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एनआईसीयू में ठूंसे गए हैं मासूम, बारी-बारी रखे जाते हैं वॉर्मर में

7 वर्ष पहले
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(बच्चे का शव ले जाता नाना)
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट में मासूमों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले नौ दिनों से हर रोज इस वार्ड में एक या दो मौतें हो रही हैं। इनकी बड़ी वजह सिम्स के शिशु वार्ड और एनआईसीयू खुद हैं। यहां 12 बच्चों के लिए वाॅर्मर हैं, लेकिन तीन दर्जन से अधिक को रखकर एक-एक कर वाॅर्मर में रखा जा रहा है। प्रबंधन इसे मानने से इनकार कर रहा है, लेकिन हकीकत यही है।
हाल ही में फूड पॉइजनिंग के मरीजों का इलाज कर अपनी पीठ थपथपाने वाले सिम्स प्रबंधन के पास एनआईसीयू में हो चुकी 16 मौतों पर कोई जवाब नहीं है। सिम्स में 1 से 9 दिसंबर तक, यानी पिछले नौ दिनों में 16 शिशुओं की जान चली गई। इसके लिए प्रबंधन सीधे तौर पर जिम्मेदार है। प्रबंधन के अफसर बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति कितने संवेदनशील हैं, इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि गंभीर हालत में लाए गए मासूमों को वे छोटे से कमरे में ठूंस-ठूंसकर रख रहे हैं।
शिशु वार्ड के इस छोटे से कमरे को एनआईसीयू बनाई गई है। नियमों के मुताबिक जहां बच्चों को भर्ती करने का वार्ड हो, वहां एनआईसीयू नहीं बनाई जा सकती। यहां यूनिट 12 सालों से चल रही है।
चार दिन पहले सिम्स में हुआ था जन्म, शिशु की मौत

तखतपुर ब्लॉक के पुरैना निवासी मणिराम साहू की पत्नी सीता साहू ने चार दिन पहले सिम्स में बच्चे को जन्म दिया था। इसकी डिलिवरी समय पर हुई थी। जब बच्चा पैदा हुआ तो वह रोया नहीं। उसे तत्काल अस्पताल प्रबंधन ने शिशु वार्ड में भेज दिया। मणिराम ने बताया कि चार दिन से बच्चा एनआईसीयू में था। डाॅक्टरों ने उसे बताया कि खून की कमी है, जो उसे चढ़ाया गया है। दवाएं जारी हैं। मंगलवार को सुबह 10 बजे डाॅक्टरों ने बच्चे की मौत होने की जानकारी दी। उसे क्या हुआ था, इस बारे में कुछ नहीं बताया और जाने के लिए कह दिया। सवाल उठता है कि स्वास्थ्य केंद्रों से गंभीर मामले रेफर करने का बहाना करने वाले सिम्स प्रबंधन के पास इस केस के बारे में क्या कहना है। इस बच्चे की पैदाइश ही सिम्स में हुई थी।