे जब्त कर प्रबंधक के सुर्पुद कर दिया गया। इसके बाद टीम ने चेक पंजी की जांच की जिसमें 21 किसानों द्वारा बेचे गए धान के 27 चेक रमेश कुमार पिता शिवचरण निवासी लाखासार को देने का पता चला।

चेक की राशि 17 लाख 11 हजार 939 रुपए है। ग्रामीणों से पूछताछ में पता चला कि रमेश धान खरीदी बिक्री करता है। प्रबंधक के साथ उसका उठना बैठना होता है। उसने किसानों के नाम पर अपना धान प्रबंधक से मिलीभगत कर बेचा है। इसे गंभीर आर्थिक अनियमितता मानते हुए संयुक्त टीम ने चेक पंजी जब्त कर प्रकरण दर्ज कर लिया है।


और भी अनियमितताएं
इसी केंद्र में जांच के दौरान और भी अनियमितताओं का खुलासा हुआ। यहां किसानों के आवक पंजी गायब थे जबकि ऋण पुस्तिका का निरीक्षण करने के पहले ही किसानों से धान खरीदे जाने का पता चला। इतना ही नहीं 10 बोरों की रेंडम तौल के दौरान किसी में कम तो किसी बोरे में अधिक धान मिला।


गनियारी के बाद लाखासार
दो दिन पहले गनियारी में धान खरीदी के दौरान किसानों से पौने दस लाख रुपए के धान अधिक लेकर उनकी गाढ़ी कमाई धोखे से लेने का मामला सामने आया था और अब लाखासार में बिचौलिए द्वारा किसानों के नाम पर अवैध रूप से धान बेचकर शासन की योजना का बेजा लाभ लेने का प्रकरण। जिले में धान खरीदी और घोटाला एक-दूसरे के पर्याय बनते जा रहे हैं।