पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • भारी लापरवाही, जोनल मुख्यालय के रेलवे स्टेशन की सुरक्षा दूर देहात के स्टेशनों जैसी

भारी लापरवाही, जोनल मुख्यालय के रेलवे स्टेशन की सुरक्षा दूर देहात के स्टेशनों जैसी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
(प्लेटफाॅर्म नंबर सात, आठ के हावड़ा इंड में चुचुहियापारा फाटक तक जाने के लिए पटरियों के बीच से पाथ-वे बनाया गया है। 35 लाख रुपए से खरीदी गई बैगेज स्केनर मशीन का उपयोग ही नहीं किया जाता। ये शो-पीस की तरह रखी हुई है। )
बिलासपुर । नक्सलियों की सक्रियता के आधार पर संवेदनशील घोषित होने के बाद भी जोनल मुख्यालय के रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त नहीं हैं। बैगेज स्कैनर, मैटल डिटेक्टर जैसे उपकरण खरीदे तो गए, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसी वजह से ये महज शो-पीस बनकर रह गए हैं। रेलवे स्टेशन और विभिन्न प्लेटफॉर्म का सुरक्षा घेरा तगड़ा नहीं होने से आए दिन यहां अपराधी घुसपैठ करते हैं। चोरी-उठाईगीरी की घटनाओं को अंजाम देते हैं।

रेलवे स्टेशन परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल खड़े होते रहे हैं। जवाबदार विभागों के अफसर बल की कमी का बहानाकर पल्ला झाड़ लेते हैं। स्टेशन परिसर में अाने-जाने वाले रास्तों पर कभी चेकिंग नहीं की जाती। प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए एक नहीं, कई रास्ते हैं। ट्रेनों के आने पर मुख्य द्वारों पर टीटीई कुछ मिनट के लिए खड़े हो जाते हैं। इसके बाद स्टेशन में बेरोकटोक आवाजाही बनी रहती है। स्टेशन के दूसरे छोर यानी चुचुहियापारा की ओर जब तक प्रवेश द्वार नहीं बनाया जाएगा, इस तरह का आवागमन नहीं रोका जा सकता। रेल प्रबंधन ने दूसरे हिस्से में प्रवेश द्वार बनाने के लिए रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजा है। वहां से मंजूरी मिलने में कितना वक्त लगेगा, किसी को नहीं पता।

बैगेज स्केनर मशीन यानी सफेद हाथी: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मॉडल स्टेशन के मुख्य द्वार पर लगभग 35 लाख रुपए कीमत की बैगेज स्केनर मशीन लगी है, लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता। यह दो सालों से "सफेद हाथी' बनकर रखी हुई है। इसी तरह यहां लगाए गए मैटल डिटेक्टर भी किसी काम के नहीं। इसकी अनदेखी कर लोग बगल से निकल जाते हैं।
आरपीएफ, जीआरपी के समन्वय से सुधरेंगे हालात
आरपीएफ और जीआरपी समन्वय के साथ काम करें तो कुछ हद तक सुरक्षा इंतजाम पुख्ता किए जा सकते हैं। इसके बाद भी अमले की कमी बनी रहेगी। इधर, अफसरों का कहना है कि जितना बल उपलब्ध है, उसमें परिसर के सभी गेट कवर नहीं किए जा सकते। रेल प्रबंधन को बल बढ़ाने का प्रस्ताव भेजना चाहिए।
तोड़-फोड़ करने वाले आसानी से भाग गए
इस साल सितंबर में छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स की भर्ती में आए उत्तरप्रदेश के दर्जनों युवकों ने स्टेशन परिसर में खड़ी सारनाथ ट्रेन में तोड़-फोड़ आैर यात्रियों से दुर्व्यवहार किया। सुरक्षा बल देर से पहुंचा, इसलिए युवक मौके पाकर फरार हो गए। कुछ एक की गिरफ्तारी हो सकी।