बिलासपुर. मौसम ने लोगों को परेशान कर रखा है। बारिश की वजह से खुले में पड़े करोड़ों रुपए के धान भीग रहे हैं, वहीं मौसम का मिजाज बदलने का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है। ठंड की वापसी हो चुकी है और गर्मी कुछ दिन आगे खिसक गई है।
पश्चिमी विक्षोभ मौसम विज्ञानियों के अनुमानों को गलत साबित कर चुका है। दिल्ली से पाकिस्तान तक ऊपरी हवा में बने कम दबाव के क्षेत्र की वजह से पूरे छत्तीसगढ़ का मौसम पिछले पांच दिनों से बदल चुका है। कई इलाकों में बारिश हो रही है, वहीं बाकी जगह ठंड की वापसी हो गई है। फरवरी के दूसरे सप्ताह से ठंड की विदाई और गर्मी की शुरुआत हो जाती है, लेकिन बेमौसम बारिश की वजह से गर्मी कुछ दिन आगे खिसक गई है। पांचवें दिन मौसम की शरारत जारी रही। सुबह गरज-चमक के साथ बारिश हुई तो पूरे दिन ठंड सताती रही।
धूप भी खिली, लेकिन आसमान पर बादलों की वजह से गर्मी का अहसास नहीं हुआ। गुरुवार की सुबह आसमान पर काले बादल नजर आए और सूरज निकला ही नहीं। धीरे-धीरे पूरे आसमान को बादलों ने कब्जे में ले लिया और गरज-चमक के साथ बारिश होने लगी। शहर के साथ ही आस-पास के इलाकों में बादल बरसने लगे और ठंडी हवा चलने लगी। इसके बाद पूरे दिन सूरज की आंख-मिचौली चलती रही। धूप निकला, लेकिन गर्मी का अहसास नहीं हुआ। शहर का अधिकतम तापमान घटकर 24 डिग्री पर पहुंच गया। वहीं रात का तापमान 14 डिग्री के करीब दर्ज किया गया। शहर के साथ ही ग्रामीण इलाकों में बारिश होने की जानकारी मिली। रतनपुर, कोटा, बेलगहना, तखतपुर व बिल्हा के इलाके में भी बारिश हुई।
इनका कहना है...
कुछ इलाकों में हो सकती है बारिश
मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। अगले 24 घंटे तक जिले के कुछ इलाकों में बारिश की संभावना है जबकि अधिकतम तापमान 25 डिग्री के करीब रहने का अनुमान है। पश्चिमी विक्षोभ धीरे-धीरे पाकिस्तान की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इसका असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।’’
-उमेश रायक्वापर्ण, मौसम विज्ञानी
इतनी बारिश से नहीं होता असर
सामान्य बारिश से धान को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। संग्रहण केंद्रों में कैप कवर से धान के बोरे ढंककर रखे गए हैं। यदि और बारिश हुई तो मार्कफेड को एहतियात बरतने के निर्देश देंगे।’’
-जीएस पैकरा, फूड कंट्रोलर
पेंड्रा में 7 मिमी बारिश, 11 डिग्री पहुंचा पारा
गुरुवार को पेंड्रा के इलाके में करीब 7 मिमी बारिश हुई। वहीं पिछले डेढ़ माह में वहां 30 मिमी बारिश हो चुकी है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक जंगल के इलाके में जल्द ही बारिश होती है। पेंड्रा में पिछले तीन-चार दिनों से रुक-रुककर बारिश होने की वजह से वहां का न्यूनतम तापमान घटकर 11 डिग्री पहुंच गया है। वहीं अधिकतम तापमान 23.4 डिग्री दर्ज किया गया।
करोड़ों का धान भीगा, अब बारिश हुई तो होगा नुकसान
जिले में इस बार करीब 36 लाख क्विंटल धान खरीदा गया है। इसमें से आधा धान संग्रहण केंद्रों व खरीदी केंद्रों में खुले आसमान के नीचे रखा है। बारिश से धान के बोरे भीग गए हैं। जानकारों के मुताबिक यदि और बारिश हुई तो पिछले सालों की तरह इस बार भी धान सड़कर खराब हो जाएगा और इससे करोड़ों का नुकसान होगा। जानकारों का कहना है कि यदि सरकार पुख्ता इंतजाम कर दें तो अगले साल फिर धान को शराब के लिए नीलाम करने की नौबत नहीं आएगी।
इसके लिए सरकार को पहल करनी होगी। बेमौसम बारिश पर किसी का नियंत्रण नहीं है, लेकिन खरीदी व संग्रहण केंद्रों में धान को सुरक्षित तरीके से रखने के इंतजाम तो किए जा सकते हैं। शेड वाले चबूतरे और गोदाम बनवाकर धान को महफूज रखा जा सकता है। गौरतलब है कि साल के पहले दिन भी अलसुबह तेज बारिश हुई थी और लाखों क्विंटल धान भीग गया था।
खेतों में पानी भरने से दलहनी फसलें खराब होंगी
अभी चना, तिवड़ा और बटरी खेतों में मौजूद है। मौसम खराब होने से किसान चिंतित है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दलहनी फसलों के खेतों में पानी भर गया तो इससे नुकसान होगा। पर अभी पानी भरने जैसी स्थिति नहीं है। इस बार जिले में गेहूं व चने का रकबा पिछले साल के मुकाबले घटा है और ग्रीष्मकालीन धान का रकबा बढ़ा है। चना व गेहूं में फलियां लग चुकी है इसलिए किसान ज्यादा चिंतित है।