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इस तरह तो ठेकेदार को घटिया काम करने की खुली छूट दे रहे हैं अफसर और मंत्री

7 वर्ष पहले
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(पुल के पिलर खड़े करने में गड़बड़ी का भास्कर ने खुलासा किया था। इसके बाद ऐहतियात के तौर पर पुल को यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। )
बिलासपुर. तुरकाडीह पुल की निर्माता फर्म सुंदरानी कंस्ट्रक्शन को पुल बनाकर देने के एवज में एफआईआर न करवाने की छूट देना पीडब्ल्यूडी प्रशासन को महंगा पड़ सकता है। शासन-प्रशासन का यह निर्णय इस फर्म समेत अन्य कंपनियों के संचालकों को बेखौफ बना देगा। तुरकाडीह पुल का भ्रष्टाचार सामने आने पर आला अफसरों से लेकर मंत्री तक ने एफआईआर के आदेश तो दे दिए, लेकिन यह महज दिखावा साबित हुआ। सच्चाई यह है कि पर्दे के पीछे यही तमाम लोग फर्म के संचालकों के बचाव के रास्ते बताते गए।

तुरकाडीह पुल के पिलरों के पाइल कमजोर बनाए गए। लगभग 20 फीट की गहराई तक लोहे के लाइनर नहीं डाले। इससे काॅन्क्रीट बह गया और पुल के पाए सरियों पर टिके हुए हैं। छह महीने पहले पुल यातायात के लिए बंद कर दिया गया था। पिलरों की खराब हालत देखकर पुल के किसी भी दिन गिरने की आशंका जताई जा रही है। निर्माण के समय की खामियां ठीक करने की कोशिश की गई, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। दैनिक भास्कर ने इसमें हुए भ्रष्टाचार की एक-एक परत उधेड़ कर रख दी। इसके बाद राज्य शासन ने सुंदरानी कंस्ट्रक्शन कंपनी से पुल की लागत राशि सवा तीन करोड़ रुपए मांगे। कंपनी के संचालकों के खिलाफ एफआईआर करने का आदेश भी जारी करना पड़ा।
जनता हो रही परेशान
सकरी-तुरकाडीह-कोनी बाईपास रोड पर बने इस पुल के बंद होने से क्षेत्र की जनता खासी परेशान है। पीडब्ल्यूडी के सेतु डिवीजन ने पुल के दोनों छोर में दीवार खड़ी कर उसे पैदल यात्रियों के लिए भी बंद कर दिया था, लेकिन आस-पास के ग्रामीणों ने दीवार का कोना तोड़कर साइकिल और बाइक पार करने का रास्ता बना लिया है। पैदल यात्री भी इसका पूरा उपयोग कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों की समस्या तो हल हो गई, लेकिन छोटे और भारी वाहनों के लिए समस्या बनी हुई है।
बार-बार बदलता रहा शासन का रुख, प्रकरण ठंडे बस्ते में चला गया
> पुल में भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद राज्य शासन ने चार महीने पहले एफआईआर के आदेश दिए थे।
> इसके बाद कभी रिकॉर्ड न होने तो कभी आला अफसरों की अनुशंसा न होने का बहाना कर एफआईआर टाली जाती रही। अब तक कंस्ट्रक्शन कंपनी के किसी भी संचालक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले में पीडब्ल्यूडी के अफसरों पर उच्च स्तरीय दबाव डालकर कार्रवाई रोक दी गई।
> इस बीच कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालकों ने शासन को यह लिखकर दे दिया कि वे शासन को लागत राशि देने के बजाय पुल के पायों को सुधार कर देंगे।
> पीडब्ल्यूडी ने भी नरम रुख अपना लिया। विभाग प्रमुख ने संचालकों से उतने ही पैसे की बैंक गारंटी देने के लिए कहा, लेकिन संचालकों ने इससे इनकार कर दिया।
> इसके बाद दोबारा एफआईआर करवाने की कवायद शुरू हुई। इधर, कार्रवाई रोकने के लिए राजधानी रायपुर में जद्दोजहद शुरू हो गई और आखिरकार कार्रवाई रुक गई।
> कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालकों ने विभाग को एक शपथ-पत्र दिया है, जिसमें नदी का पानी कम होने के बाद निर्माण शुरू करवाने की बात है। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। आगे अब अफसर सुंदरानी कंस्ट्रक्शन कंपनी के काम शुरू करने का इंतजार कर रहे हैं।