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डाउनलोड करेंजगदलपुर. सरकार ने कुछ समय पहले सरकारी हास्पिटल में मौत के बाद शव को मुफ्त में उसके घर ससम्मान पहुंचाने के लिए चालू की गई मुक्तांजलि 1099 सुविधा बस्तर में कागजों में चल रही है। शवों को लेकर जाने के लिए परिजनों को घंटों गाड़ी का इंतजार करना पड़ता है।
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद भास्कर टीम ने पीडि़तों के साथ खुद ही इस योजना की पड़ताल की। पहले केस 28 जनवरी को मिला। कोंडागांव मेें रहने वाले 31 साल के एक युवक की इलाज के दौरान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौत हो गई थी। परिजनों ने मुक्तांजलि योजना के टोलफ्री नंबर पर फोन किया, तो वहां से ड्राइवर का नंबर दिया गया। इन नंबर पर घंटेभर प्रयास के बाद संपर्क हुआ। ड्राइवर ने बताया कि वह रायपुर में है।
योजना में शामिल ड्राइवरों को वेतन नहीं मिला है। इसलिए वह काम पर नहीं जाएगा। इस दौरान मुक्तांजलि योजना की दोनों गाडिय़ां अस्पताल परिसर में ही खड़ी थी। बीजापुर के एक युवक की मौत के बाद परिजन रेडक्रास की गाड़ी में उसका शव लेकर गए। योजना के जिला समन्वयक प्रदीप देवांगन ने भी स्वीकार किया है कि योजना में कुछ दिक्कत है। दो गाडिय़ां खराब हैं। देवांगन ने माना कि वाहन चालकों को वेतन नहीं मिला है। वेतन की राशि रायपुर से आती है।
वह इसमें कुछ नहीं कर सकता। योजना कब तक पटरी पर आएगी, इस बारे मेें वह कुछ नहीं बता पाए।
दूसरा केस बीजापुर के युवक का आया, जिसकी मौत हो चुकी थी। फोन करने पर काल सेंटर के व्यक्ति ने पूरी जानकारी ली और परिजनों को मेडिकल कालेज के मेन गेट पर खड़े होने को कहा। उसका कहना था कि वाहन वहीं पर भेजा जा रहा है। शव को लेकर परिजन गेट पर खड़े रहे, पर आधे घंटे बाद भी गाड़ी नहीं आई। दोबारा काल सेंटर में फोन किया गया, तो पांच मिनट बाद फोन करने को कहा गया। इसके बाद वाहन के चालक नरेंद्र डोंगरे का नंबर दिया गया। यह नंबर लगा ही नहीं। योजना से जुड़े लोगों ने बताया कि एक वाहन खराब है। दूसरा कांकेर गया है। हार कर परिजनों ने दूसरी गाड़ी का इंतजाम किया और शव को लेकर बीजापुर रवाना हुए।
योजना के जिला समन्वयक प्रदीप देवांगन ने भी स्वीकार किया है कि योजना में कुछ दिक्कत है। दो गाडिय़ां खराब हैं। देवांगन ने माना कि वाहन चालकों को वेतन नहीं मिला है। उसका कहना था कि वेतन की राशि रायपुर से आती है। वह इसमें कुछ नहीं कर सकता। योजना कब तक पटरी पर आएगी, इस बारे मेें वह कुछ नहीं बता पाए।
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