'नेचर' की मुहिम पर मंत्रालय की मुहर

9 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

बिलासपुर।


सैकड़ों नन्हे हाथों ने कूचियां थाम ली थीं... किसी ने कैनवास पर हरे, पीले, नीले रंगों से पेड़-पौधे बनाए थे तो किसी ने वन्यप्राणी और हरियाली का महत्व बताया था। यह सब किसी पेंटिंग स्पर्धा का हिस्सा नहीं था, जिसमें शहरी स्कूल के बच्चे इनाम की ख्वाहिश से जुड़े हों। अचानकमार-अमरकंटक बॉयोस्फियर के भीतर चलने वाले स्कूलों के बच्चों ने यह अभियान चलाया था, ताकि लोग जंगल और वन्यप्राणियों को बचाने के लिए जागरूक हों। उपलब्धि यह कि 'नेचर बॉडीजÓ और वन विभाग की इस मुहिम को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 'सर्वश्रेष्ठ अभियानÓ का दर्जा दिया है।
पर्यावरण जागरूकता को लेकर शहरों में ही अभियान चलाया जाता रहा है। अचानकमार-अमरकंटक बॉयोस्फियर रिजर्व के अधिकारियों ने रिजर्व के कोर और बफर जोन में शामिल गांवों में रहने वाले लोगों, वहां के स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को पर्यावरण और वनों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से अभियान चलाने का निर्णय लिया। इसके लिए पर्यावरण जागरूकता की दिशा में काम करने वाली भारत माता अंग्रेजी माध्यम स्कूल की संस्था 'नेचर बॉडीजÓ की मदद ली गई। योजनाबद्ध तरीके से अभियान की शुरुआत 5 दिसंबर को शिवतराई के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल से की गई। इसमें प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी तक के 723 स्टूडेंट्स शामिल हुए। छात्र भागीरथी के नेतृत्व में 15 छात्रों को जिम्मेदारी सौंपी गई। वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों और नेचर बॉडीज के 17 सदस्यों के मार्गदर्शन में स्टूडेंट्स ने रंगों से स्कूल की दीवार पर पेंटिंग्स बनाई। रंगों के जरिए स्टूडेंट्स को स्कूल हरा-भरा और साफ-सुथरा रखने के लिए प्रेरित किया गया।


उम्मीदों का हरा-भरा वृक्ष


अभियान के तहत 15 दिसंबर की टीम अचानकमार के मिडिल स्कूल पहुंची। यहां खेल-खेल में सीखो की तर्ज पर बच्चों को एक बड़े कैनवास पर 'उम्मीदों का हरा-भरा वृक्ष बनाने को प्रेरित किया गया। कभी ड्राइंग बुक की शक्ल नहीं देखने वाले स्टूडेंट्स ने कुछ ही मिनटों में कैनवास पर हरे और कत्थे रंग से वृक्ष बनाने के साथ ही नन्हे-नन्हे पंजों के निशान से उसे सजा भी दिया। पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा देने के साथ ही बच्चों को पानी बचाने, सौर ऊर्जा और वनों की सुरक्षा का भी संदेश दिया गया। यहां 75 छात्रों और गांव के 62 नागरिक अभियान में शामिल हुए। 17 दिसंबर की सुबह टीम छपरवा के हायर सेकेंडरी स्कूल पहुंची। यहां छात्रों को हरा-भरा और साफ-सुथरे स्कूल के साथ ही गांव को भी पॉलीथिन मुक्त रखने के लिए प्रेरित किया गया। शेष पेजत्न१७

यहां भी 75 छात्र अभियान का हिस्सा बने। इसी दिन दोपहर में टीम बॉयोस्फियर के भीतर स्थित गांव बिंदावल पहुंची। यहां 150 छात्रों और 162 ग्रामीणों को पेंटिंग्स और दूसरे जरिए से पर्यावरण के प्रति जागरूक किया गया।


संस्कृति में है जंगल की सुरक्षा की सीख


टीम ने 20 दिसंबर को कटामी और सुरही और 21 दिसंबर को केंवची और आमाडोब के स्कूल में अभियान चलाया। इस दौरान यहां के स्कूलों में पढऩे वाले छात्रों और ग्रामीणों को रंगों के जरिए पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ ही गांव और जंगल को पॉलीथिन से मुक्त करने, सौर ऊर्जा और पानी बचाने के महत्व की जानकारी दी गई। 5 दिसंबर से 21 दिसंबर तक अचानकमार बॉयोस्फियर के 10 गांवों में चलाए गए अभियान के दौरान टीम 3 हजार 728 छात्रों और हजारों ग्रामीणों को पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी की जानकारी देने के साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा के उपायों की जानकारी दी।


'पर्यावरण मित्र' से मिली पहली रैंकिंग


अचानकमार बॉयोस्फियर के स्कूलों और गांवों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से चलाए गए अभियान पर आधारित प्रोजेक्ट को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा संचालित 'पर्यावरण मित्रÓ को भेजा गया था। संस्था ने दिसंबर माह में पर्यावरण संरक्षण के लिए देशभर में चलाए गए अभियानों में सर्वश्रेष्ठ माना और पहली रैंकिंग दी। दूसरे नंबर पर दिल्ली, तीसरे नंबर पर आंध्रप्रदेश और चौथे नंबर पर बिहार की टीमें रहीं।

प्रकृति से ही सुरक्षित होगा भविष्य

टीम 19 दिसंबर की सुबह लमनी के मिडिल स्कूल पहुंची। यहां स्टूडेंट्स को बताया गया कि किस तरह प्रकृति से ही मानव जीवन को सुरक्षित किया जा सकता है। यहां छात्रों, ग्रामीणों को सुरक्षित भविष्य के शपथ दिलाने के बाद स्कूल की दीवारों पर प्रकृति की पेंटिंग्स बनवाई गई। इसके जरिए पॉलीथिन मुक्त जंगल, स्कूल और गांव को साफ-सुथरा रखना सिखाया गया। दोपहर में टीम बॉयोस्फियर के भीतर अतरिया गांव पहुंची। यहां के 23 छात्रों से खेल-खेल में सीखो की तर्ज पर पेंटिंग बनवाने के साथ ही स्कूल, गांव और जंगल को साफ-सुथरा और सुरक्षित रखने के प्रति जागरूक किया गया।

पर्यावरण जागरूकता है उद्देश्य

॥बॉयोस्फियर रिजर्व की अवधारणा को स्थानीय लोग समझ नहीं पाए हैं। अभियान के जरिए स्कूलों में पढऩे वाले छात्रों और ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि पर्यावरण के साथ तालमेल बनाकर किस तरह जीवन यापन किया जा सकता है। नेचर बॉडीज के पानू हालदार और अन्य सहयोगियों की मदद से चलाया गया अभियान सार्थक रहा है।ञ्जञ्ज
अनिल साहू, वन संरक्षक

300 गांवों में चलेगा अभियान

॥पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से चलाए गए अभियान की शुरुआत 10 गांवों से की गई है। 21 से 28 जनवरी तक अभियान का दूसरा चरण चलाया जाएगा। कोर जोन के बाद बफर जोन में अभियान चलाने की योजना है। बॉयोस्फियर रिजर्व के लगभग 300 गांवों में रहने वाले लोगों और छात्रों को पर्यावरण का महत्व बताया जाएगा।ञ्जञ्ज
बीपी सिंह, डायरेक्टर अचानकमार-अमरकंटक बॉयोस्फियर रिजर्व