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नक्सलियों की लूटपाट, वसूली के खिलाफ आदिवासियों के आंदोलन में झारखंड के लोग भी साथ

7 वर्ष पहले
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आरा. नक्सलियों की लूटपाट, वसूली और ठप हो गए विकास से त्रस्त 25 से ज्यादा गांवों के आदिवासियों का आंदोलन जोर पकड़ रहा है। मंगलवार को भी भाले, फरसे, तीर-कमान से लैस आदिवासियों की 50 से ज्यादा टुकडिय़ों ने जंगल और पहाडिय़ों में नक्सलियों की तलाश की। इस अभियान में झारखंड के आदिवासी भी कूद पड़े हैं। इनमें नक्सली कमांडर बुधराम के गांव काटासारू के लोग भी हैं। दूसरी तरफ सीआरपीएफ और जिला पुलिस ने भी आरा इलाके में ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

जीपीएस और अत्याधुनिक हथियारों से लैस तीन सौ से ज्यादा जवानों ने जंगल में सर्चिंग की। हालांकि पुलिस के आला अफसर आदिवासियों के इस आंदोलन के बारे में चुप्पी साधे हुए हैं। आरा ग्राम पंचायत के गांव ठुठीअंबा से इस आंदोलन की चिंगारी फूटी। आज सुबह करीब आठ बजे आसपास के पांच सौ से ज्यादा आदिवासी हथियारों के साथ गांव के बाहर जुटे। वहां पूरी योजना बनी और टीमें रवाना हो गईं।

ठुठीअंबा से 20 से 30 किलोमीटर दूर तक के इलाके को कवर किया जा रहा है। आरा इलाके में मंगलवार सुबह हथियारों के साथ आदिवासियों की एक रैली निकली, जिसमें एक हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए। इसमें काफी सारे लोग झारखंड के भी थे। रैली में शामिल आदिवासियों ने कहा कि अब उनके सामने करो या मरो के हालात हैं। जंगल में अब आदिवासी रहेंगे या नक्सली। लोगों ने इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि पुलिस नक्सलियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही।