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अफसरों को याद आई, नवरात्रि शुरू हो गई, आयोजकों के साथ बैठक करनी है

7 वर्ष पहले
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बिलासपुर. उत्सव प्रेमी हमारे शहर में नवरात्रि पर करीब 200 जगह आयोजन होते हैं। न्यायधानी के विकास के लिए जिम्मेदार सरकारी एजेंसियों ने पुरानी तो दूर नई बसाहट में भी सामाजिक आयोजनों के लिए जगह नहीं छुड़वाई। ऐसे में आज अधिकतर उत्सव और जलसे सड़कों के किनारे या चौक-चौराहों पर हो रहे हैं। नतीजा जगह-जगह ट्रैफिक जाम होता है। लोग परेशान होते हैं लेकिन न तो पुलिस और न ही प्रशासन को कोई लेना-देना है।
आला अफसरों की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आयोजन से पहले समितियों, मंडलों के साथ एक बार भी बैठक नहीं हुई। जब इस गलती का अहसास हुआ तो नवरात्रि के पहले दिन बैठक बुलाई गई। वह भी बाकी आठ दिनों में व्यवस्था कायम करने के लिए या लोगों को परेशानी से बचाने के लिए नहीं, विसर्जन के लिए। जब भास्कर ने जिम्मेदारों से इस लापरवाही पर बात की तो वे कहने लगे, तो क्या हुआ, कल व्यवस्था के लिए बैठक कर लेंगे। वह तो शुक्र है कि आयोजन समितियाें को इसका अहसास है। ऐसे में वे खुद ही वॉलेंटियर और सुरक्षा गार्ड रखकर, नागरिकों को कुछ हद तक राहत दिलवा रही हैं।
जगत जननी दुर्गोत्सव समिति
समिति एक ही स्थान पर वर्ष 1949 से दुर्गोत्सव का आयोजन कर रही है। आबादी बढ़ी तो पंडाल सड़क पर आ गया। ऐसे में तीन दिवसीय आयोजन के दौरान शाम से रात तक कई बार इस जाम के हालात बनते हैं। ऐसे में आयोजन समिति 35-40 निजी सुरक्षा गार्ड रखती है। उनके अपने वाॅलिंटियर भी होते हैं।
ये कारगर कदम हो सकते हैं
आपको यहां का दुर्गोत्सव देखना है तो गाड़ियां अस्थायी पार्किंग में छोड़कर पैदल जाना होगा। ई. राघवेंद्र राव सभा भवन व मिशन हाॅस्पिटल रोड पर वाहन रखे जा सकते हैं।
शहर में झांकियां देखने लोग अक्सर कार या बाइक से आते हैं। इससे ही जाम की स्थिति बनती है।
मध्यनगरी दुर्गोत्सव समिति
यहां 37 साल से दुर्गोत्सव का आयोजन हो रहा है। झांकियां आकर्षण का केंद्र होती हंै, जिन्हें देखने बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। चौक पर पांच ओर से रास्ते आकर मिलते हैं। जगह छोटी होने के कारण भगदड़ जैसे हालात बन सकते हैं। इसी वजह से समिति की ओर से यहां 37 से अधिक निजी गार्ड रखे जाते हैं।
ये कारगर कदम हो सकते हैं
शाम 7 से रात 12 बजे सत्यम टाॅकीज से आने-जाने वाले चारपहिया वाहनों को डायवर्ट कर दिया जाए।
ईदगाह चौक के पास पार्किंग की व्यवस्था हो। इधर जूनी लाइन से आने वाले वाहनों को रोक दिया जाए।
सदर बाजार से खपरगंज स्कूल होते हुए आने वाली गाड़ियाें को खपरगंज स्कूल में पार्किंग दी जाए।
व्यवस्था बनाए रखने के लिए रणनीति नहीं बनाई
शहर में इस साल करीब 200 आयोजन हो रहे हैं। इनमें से 150 ऐसे हंै जो बीच सड़क या फिर व्यस्त चौक-चौराहों पर होते हैं। इसके बाद भी पुलिस और प्रशासन ने आयोजन समितियों के साथ बैठक नहीं की है। पुलिस के पास ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने की रणनीति नहीं है तो प्रशासन के पास आपातकाल की। ऐसे में कुछ समितियां जरूर अपने स्तर पर व्यवस्था बनाने में जुटी हैं। उनके वॉलेंटियर और सुरक्षा गार्ड लोगों को असुविधा से बचाने में लगे रहेंगे।
आज हमने विसर्जन के संबंध में बैठक रखी थी
जेआर ठाकुर, ट्रैफिक प्रभारी व एएसपी ग्रामीण
शहर में दुर्गोत्सव शुरू हो रहा है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने आयोजन समितियों की बैठक भी नहीं बुलाई, इसकी क्या वजह है?
शुक्रवार को हम उनकी भी बैठक बुलाएंगे। आज हमने विसर्जन के संबंध में बैठक रखी थी। इसमें रात को निर्धारित समय के बाद डीजे बजाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।
आयोजन अभी शुरू हुआ है, उसके बजाय पहले विसर्जन की चिंता कर रहे हैं?
मैं अापसे इस पर बाद में बात करता हूं। अभी हम सभी महामाया की सेवा में लगे हुए हैं।