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कैश सब्सिडी में छग का एक भी ग्रामीण बैंक नहीं, उपभोक्ता परेशान

7 वर्ष पहले
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(एसबीआई की कलेक्टोरेट ब्रांच में कैश सब्सिडी के फॉर्म जमा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। )
बिलासपुर । ग्रामीण बैंकों में लाखों की संख्या में लोगों ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत खाते तो खुलवा लिए हैं, लेकिन ये बैंक तो सब्सिडी योजना के लिए निर्धारित बैंकों में शामिल ही नहीं हैं। मंत्रालय द्वारा जारी 155 बैंकों की लिस्ट में केवल दो ग्रामीण बैंक शामिल हैं, जिनका छत्तीसगढ़ से कोई सरोकार नहीं है। इधर, भारतीय स्टेट बैंक की कलेक्टोरेट ब्रांच को छोड़कर
बाकी शाखाओं में फॉर्म जमा न होने से उपभोक्ता परेशान हैं।
एक जनवरी 2015 से शुरू हो रही गैस सब्सिडी का लाभ एलपीजी के सभी वैध उपभोक्ताओं को मिलेगा। इसके लिए उन्हें एमडीबीटीएल यानी मोडिफाइड डायरेक्टर बेनीफिट फॉर एलपीजी स्कीम के फाॅर्म भरने हैं और अपना आधार नंबर या बैंक खाता गैस नंबर से लिंक कराना है। दिसंबर में फाॅर्म जमा कर खाता लिंक कराने पर जनवरी में सब्सिडी की रकम सीधे उपभोक्ताओं के खाते में जमा होगी। 15 दिन पहले से ही शहर में फाॅर्म देने की शुरुआत हो चुकी है और उपभोक्ता फाॅर्म लेकर इसे भरकर जमा भी कर रहे हैं।
जिन उपभोक्ताओं के पास आधार नंबर नहीं है, उन्हें फाॅर्म तीन व चार जमा करने के लिए कहा जा रहा है लेकिन अगर उनके पास छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक का खाता है, तो उन्हें वापस भेज दिया रहा है।
लाभ दिलाने पीएम को लिखा पत्र
अधिवक्ता विजय शंकर तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ग्रामीण बैंकों के खातेदारों को गैस सब्सिडी का लाभ दिलाने की मांग की है। उन्होंने लिखा है कि एजेंसियां ग्रामीण बैंक के खातों को स्वीकार नहीं कर रही है। इससे हजारों उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
खाता खुला, पर फॉर्म नहीं दे रहे

नवागांव निवासी रामअवतार साहू का ग्रामीण बैंक में खाता है। उसे एमडीबीटीएल का फाॅर्म नहीं दिया जा रहा है। वह परेशान है। कहता है कि जब ऐसा ही था तो प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत खाता ही नहीं खोलना था।
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