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एक चिट्ठी के दम पर पैरलल बोर्ड, पैसे के बल पर रिज्लट

8 वर्ष पहले
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बिलासपुर। माशिमं अध्यक्ष की चिट्ठी के सहारे चल रहे बोर्ड ऑफ स्कूल एंड टेक्निकल एजुकेशन ने शिक्षा विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल का नियम कहता है कि विधिवत प्रक्रिया और सदस्यों की सहमति बिना किसी बोर्ड को संबद्धता नहीं दी जा सकती। इधर, बोर्ड हर महीने 10 वीं-12वीं का ओपन एग्जाम ले रहा है। इससे जुड़े स्कूल में कभी भी जाकर पैसे देने और सिर्फ एक फार्म भर देने से पर्चा हल करने की पात्रता भी दे दी जा रही है।

किसी भी स्कूल या संस्थान को परीक्षा लेने की पात्रता तभी मिलती है, जब बोर्ड के सदस्य सहमति दें और सचिव संबद्धता प्रमाण पत्र जारी करें। गजट नोटिफिकेशन के जरिए शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आदेश जारी करते हैं और इसकी कॉपी संबंधित जिले के शिक्षा विभाग को दी जाती है। इस बोर्ड ने माशिमं द्वारा 17 नवंबर 2012 को माशिमं सचिव को लिखी गई उस पत्र को आधार बताया है, जिसमें बोर्ड ऑफ स्कूल एंड टेक्निकल एजुकेशन को अस्थाई संबद्धता देते हुए परीक्षा लेने की अनुमति दी गई है।

डीबी स्टार की टीम मंगला के एस्कॉर्ट स्कूल में थी, तब स्कूल संचालक आरके राठौर वहां आया। संचालक से 12वीं की परीक्षा, फार्म व फीस की जानकारी मांगी गई। संचालक ने रिपोर्टर से कहा कि अगर वह एक दिन बाद परीक्षा देगा तो उसकी फीस 2 हजार रुपए बढ़ जाएगी। इसके बाद उसे दूसरे दिन 12 हजार रुपए लेकर बुलाया गया और कहा गया कि परीक्षा में पास होने की पूरी गारंटी है। परीक्षा सिर्फ नाम की होगी। फीस में रियायत मांगने पर उसने कहा कि बाकी छात्र भी १२ हजार रुपए देकर ही परीक्षा दे रहे हैं। उन्हें भी पैसे लेकर पास होने की गारंटी दी गई है। डायरेक्टर ने मंगला के दीनदयाल कालोनी स्थित एस्कॉर्ट नामक निजी स्कूल की जानकारी देकर वहां जाने के लिए कहा।

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